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Hunkkaar Series Review: 'सैयारा' के बाद अनीत पद्दा की 'हुंकार' में कितना दम, कैसी है JioHotstar की नई सीरीज?

Published: Fri, 25 Sep 2026 09:22 AM (IST)

अनीत पद्दा और फातिमा सना शेख स्टारर कोर्ट रूम ड्रामा सीरीज हुंकार (Hunkkaar) जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो चुकी है। यहां पढ़ें सीरीज का रिव्यू-

'हुंकार' वेब सीरीज रिव्यू

'हुंकार' वेब सीरीज रिव्यू

HighLights

  1. 'हुंकार' वेब सीरीज रिव्यू

  2. 25 सितंबर को रिलीज हुई है सीरीज

  3. अनीत पद्दा और फातिमा सना शेख ने निभाया लीड रोल

एकता गुप्ता, नई दिल्ली। बाबाओं, धर्मगुरुओं या संतों द्वारा धर्म और आस्था की आड़ में किए जाने वाले अपराध कोई नहीं बात नहीं है। इस विषय पर बनी बॉबी देओल की आश्रम को दर्शकों ने काफी पसंद किया था और अब इसी विषय पर एक और वेब सीरीज नित्या मेहरा और करण डी. कपाड़िया के निर्देशन में बनी 'हुंकार' रिलीज हुई है।

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कहानी

सोशल थ्रिलर और कोर्ट रूम ड्रामा 'हुंकार: द रोर' (Hunkkaar: The Roar) की कहानी 17 साल की मीनू रावत (Aneet Padda) के ईर्द-गिर्द घूमती है जो मध्य-प्रदेश के बड़े संत बापजी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है। इस केस की जांच एसीपी जसलीन सिंह सोनी (Fatima Sana Shaikh) करती है।

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जल्द ही पॉक्सो एक्स के तहत अदालत में केस पर बहस छिड़ती है जिसमें जीशान अयूब, मीनू के तरफ से और राम कपूर अपोजिशन की तरफ से केस लड़ते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब अनीत के खिलाफ कुछ ऐसी बातें पता चलती हैं जिससे धीरे-धीरे ये मामला बापजी की तरफ झुक जाता है।

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तो क्या मीनू ने अपनी उम्र गलत बताकर पॉक्सो एक्ट लगवाया? क्या मीनू ने बापजी पर गलत आरोप लगाया? क्या बापजी ने सच में मीनू के साथ यौन उत्पीड़न किया? क्या पुलिस सच का पता लगाने में सफल होगी? इन सवालों के जवाब सीरीज में मिलेंगे।

निर्देशन

नित्या मेहरा और करण डी. कपाड़िया के निर्देशन में बनी कोर्ट रूम ड्रामा की कहानी अच्छी है लेकिन पहले से सुनी-सुनाई लगती है। यानी इस तरह का सिनेमा पहले आश्रम (Aashram) जैसी सीरीज में देखा चुका है। लेकिन अगर किसी और सीरीज से इसकी तुलना ना करें तो 6 एपिसोड की इस सीरीज का निर्देशन अच्छा है।

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सीरीज की लोकेशन, एडिटिंग, सिनेमैटोग्राफी प्रभावी है। मध्य प्रदेश के ओरछा के आस-पास बुनी गई सीरीज में छोटा गांव, सबुरी आश्रम जैसी जगहें प्रभावी लगती है। इसके साथ ही कोर्ट में जीशान अयूब और राम कपूर की बहस भी कहानी से बांधने का काम करती है। वहीं एक जर्नलिस्ट के किरदार में अर्जुन माथुर ने अच्छा काम किया है।

एक्टिंग

सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी एक्टिंग है। सैयारा के बाद अनीत पद्दा ने एक 17 साल की लड़की का इंटेंस किरदार अच्छे से निभाया है। एसीपी के किरदार में फातिमा सना शेख का काम प्रभावी है।

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वहीं वकील के रूप में राम कपूर और जीशान अयूब ने शानदार काम किया है। कोर्ट में केस पर बहस काफी बारीकी से दिखाई गई जो कि दिलचस्प लगती है।

बापजी के किरदार में रघुबीर यादव की कास्टिंग थोड़ी फीकी लगती है, स्क्रीन पर देखकर लगता है कि कोई और इस किरदार में हो सकता था। जो थोड़ा प्रभावी लग सके।

क्या है खूबी और कमी?

सीरीज की खूबी इसकी कास्ट और इसके लिए चुनी जगह है। हालांकि कहानी भी अच्छी है लेकिन इसमें कोई नयापन नहीं है, क्योंकि इस तरह की कहानी पहले भी कही जा चुकी है वो भी बेहतर तरीके से।

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सीरीज के 6 एपिसोड्स तकरीबन 50 मिनट के हैं जो कि काफी लंबा टाइम है। कहीं-कहीं पर लगता है इसे जबरदस्ती खींचा जा रहा है।

इसके साथ ही कहानी प्रीडिक्टेबल है और जब कोई थ्रिल नहीं है तो 50 मिनट तक एपिसोड्स खींचने का कोई मतलब नहीं है।

फाइनल वर्डिक्ट

अगर आपको 'आश्रम' जैसी सीरीज और कोर्ट रूम ड्रामा जॉनर पसंद है साथ ही अनीत पद्दा समेत अन्य अच्छे कलाकारों की एक्टिंग देखना चाहते हैं तो 'हुंकार' एक बार देखने लायक है।

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