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Gullak की इस एक्ट्रेस का Panchayat 3 की 'मंजू देवी' से है खास कनेक्शन, परेशान होकर छोड़ी थी एक्टिंग

साल 2024 में कई वेब सीरीज के नए सीजन एक बार फिर से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर धमाल मचा रहे हैं। 28 मई को पंचायत 3 प्राइम वीडियो (Prime Video) पर रिलीज हुई और अब उसके बाद जल्द ही गुल्लक का सीजन 4 रिलीज होने वाला है। हाल ही में इस सीरीज की एक्ट्रेस सुनीता राजवर ने बताया कि उनके और पंचायत की मंजू देवी के बीच क्या कनेक्शन है।

By Jagran News Edited By: Tanya Arora Fri, 31 May 2024 08:12 AM (IST)
Gullak की इस एक्ट्रेस का Panchayat 3 की 'मंजू देवी' से है खास कनेक्शन, परेशान होकर छोड़ी थी एक्टिंग
Gullak की इस एक्ट्रेस का Panchayat 3 की 'मंजू देवी' से है खास कनेक्शन/ Photo- Imdb

स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। पारिवारिक मनोरंजन की मिठास के साथ सोनी लिव पर सात जून से प्रदर्शित होगा वेब शो गुल्लक का चौथा सीजन। वर्ष 2019 में कोरोना के भय और अनिश्चितता के माहौल में मध्यमवर्गीय मिश्रा परिवार की कहानी गुल्लक ने एक उम्मीद दी थी कि अपनों का साथ हो तो हंसते हुए सभी समस्याओं का हल खोजा जा सकता है।

रोजगार, स्वास्थ्य की चिंता, प्रतियोगिता के दबाव, सीमित आय व बढ़ती आवश्यकताएं जैसे मुद्दों को उठाती गुल्लक के तीन सफल सीजन के बाद अब चौथे सीजन में भी दिखेगा मिश्रा परिवार का वही जज्बा।

मिश्रा परिवार के मुखिया संतोष मिश्रा का पात्र निभा रहे जमील खान, उनके बड़े बेटे अन्नू बने वैभव राज गुप्ता और पड़ोसी बिट्टू की मम्मी की भूमिका निभा रहीं सुनीता राजवर ने साझा की शो से जुड़ी बातें...

गुल्लक से जुड़ाव किस प्रकार हुआ?

वैभव : मेरे छोटे भाई अमृत राज गुप्ता ने ही इसके पहले सीजन का निर्देशन किया था। वह पहले किसी और कलाकार को लेना चाहते थे। मैं थिएटर में व्यस्त था, पर यूं ही ऑडिशन दे दिया था। तब भी मैं पात्र निभाने को लेकर सुनिश्चित नहीं था। मन में था कि ड्रामा, क्राइम आधारित गंभीर शो करूंगा, पर शायद भाग्य में इस शो का हिस्सा बनना लिखा था।

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जमील खान: टीवीएफ (निर्माता कंपनी) वालों ने मेरा एक नाटक देखा था। उसमें एक कहानी थी संक्रमण। उसमें नसीर भाई (नसीरुद्दीन शाह) मेरे पिता बने थे और सीमा पाहवा मां। वहीं से उन्होंने निर्णय कर लिया था कि शो में पापा की भूमिका मैं ही करूंगा। पहले मैंने मना किया, फिर जब निखिल विजय (शो के लेखक) ने कहानी सुनाई तो अच्छी लगी।

सुनीता राजवर: इसकी शुरुआत ऑडिशन से ही हुई थी। उसके बाद वर्कशाप हुई तो हम सब मिले। संतोष की पत्नी शांति की भूमिका निभा रहीं गीतांजलि को मैं जानती हूं। वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से हैं। जमील को पहले से जानती हूं। मैंने उनके नाटक देखे थे। वैभव और छोटे भाई की भूमिका निभा रहे हर्ष से वर्कशाप में मिली। वहीं से खूबसूरत सफर की शुरुआत हुई।

शो की सफलता के बाद लोगों का दृष्टिकोण कितना बदला?

जमील: गुल्लक मेरे लिए वरदान रहा। पहचान और प्यार मिला। थोड़ा नुकसान भी हुआ। संतोष मिश्रा के पात्र को इतना पसंद किया गया कि अब पिता के रोल के बहुत प्रस्ताव आने लगे हैं। जब आपने एक स्तर का काम किया हो तो कम में मजा नहीं आता।

सुनीता: हां, काम तो मैंने बहुत किया था लेकिन प्यार इस भूमिका को करने के बाद अधिक मिला।

वैभव: गुल्लक से पहले भी थोड़ा बहुत काम कर रखा था, पर गुल्लक में मेरा अभिनय देखने के बाद अब निर्माताओं का भरोसा बढ़ा है। वे मुझे लेना चाहते हैं। पात्र की बात करते हैं।

आपने तो एक्टिंग छोड़ने का भी मन बना लिया था ?

सुनीता: मैंने दो वर्ष के लिए अभिनय से दूरी बना ही ली थी, पर भाग्य ने नए सफर पर भेज दिया। गुल्लक का हिस्सा बनने का अवसर मिला। कई लोगों ने बताया कि कठिन समय में गुल्लक देखकर उनके चेहरों पर मुस्कान आ जाती है। अगर कोई परेशान है तो गुल्लक उसका मरहम है। जहां तक एक्टिंग छोड़ने की बात है तो मुझे ढंग के रोल नहीं मिल रहे थे।

जब ढंग के रोल नहीं मिलते तो पैसे भी नहीं मिलते। तब जीविकोपार्जन करना मुश्किल होता है। मैं एनएसडी से हूं। मैंने मेकअप और कॉस्ट्यूम भी सीखा है। कहते हैं कि रोल छोटा बड़ा नहीं होता, लेकिन होता है। जब लगातार वो सब हो रहा था तो मन इससे हटने लगा था।

बहुत भूमिकाओं के लिए आपका रूप भी जरूरी होता है। लगा कि मैं इसके लिए नहीं बनी हूं। तब अभिनय छोड़ दिया और मसाबा (अभिनेत्री नीना गुप्ता की बेटी) की मैनेजर बन गई।

वैभव: हम तो प्रतीक्षा करते थे कि सुनीता जी की तारीखें मिलें तो हम गुल्लक की शूटिंग करें। शो में पात्रों की शरारतें मुस्कुराहटें लाती हैं। बचपन की शरारतों पर आपको कभी डांट-फटकार मिली?

जमील: बचपन में मैं एक बार बिना इजाजत चचेरे भाई के साथ फिल्म देखने गया था। जब लौटा तो शाम हो गई थी। डैड ने सजा के तौर पर पैंट उतरवाई। सिर्फ शर्ट और नेकर में गेट के बाहर खड़ा कर दिया। बाहर प्रकाश नहीं था। वो सजा आज तक याद है। मुश्किल से पांच मिनट खड़ा रहा, लेकिन लगा कि पांच सौ वर्ष गुजर गए। अब्बू से तीन-चार दिन बात नहीं की। फिर उन्होंने बुलाकर कहा कि अब तुम बिना पूछे कहीं नहीं जाओगे। यह सजा हमेशा याद रहेगी।

वैभव: पापा से बहुत डर लगता था। गर्मी में पानी की बर्बादी या अन्य शरारतों पर पिटाई हो जाती थी। उसके बाद तो हम शांति से सो जाते थे, पर जब उठते थे तो देखते थे कि समोसा और कोल्ड ड्रिंक मंगवाया गया है। पापा नहाकर बैठे हैं। यही उनके प्यार जताने का तरीका होता था।

सुनीता: शरारत पर सजा मिलती थी, पर प्यार भी बहुत मिला। परिवार से जो भावनात्मक सुरक्षा मिलती है, वही भविष्य की चुनौतियों से जूझने का हौसला देती है। गुल्लक का सीजन 4 सात जून को रिलीज होगा। 

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