मुंबई। कभी-कभी जीवन में हम सब एक ऐसे दोराहे पर आकर खड़े हो जाते हैं, जहां से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि हम कौन सा रास्ता चुने? इस कशमकश का अंदाज़ा वही लगा सकता है, जो इन हालातों में घिरा होता है। इन दिनों छोटे पर्दे पर एक ऐसा ही शो प्रसारित हो रहा है जो हमें जीवन के इसी कशमकश का आईना दिखाती है।

हम बात कर रहे हैं सोनी टीवी पर प्रसारित हो रहे रियल्टी शो 'ज़िंंदगी के क्रोसरोड्स' की। यह अपने तरह का एक अलग और नायाब रियल्टी शो है। भारतीय टेलिविजन के इतिहास में इस तरह का शो पहले कभी नहीं आया। दरअसल, इस शो में होस्ट की भूमिका निभा रहे टीवी के वेटरन अभिनेता राम कपूर स्टूडियो में मौजूद तमाम दर्शकों को एक कहानी दिखाते हैं। उस कहानी में कई बार कुछ दिलचस्प मोड़ आता है, जहां पर यह सवाल खड़ा होता है कि अब क्या किया जाए? कहानी के पात्रों की इसी कशमकश को लेकर राम कपूर स्टूडियो में मौजूद दर्शकों की राय लेते हैं कि बतायें अब इस पात्र को क्या करना चाहिए? इस पर तमाम दर्शक अपने-अपने विचार बताते हैं, चर्चा होती है। उसके बाद उस कहानी का अगला हिस्सा फिर से दिखाया जाता है। टीवी प्रोग्राम के लिहाज से यह काफी नया और दिलचस्प कॉन्सेप्ट है।

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इस दिलचस्प कॉन्सेप्ट के पीछे जिस क्रिएटिव लेखक का दिमाग है, उनका नाम है ए. महादेव। महादेव दक्षिण भारत के एक बड़े राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हैं। ए. महादेव के बारे में बता दें कि इन्होंने अपना करियर 'बाहुबली' के डायरेक्टर एस एस राजामौली के साथ सहायक निर्देशक और लेखक के रूप में शुरू किया था। साथ ही बाहुबली के लेखक और डायरेक्टर राजामौली के पिता विजयेन्द्र प्रसाद के साथ रहकर इन्होंने कई स्क्रिप्ट्स और स्क्रीनप्ले लिखे हैं। ए. महादेव उन्हें अपना गुरु मानते हैं। इस टीवी शो से कैसे जुड़े? यह पूछने पर वो बताते हैं कि यह टीवी शो उन्हें एक चुनौती के रूप में मिला। इस शो का आइडिया उनके दिमाग में साल 2012 से ही था जब वो 'राउडी राठौड़' के लिए स्क्रीनप्ले लिख रहे थे। बाद में फ़िल्म के निर्माता शबीना ख़ान ने जब उनसे टीवी के लिए कोई कॉन्सेप्ट मांगा तो उन्होंने उन्हें यह कॉन्सेप्ट सुनाई और इस तरह से इस शो पर काम शुरू हो गया।

ए. महादेव बताते हैं कि इस शो के लिए उन्हें 39 कहानियां चाहिए थीं, जिनमें से 10 कहानियां तो उन्होंने महज पांच दिनों में ही लिख कर दे दिए। लेकिन, उसके बाद शुरू हुई असली चुनौती। जिस काम को वो आसान समझ रहे थे उन्हें इसमें डेढ़ साल का वक्त लग गया। क्योंकि कहानी को दिलचस्प और रोचक रखना बड़ी चुनौती थी और यह भी देखना था कि कुछ रिपीट न हो जाए। ए. महादेव ने इस शो को जीवन भर याद रखने वाला अनुभव बताया है। जागरण डॉट कॉम से एक ख़ास बातचीत में ए. महादेव ने बाहुबली के डायरेक्टर एस एस राजामौली को लेकर भी कई बातें बताई।

ए. महादेव के मुताबिक अपने काम को लेकर राजामौली शुरू से ही बेहद फोकस्ड और समर्पित रहे हैं। 'बाहुबली' जैसी कमाल की फ़िल्म बनाने वाले राजामौली के बारे में बात करते हुए महादेव थोड़े इमोशनल हो जाते हैं। ए. महादेव के मुताबिक हर वो शख्स जो राजामौली के साथ काम कर लेगा उसमें भी बेहतर सिनेमा बनाने की ललक अपने आप आ जायेगी। राजामौली के परिवार और उनके संघर्ष की कहानी भी ए. महादेव पूरे मनोयोग से बताते हैं। वो कहते हैं कि- ''राजामौली के पिता अपनी सारी संपत्ति लगा कर फ़िल्में बनाते रहे लेकिन, फ़िल्में चली नहीं और पैसा डूब गया। कोई और होता तो वो अपने बच्चों को फ़िल्मों से दूर रखता लेकिन, राजामौली को उनके पिता ने शुरू से ही फ़िल्ममेकिंग की ट्रेनिंग दी। उन्हें यह यकीन था कि जिस सिनेमा ने उनकी सारी दौलत ले ली है, यही सिनेमा उन्हें वो सब कुछ वापस भी देगा। और आप जानते हैं आज की तारीख में राजामौली और विजयेन्द्र प्रसाद होने का क्या मतलब है?''

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बहरहाल, सोनी टीवी के शो 'ज़िंदगी क्रोस रोड्स' की बात करें तो 6 जून से प्रसारित हो रहा यह शो हर बुधवार से शुक्रवार तक रात साढ़े आठ बजे देखा जा सकता है। राम कपूर भी इस शो को लेकर बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा भी है कि यह शो उनके असल जीवन के भी काफी करीब है।

Posted By: Hirendra J