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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 12, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

The Tashkent Files Movie Review: जानिए कितने स्टार मिले और क्या है ख़ास

By Hirendra JEdited By:
Published: Fri, 12 Apr 2019 12:12 PM (IST)Updated: Sat, 13 Apr 2019 08:24 AM (IST)

The Tashkent Files Movie Review अगर आपको राजनीतिक फिल्मों में दिलचस्पी है और अगर भारत के दूसरे प्रधानमंत्री शास्त्री जी की मौत से जुड़ी तमाम सारी थ्योरीज़ से आप वाकिफ..

The Tashkent Files Movie Review: जानिए कितने स्टार मिले और क्या है ख़ास
The Tashkent Files Movie Review: जानिए कितने स्टार मिले और क्या है ख़ास

-पराग छापेकर

फिल्म- द ताशकंद फाइल्स (The Tashkent Files)

स्टारकास्ट: नसीरुद्दीन शाह, मिथुन चक्रबर्ती, श्वेता बसु, पल्लवी जोशी, मंदिरा बेदी, पंकज त्रिपाठी आदि।

निर्माता/निर्देशक/पटकथा: विवेक अग्निहोत्री

हमारी फिल्म इंडस्ट्री राजनीतिक मुद्दों पर फिल्में बनाने से हमेशा से ही कतराती रही है। आजादी के बाद कुछ गिनी चुनी फ़िल्में ही हैं जो राजनीतिक मुद्दों पर बनाई गई है! जो बनाई गई हैं उसमें एजेंडा फिल्में ज्यादा रहीं और निष्पक्ष राजनीतिक फिल्मों का अभाव रहा है! लेकिन, अब इस परंपरा को बदलने की कोशिश में आई है डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म – द ताशकंद फाइल्स।

यह कहानी है अखबार की रिपोर्टर रागिनी की, जिसका बॉस उसको 15 दिनों का अल्टीमेटम दे देता है और इस दौरान रागिनी को एक सनसनीखेज रिपोर्ट देनी है! रागिनी को एक कॉल आता है और कुछ पहेलियां बुझाने के बाद वो एक हिंट देता है जो भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री Lal Bahadur Shastri की रहस्यमई मौत से जुड़ा है!

गौरतलब है कि लाल बहादुर शास्त्री एक समझौता साइन करने पूर्व सोवियत यूनियन की राजधानी ताशकंद गए थे और समझौता साइन करने के बाद वहीं उनकी मौत हो गई थी! तब से लेकर आज तक शास्त्री जी की मौत को लकार यह कयास हमेशा से लगाया जा रहा है कि शास्त्री जी की मौत हृदयाघात से हुई या जहर देकर हुई? इस स्टोरी पर रागिनी तहे दिल से काम करना शुरू कर देती है और आगे इस दौरान उसे किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, कुछ इसी ताने-बाने पर आधारित है फिल्म ताशकंद फाइल्स।

डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने इस जटिल विषय पर फिल्म बनाने के लिए कमेटी को डिवाइस बनाकर आम आदमी के लिए समझने के लिए एक बेहतरीन काम किया है। रागिनी के पॉइंट ऑफ व्यू से विवेक का मानना है कि शास्त्री जी की मृत्यु जहर देकर ही की गई थी और इसके लिए उन्होंने अलग-अलग सबूत पेश किए जो दुनिया भर की किताबों में दर्ज है। ऐतिहासिक किताबों के अलग-अलग एंगल लेकर विवेक साबित जरूर करते हैं कि शास्त्री जी की मृत्यु के बाद उनका पोस्टमार्टम ना किया जाना और उनके शरीर का काला पड़ जाना, कहीं न कहीं एक रहस्य जरूर पैदा करता है और इसके पीछे स्टेट की स्पॉन्सरशिप रही ये शंका भी वो जताते हैं! मगर साथ ही साथ वह अपनी जिम्मेदारियों से डिस्क्लेमर देकर बच जाते हैं कि यह सिर्फ रचनात्मक कार्य है। ऐसे में इस रचनात्मक कार्य पर कितना विश्वास किया जाए, यह कहना मुश्किल है?

अभिनय की अगर बात करें तो श्वेता बसु प्रसाद अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती हैं। इसके अलावा पल्लवी जोशी, नसीरुद्दीन शाह, पंकज त्रिपाठी, वीएम बडौद, मंदिरा बेदी और राजेश शर्मा जैसे कलाकार फिल्म का सशक्त आधार रहे। त्रिपाठी के किरदार में मिथुन चक्रवर्ती पूरी तरह छाए रहे। कुल मिलाकर अगर आपको राजनीतिक फिल्मों में दिलचस्पी है और अगर भारत के दूसरे प्रधानमंत्री शास्त्री जी की मौत से जुड़ी तमाम सारी थ्योरीज़ से आप वाकिफ होना चाहते हैं तो आप यह फिल्म देखने जा सकते हैं।

जागरण डॉट कॉम रेटिंग: पांच (5) में से ढाई (2.5) स्टार

अवधि: 144 मिनट

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