पराग छापेकर, मुंबई। ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह पहली बार है जब कमर्शियल सिनेमा के जून में पुरुषों के समलैंगिक प्यार पर कोई फिल्म बन रही है। कोर्ट ने समलैंगिक रिश्तों पर कानून का जरूर लगा दिया है मगर भारतीय समाज में इस तरह के रिश्तों को अपनाना कितना मुश्किल है इसका बयान मंगल ज्यादा सावधान करती है।

यह कहानी है बनारस में रहने वाले त्रिपाठी परिवार की जो एक मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार है। जिसमें अमन की परवरिश हुई है और ऐसे में अमन को हो जाता है कार्तिक से प्यार! और जब यह बात घरवालों को पता चलती है तो पूरा परिवार पूरी तरह से हिल जाता है। इसके बाद क्या होता है यही कहानी है शुभ मंगल ज्यादा सावधान की।

निर्देशक हितेश केवल ले ने इस संवेदनशील मुद्दे को खूबसूरती के साथ मनोरंजन देते देते समझाया है। उनकी पकड़ फिल्म के हर दृश्य में साफ नजर आती है। यह फिल्म बनाना अपने आप में बहुत ही चुनौतीपूर्ण था जिसमें हितेश पूरी तरह से सफल हुए हैं। जिस तरह से उन्होंने यह फिल्म की कहानी स्क्रीनप्ले और संवाद लिखे हैं वह

काफी फुलप्रूफ थे।

पिता के किरदार में गजराज राव अभिनय की एक अलग ऊंचाई छूते हैं वहीं नीना गुप्ता उनका साथ देने में कहीं पीछे नहीं रहतीं। आयुष्मान खुराना जैसे सितारे समाज के इस दबे छुपे सब्जेक्ट पर काम करने के लिए तैयार हो गए इसके लिए वह बधाई के हकदार हैं। कार्तिक के किरदार में उन्होंने जिस तरह से परफॉर्म किया है वह सलामी के हकदार हैं! अमन के किरदार में जीतू कुमार भी आपका दिल छू लेते हैं।

कुल मिलाकर शुभ मंगल ज्यादा सावधान एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म है जो न सिर्फ इन संवेदनशील मुद्दे पर बात करती है साथ ही साथ आपका मनोरंजन करती है। आपको एजुकेट करती है हालांकि सेंसर बोर्ड ने इसे ए सर्टिफिकेट दिया है मगर प्रकृति प्रदत विषय पर पूरे समाज को शिक्षित होना आवश्यक है जो शायद समय के साथ साथ ही संभव हो पाएगा!

रेटिंग : 4 स्टार

 

Posted By: Nazneen Ahmed

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस