नई दिल्ली, मनोज वशिष्ठ। सुधीर मिश्रा की फ़िल्म सीरियस मेन मुख्य रूप से दो 'घाटालों' यानि स्कैम्स की कहानी है। एक स्कैम अंतरिक्ष में एलियन माइक्रोब्स की खोज के नाम पर हो होता है, जिसे एक बेहद मशूहर स्पेस साइंटिस्ट अंजाम देता है, जो जाति से ब्राह्मण है। दूसरा घोटाला धरती पर अपने वजूद को साबित करने के लिए एक पिता करता है, जो दलित समुदाय से है। इन दोनों घोटालों के बीच सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव से निकलने की छटपटाहट और गगनचुम्बी इमारतों में रहने वाले एलीट क्लास के स्टेटस का पीछा करने की व्याकुलता 'सीरियस मेन' के ड्रामे का सार है।

फ़िल्म शुक्रवार को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गयी और इसके साथ नवाज़ ने नेटफ्लिक्स के साथ अपनी हेट्रिक पूरी कर ली, जिसकी शुरुआत चर्चित और विवादित वेब सीरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' से हुई थी। 

सीरियस मेन मनु जोसेफ के इसी नाम से आये नॉवल पर आधारित है। तमिलनाडु के एक छोटे से गांव के दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाला अय्यन मणि (नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी) मुंबई की एक चॉल में एक छोटे से कमरे में पत्नी (इंदिरा तिवारी) के साथ रहता है। अय्यन साइंटिस्ट डॉ. आचार्य (नासर) का पीए है। बॉस की आदतन झिड़कियों के साथ तंगहाली में जीवन बिताने वाला अय्यन अपने बेटे को एक सुरक्षित और कामयाब भविष्य देना चाहता है। वो उसे 'सीरियस मैन' बनाना चाहता है। यहां सीरियस का सांकेतिक मतलब एलीट या संभ्रांत समझा जाए।

बेटे के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की उत्कट चाहत के लिए वो एक ऐसा खेल रचता है, जिसका ग़लत अंजाम उसे बर्बादी की ओर ले जाता है। अय्यन अपने सामान्य बुद्धि वाले बेटे को दुनिया के सामने एक जीनियस के तौर पर प्रोजेक्ट करता है। इसके लिए वो उसे बड़ी-बड़ी बातें और वैज्ञानिक शब्दावली सिखाता है। किसी पब्लिक स्पीकिंग के दौरान ज़रूरत पड़ती है तो ब्लू टूथ और हियरिंग एड के ज़रिए उसे आगे की पंक्तियां बताता है। 

इससे उसे समाज में रुतबा, शोहरत, पैसा सब कुछ मिलता है। मगर, एक वक़्त बाद बच्चा झूठ के इस बोझ को उठा नहीं पाता और उसका राज़फ़ाश होने लगता है। उधर, डॉ. आचार्य की अंतरिक्ष में एलियन माइक्रोब्स की तलाश बोगस साबित होती है और उनकी नौकरी चली जाती है, जिसके लिए काफ़ी हद तक अय्यन ज़िम्मेदार होता है। अब कहानी ऐसे मोड़ पर आ जाती है, जब अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के दोनों 'घोटालेबाज़' एक-दूसरे की मदद करके अंतत: इसे एक निर्णायक क्लाइमैक्स की ओर ले जाते हैं। 

सीरियस मेन एक तरफ़ जातिगत कुंठा और ग़रीबी से त्रस्त एक इंसान की आकांक्षाओं पर टिकी है, वहीं एजुकेशन सिस्टम की कुछ बुनियादी ख़ामियों पर भी सवाल उठाती है। धार्मिक और सियासी लोगों के लिए दलित वर्ग के क्या मायने हैं, इस पर सीरियस मेन रोशनी डालती है। 

सीरियस मेन ऐसे अनगिनत बच्चों की कहानी भी है, जिनका बचपन अपने माता-पिता की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ जाता है। यह अलग बात है कि इसके संवादों और कुछ दृश्यों की वजह से बच्चे ही इस फ़िल्म को नहीं देख पाएंगे। संवादों को वास्तविकता के नज़दीक रखने के चक्कर में गालियों का धारा-प्रवाह इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, वो किरदार और वक़्त की ज़रूरत के हिसाब से ही है। 

बतौर कलाकार नवाज़उद्दीन की क्षमताओं को देखते हुए, ऐसे चरित्र निभाना उनके लिए कोई चुनौती नहीं रही। नवाज़ ने अय्यन के किरदार के विभिन्न पहलुओं का कामयाबी के साथ पर्दे पर पेश किया है। मुंबई में रहने वाले दक्षिण भारतीय किरदार के लहज़े को नवाज़ ने पकड़कर रखा है। मगर, सबसे अधिक प्रभावित किया बेटे का किरदार निभाने वाले बाल कलाकार अक्षत दास और पत्नी बनीं इंदिरा तिवारी ने।

अक्षत ने पिता की आकांक्षाओं के बोझ तले दबे मासूम बेटे की जीत और हार को बेहद सधे हुए तरीक़े से जिया है। ख़ासकर वो दृश्य, जब जीनियस होने का किरदार ना निभा पाने की चोट उसके नन्हे मन और दिमाग पर असर करती है। वहीं, इंदिरा ने चॉल में रहने वाली निम्न आय वर्ग की महिला के हाव-भाव को पूरी शिद्दत से पर्दे पर उतारा है। इस किरदार के लिए उनके मैनेरिज़्म कमाल के हैं। लगता नहीं कि इंदिरा एक्टिंग कर रही हैं। नेता और बिल्डर के रोल में संजय नर्वेकर और उनकी भावी पॉलिटिशियन बेटी के रोल में श्वेता बसु प्रसाद ने ठीक-ठाक काम किया है।

सीरियस मेन के साथ जो एक दिक्कत नज़र आती है, वो यह है कि इसमें एक साथ बहुत कुछ कहने की कोशिश की गयी है और वजह से फ़िल्म कहीं-कहीं थोड़ी उलझी हुई भी लगती है। इस मोर्चे पर फ़िल्म थोड़ा कमज़ोर महसूस होती है, लेकिन इतनी कमज़ोर भी नहीं कि फ़िल्म को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए। संजीदा विषयों को उछालती फ़िल्म का ट्रीटमेंट नवाज़ के किरदार के ज़रिए हल्का-फुल्का रखा गया है, जिसके चलते ऊबाऊ नहीं होती। 

कलाकार- नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी, इंदिरा तिवारी, अक्षत दास, नासर, संजय नर्वेकर, श्वेता बसु प्रसाद आदि।

निर्देशक- सुधीर मिश्रा

प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

स्टार- *** (तीन स्टार)

अवधि- दो घंटा

इंडियन टी20 लीग

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