पराग छापेकर, मुंबई। कुछ फिल्में ऐसी होती है, जिनसे आप कोई उम्मीद रखकर देखने नहीं जाते, लेकिन जब फिल्म आपकी उम्मीद से कहीं बेहतर निकलती है तो फिल्म देखने का मजा दोगुना हो जाता है। सैटेलाइट शंकर कुछ ऐसी ही फिल्म है, जिसे निर्माताओं ने भी छोटी फिल्म समझकर उसकी पब्लिसिटी पर ज्यादा खर्चा करना मुनासिब नहीं समझा, मगर 5 मिनट के अंदर ही सैटेलाइट शंकर आपको अपनी गिरफ्त में ले लेती है।

आप सैटेलाइट शंकर की दुनिया से बाहर निकलना नहीं चाहते। निर्देशक इरफान कमल ने जिस संपूर्णता से फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले गढ़ा है। जिस तरह से उन्होंने हर सीन मैं भावनाओं का तूफान उठाया है, वह वाकई काबिले-तारीफ़ है। यह कहानी है एक फौजी जवान की, जिसे बड़ी मुश्किल से 8 दिन की छुट्टी मिली है और वह अपने घर के लिए निकला है। रास्ते में उसकी ट्रेन मिस हो जाती है और वह अलग-अलग रास्तों से अपने घर के लिए चलता है।

इस दरम्यां वह अलग-अलग लोगों से मिलता है और किस तरह वह अपनी भावनाओं से एक इंसान के रूप में उसके नजरिए से चीजों को बदलता है, यही कहानी है सेटेलाइट शंकर की। निर्देशक इरफान कमल और उनके अभिनेता सूरज पंचोली, दोनों ने मिलकर एक ऐसा सिनेमा गढ़ा है, जो लंबे समय तक याद किया जाएगा। 

सैटेलाइट शंकर की भूमिका में सूरज पंचोली इस तरह रम गए हैं, जैसे खुद ही वह किरदार हों। कुल मिलाकर सैटेलाइट शंकर एक ऐसी फिल्म है, जिसमें हर इमोशन, चाहे वो वह भाई-भाई की हो, मां-बेटे की हो, इंसान से इंसान की हो, फौज की देश से हो... आपको देखने को मिलेगी। यह ऐसी फिल्म है, जिसे आप सपरिवार देख सकते हैं, खास तौर पर अपने बच्चों को यह फिल्म दिखा सकते हैं।

कलाकार- सूरज पंचोली, मेघा आकाश आदि।

निर्देशक- इरफ़ान कमल

निर्माता- मुराद खेतानी, आश्विन वर्दे

वर्डिक्ट- **** (चार स्टार)

Posted By: Manoj Vashisth

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