नई दिल्ली [मनोज वशिष्ठ]। महेश भट्ट निर्देशित सड़क 2 शुक्रवार को डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज़ हो गयी। फ़िल्म कैसी है? अच्छी है? बुरी है? इसकी चर्चा करने से पहले आइए कुछ दशक पीछे चलते हैं। उसी दौर में, जब महेश भट्ट ने अपनी आख़िरी फ़िल्म कारतूस निर्देशित की थी। यानि 1999।

पिछली सदी का आख़िरी साल और इसके बाद महेश भट्ट ने डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठने के बजाए लेखक की कुर्सी-मेज पकड़ ली। और फिर अक्षय कुमार की संघर्ष से लेकर इमरान हाशमी की हमारी अधूरी कहानी तक इसी कुर्सी-मेज पर डटे रहे।

1999 में भट्ट साहब ने जब निर्देशन से संन्यास लिया था तो उनके पीछे कई क्लासिक और कल्ट फ़िल्मों की विरासत थी, जिनकी सार्थकता आज भी बनी हुई है। अर्थ, सारांश, नाम, डैडी, आशिक़ी, दिल है कि मानता नहीं, ज़ख़्म, नाजायज़... इनमें एक नाम 1991 की सड़क भी है, जिसका पार्ट 2 भट्ट साहब 2020 में लेकर आये हैं और जिसके ज़रिए निर्देशन में अपने वनवास को ख़त्म किया है। मगर, महेश भट्ट की शानदार विरासत के मद्देनज़र यह वापसी बेहद निराश और उदास करने वाली है। 

'सड़क 2' की कहानी एक युवा लड़की आर्या (आलिया भट्ट) की एक ढोंगी बाबा ज्ञानप्रकाश (मकरंद देशपांडे) के ख़िलाफ़ लड़ाई से शुरू होती है। आर्या का पूरा परिवार, पिता योगेश देसाई (जिशु सेनगुप्ता) और मौसी नंदिनी (प्रियंका बोस), बाबा का अंधभक्त है। आर्या का मानना है कि इस बाबा की साजिश की वजह से उसकी मां चल बसी थीं, जिसका उसे बदला लेना है। उसने ढोंगी बाबाओं के ख़िलाफ़ एक कैम्पन India Fights Fake Gurus शुरू किया है। कैम्पेन के दौरान आर्या को एक ट्रोल विशाल (आदित्य रॉय कपूर) से प्यार हो जाता है। इस सबके बीच आर्या को कैलाश मानसरोवर जाना है। यह उसकी मां की इच्छा थी कि उम्र के 21वें पड़ाव पर पहुंचने से पहले वो कैलाश पहुंच जाए। 

आर्या अपनी यात्रा के लिए रवि किशोर (संजय दत्त) की टैक्सी सर्विस 'पूजा ट्रैवल्स एंड टुअर्स' के यहां टैक्सी बुक करती है। यह बुकिंग तीन महीने पहले रवि की पत्नी पूजा ने की थी। एक हादसे में पूजा की मौत हो जाती है, जिसके बाद रवि गहरे अवसाद में चला जाता है और अपनी जान लेने की कोशिश भी कर चुका है। जब आर्या टैक्सी के लिए पहुंचती है तो वो मना कर देता है। किसी तरह आर्या उसे मना लेती है। फिर रवि, आर्या और उसके व्बॉयफ्रेंड विशाल (आदित्य रॉय कपूर) को लेकर यात्रा पर निकलता है। इस सफ़र के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनके बाद रवि, आर्या की मदद को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बना लेता है। 

दार्शनिक भाव से समझें तो सड़क 2 दो टूटे हुए किरदारों के एक साथ आने की कहानी है, जो आत्मिक और मानसिक रूप से एक-दूसरे का संबल बनते हैं। 

कहानी सीधी है, मगर स्क्रीनप्ले इतना उलझा दिया गया है कि कुछ वक़्त तक समझ नहीं आता कि फ़िल्म कहां जा रही है। संजय दत्त और आलिया के शुरुआती दृश्य कन्फ्यूज़ करते हैं। इनके संवाद से लगता है, आर्या रवि की बेटी होगी। हालांकि बाद में तस्वीर साफ़ होने लगती है। मगर, तब तक फ़िल्म ऊबाऊ हो चुकी होती है और एक बेहद घिसे-पिटे ढर्रे पर चल पड़ती है। समझ नहीं आता सड़क एक इमोशनल फिल्म है या थ्रिलर है। कोई भी भाव उभरकर नहीं आता। निश्चित रूप से ये लेखन का दोष है। पुष्पदीप भारद्वाज, सुह्रता सेनगुप्ता और महेश भट्ट का लेखन बेहद कमज़ोर रहा। संवाद प्रभावहीन और पुराने हैं। 

अभिनय पक्ष की बात करें तो गुलशन ग्रोवर, मोहन कपूर जैसे बेहतरीन कलाकारों को सस्ते में निपटा दिया गया।फ़िल्म के ट्रेलर से लगा था कि बाबा के रोल में मकरंद देशपांडे सड़क के महारानी बने सदाशिव अमरापुरकर जैसा असर पैदा करेंगे, मगर उनका किरदार डर के बजाय हास्य का भाव पैदा करता है।  प्रियंका बोस ने हाल ही में रिलीज़ हुई ज़ी5 की फ़िल्म परीक्षा में अच्छा काम किया, मगर सड़क 2 में उनका अभिनय ओवर लगता है। 

फ़िल्म में अगर कोई कलाकार असर छोड़ता है तो वो जिशु सेनगुप्ता हैं। जिशु ने फ़िल्म में नेगेटिव रोल निभाया है और अपनी अदाकारी से दृश्यों को दर्शनीय बनाया है। उनके अभिनय में एक संतुलन दिखायी देता है। असल में जिशु का किरदार ही सड़क 2 की कहानी में एक रोमांचक ट्विस्ट लेकर आता है।

फ़िल्म का संगीत बेहद साधारण है। सड़क के संगीत के आस-पास भी नहीं फटकता। कोई गीत आपके साथ देर तक नहीं रहता। फ़िल्म में एक दृश्य आता है, जब रवि अपने गैरेज में हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते सुन रहा होता है। यह गीत फ़िल्म में एक राहत लेकर आता है और दिल करता है कि पूरा गाना सुनने को मिलता। वैसे अगर सड़क के गीत ही रीमेक करके इस्तेमाल किये जाते तो सड़क 2 ज़्यादा दिलचस्प बनती। 

लगभग सवा दो घंटे की 'सड़क 2' ख़त्म होने के बाद ज़ेहन में यही ख़्याल आता है कि इससे तो बेहतर था, सड़क दूसरी बार देख लेते!

कलाकार- संजय दत्त, आलिया भट्ट, आदित्य रॉय कपूर, जिशु सेनगुप्ता, मकरंद देशपांडे, मोहन कपूर, गुलशन ग्रोवर, पूजा भट्ट (आवाज़) आदि।

निर्देशक- महेश भट्ट

निर्माता- मुकेश भट्ट

स्टार- ** (दो स्टार)

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