पराग छापेकर, मुंबई। भारतीय समाज में आज भी अनेक कुप्रथाएं प्रचलन में हैं। उनमें से एक है बिहार में चलने वाली पकड़वा विवाह प्रथा। हालांकि इस पर कई अच्छी और कई सारी बुरी फिल्में बन चुकी हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है सब कुशल मंगल। मगर अलग अंदाज में।

यह कहानी है मंदाकिनी (रीवा किशन) की जो एक पारंपरिक परिवार में रहने वाली लड़की है। तमाम सारी कोशिश करने के बावजूद उस की शादी नहीं हो रही। उसके परिवार वाले बाबा साहब (अक्षय खन्ना) की शरण जाते हैं। बाबा कर्नलगंज का एक छुटभैया नेता और गुंडा है, जिसका काम ठेका लेकर पकड़वा विवाह कराना है।

इस बीच कर्नलगंज का ही रहने वाला पप्पू मिश्रा (प्रियांक शर्मा) छुट्टियों में अपने घर आ रहा है। पप्पू एक मीडियाकर्मी है, जिसका प्रोग्राम मुसीबत मोल ली मैंने काफी प्रसिद्ध है। बाबा के आदमी पप्पू को उठा लेते हैं। लेकिन मंदाकिनी की मदद से पप्पू वहां से भागने में कामयाब हो जाता है। मगर बाद में उस एहसास होता है कि वह उस लड़की के प्यार में है।

इस बीच बाबा को भी मंदाकिनी से प्यार हो जाता है। आगे क्या होता है? क्या पप्पू मंदाकिनी को पा सकता है? क्या गुंडा बाबा मंदाकिनी से शादी कर लेगा? इसी पर आधारित है फिल्म सब कुशल मंगल। अभिनय की बात करें तो प्रियांक शर्मा अपना जादू नहीं चला पाए। रवि किशन की बेटी रीवा एक कुशल अभिनेत्री हैं। उनमें काफी संभावनाएं नजर आती हैं।

अक्षय खन्ना कहीं-कहीं प्रभावी नजर आते हैं। कहीं-कहीं मिसकास्ट। कमजोर स्क्रिप्ट और फोकस के अभाव में सब कुशल मंगल नहीं हो पाया। इंटरवल के कुछ देर बाद ही आपको समझ में आ जाता है कि फिल्म के अंत में क्या होगा। कुल मिलाकर सब कुशल मंगल एक कमजोर फिल्म है। आप बेहतर ऑप्शन का इंतजार कर सकते हैं।

कलाकार- प्रियांक शर्मा, रीवा किशन, अक्षय खन्ना आदि। 

निर्देशक- करण कश्यप

निर्माता- प्राची नितिन मनमोहन

वर्डिक्ट- ** (दो स्टार)

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