Ramayana Review: रणबीर का तेज, यश का प्रचंड रौद्र रूप; तकनीक और आस्था का भव्य महाकाव्य है 'रामायणम्'
फिल्म 'रामायणम्' (Ramayana) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी और रवि दुबे की फिल्म क्या ...और पढ़ें

सिनेमाघरों में आई रामायणम् कैसी है? पढ़ें रिव्यू
HighLights
सिनेमाघरों में रिलीज हुआ 'रामायणम्'
4000 करोड़ी फिल्म आखिर है कैसी?
हॉलीवुड को टक्कर दे पाई नितेश-नमित की रामायणम्?
अंकित सिंह तोमर, नई दिल्ली। असुरों का अत्याचार जब धरती पर बढ़ा था, तब जाकर भगवान विष्णु ने धरती पर अवतार लिया और कहलाए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम। राम-राम कहकर आज भी हमारी जीवन की नैय्या पार हो जाती है और यही गूंज अब सिनेमाघरों में सुनाई दे रही है। त्रेतायुग की मर्यादा और कलयुग की आधुनिक तकनीक, जब ये दोनों एक साथ पर्दे पर टकराते हैं, तो जन्म लेती है 'रामायणम्'।
रामानंद सागर के दौर से लेकर आज तक इस महाकाव्य को कई रूपों में देखा गया, लेकिन नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा ने इसे जिस हॉलीवुड स्तर के कैनवास पर उतारा है, वह आंखें चौंधिया देने के लिए काफी है। भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी और सबसे भव्य फिल्म रामायणम् (Ramayana) सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। धर्म-अधर्म की इस महागाथा को जानने और टिकट कटाने से पहले पढ़ लीजिए यह रिव्यू।
क्या है रामायणम् की कहानी?
भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण की महागाथा को कई बार पर्दे पर उतारा गया है, लेकिन निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा की 'रामायणम्' जिस भव्यता, तकनीकी बारीकी और भावनात्मक गहराई के साथ सामने आई है, वह इसे आज के दौर का सबसे बड़ा और असरदार सिनेमाई अनुभव बनाती है। यह फिल्म दिखाती है कि सिनेमा को भव्यता से दिखाने का तरीका आना चाहिए।

रामायणम् की कहानी को हमने कई बार पर्दे पर देखा है, तो हमें पता है कि फिल्म में क्या होगा, लेकिन हर बार कहने के तरीके अलग रहे। इस बार भी कुछ यही हुआ है। रामायणम् की कहानी की शुरूआत भी देव और असुरों की लड़ाई के साथ होती है। इसके बाद दिखाया जाता है कि किस तरह से देव लंका पर जीत हासिल करते हैं और ये सब देवराज इंद्र की वजह से होता है। अब लंका पर विजय प्राप्ति के बाद रावण की मां कैकसी अपने बेटे को याद दिलाती हैं कि उसके जीवन का उद्देश्य लंका पर विजय करना और तीनों लोकों का स्वामी बनना है।

रावण भी मां कैकसी की बात मानकर घोर तपस्या करता है और आखिरकार ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान पा लेता है और फिर रावण उसी लंका में दाखिल होता है और एक-एक करके सबको मार देता है और कुबेर की लंका को अपना बना लेता है। इधर अयोध्या में राजा दशरथ के घर में यज्ञ होता है और फिर राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जन्म ले लेते हैं। फिर इसके बाद गुरू विश्वामित्र राजा दशरथ के पास आते हैं और वीर योद्धा राम को मांगते हैं। दरअसल विश्वामित्र जब भी यज्ञ और अनुष्ठान करते थे, तब ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षस उसमें बाधा डालते थे और मांस-हड्डियां फेंककर पवित्र यज्ञ को नष्ट कर देते।

इसके बाद राम आते हैं और ताड़का-सुबाहु जैसे राक्षसों का वध करते हैं। फिर इसके बाद सीता स्वयंवर दिखाया जाता है और फिर राम वनवास होता है। फिल्म फर्स्ट हाफ इसी कहानी को गढ़ने में जाता है। फिल्म में रावण और शूर्पणखा के पति विद्युत जीव का युद्ध दिखाया जाता है। इसके बाद कैसे शूर्पणखा प्रभु राम पर मोहित होती है, और फिर राम के पास आकर विवाह का प्रस्ताव रखती है और कैसे लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं।
फिल्म में माता सीता को भी युद्ध करते हुए दिखाया गया है। माता सीता एक वॉरियर थीं, उन्हें हर तरह का ज्ञान प्राप्त था। फिल्म में रावण-जटायु के बीच युद्ध दिखाया गया है, जो आपकी आंखें भी नम करेगा और आपको भव्यता का एहसास दिलाएगा। फिल्म की कहानी में कुछ नए एलिमेंट्स डाले गए हैं, जो आपको पसंद आएंगें।

कैसा है फिल्म का निर्देशन?
रामायण की मूल कथा से हर कोई वाकिफ है, इसलिए नितेश तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी इसे एक नए विजुअल ट्रीटमेंट और भावनात्मक जुड़ाव के साथ पेश करना। उन्होंने अपने काम को बखूबी निभाया है। नितेश तिवारी ने निर्देशन में गजब की पकड़ दिखाई है। उन्होंने पौराणिक मर्यादा और आज के अत्याधुनिक वीएफएक्स और सीजीआई के बीच एक बेहतरीन संतुलन साधा है।
अयोध्या के राजसी वैभव से लेकर दंडकारण्य के बीहड़ जंगलों और लंका की सोने की दीवारों तक, हर एक फ्रेम में निर्देशक का विजन साफ झलकता है। उन्होंने एक निर्देशक के रूप में दर्शकों को बांधने का काम किया है। रामायणम् की सबसे बड़ी खासियत की इसकी कहानी के साथ-साथ इसके विजुअल्स ही हैं, जो इस फिल्म को और भव्य बना रहे हैं।

कैसा है सितारों का अभिनय?
फिल्म में जितने पात्र नजर आए, सभी ने शानदार अभिनय किया है। प्रभु श्री राम के रूप में रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की शांत आभा, संयम और आंखों की सौम्यता सीधे दिल को छूती है। चेहरे पर करुणा और युद्धभूमि में क्षत्रिय का तेज, दोनों ही भावों को रणबीर ने पूरी सहजता से निभाया है, जो लोग शायद रणबीर को ट्रोल कर रहे थे, रामायणम् देखने के बाद उनके विचारों में परिवर्तन जरूर होगा। हालांकि, रणबीर पर पूरी तरह से भारी पड़े हैं रावण बने यश।
जी हां, फिल्म में अगर कोई स्क्रीन पर आते ही पूरी महफिल लूट ले जाता है, तो वह हैं यश (Rocking Star Yash)। रावण के अहंकार, प्रचंड विद्वता और पराक्रम को यश ने जिस रौबदार अंदाज में निभाया है, वह रोंगटे खड़े कर देता है। उनका स्क्रीन प्रेजेंस इतना भारी है कि हर दृश्य में उनका दबदबा नजर आता है।

ऊपर से शरद केलकर (Sharad Kelkar) की आवाज, रावण के हर दृश्य को यादगार बनाती है, क्योंकि शरद ने ही रावण के किरदार को हिंदी में आवाज दी है। रावण का दशानन अवतार वाला दृश्य आपको सीटी बजाने पर मजबूर करता है। वहीं माता सीता के रूप में साई पल्लवी (Sai Pallavi) की सादगी और स्वाभाविकता मंत्रमुग्ध करती है। बिना किसी दिखावटी लाउडनेस के, सिर्फ अपने भावों और आंखों से उन्होंने उस कालखंड की पवित्रता और त्याग को साकार कर दिया है।

युद्धभूमि में उनका पराक्रमी अंदाज हो या फिर भावुक करने वाले दृश्य, सई ने किरदार को मजबूती से पकड़ा है। रवि दुबे (Ravi Dubey) ने लक्ष्मण के चंचल, समर्पित और उग्र स्वभाव को बखूबी पकड़ा है। भाई-प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा के भाव उनके अभिनय में निखर कर आते हैं। कई जगह उनके चंचल डायलॉग्स कुछ दृश्यों को मजेदार बनाते हैं। वहीं शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh) भी शानदार लगी हैं। उनकी खूबसूरती उस किरदार को और बेहतरीन बनाकर गई है। रकुल के किरदार को अच्छा स्पेस दिया गया है और सजे-धजे आभूषणों में राजकुमारी के रूप में वह खूब फबी हैं।

राजा दशरथ के रोल में अरुण गोविल ने अच्छा काम किया है तो वहीं लारा दत्ता ने कैकयी के किरदार को भी बखूबी निभाया है। विद्युत जीव के रूप में बेहतरीन दिखे। इसके अलावा मंदोदरी के रूप में काजल अग्रवाल और विश्वामित्र के किरदार में अंजिक्य देओ ने अच्छा काम किया है। हालांकि फिल्म के सबसे बड़ा भावनात्मक सरप्राइज हैं अनुपम खेर। जटायु के रूप में उनका समर्पण और दर्द पर्दे पर जीवंत हो उठता है। हालांकि वह पक्षीराज के किरदार में ही दिखे हैं।

कैसे हैं फिल्म के विजुअल्स?
बैकग्राउंड स्कोर और एक्शन, फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ है। इसके अलावा फिल्म में दिखाया गया एक्शन भी कमाल है। विजुअल्स कहीं भी बनावटी नहीं लगते हैं। युद्ध के दृश्य हॉलीवुड स्तर के हैं, जिनमें रणनीति, हथियार और रथों का प्रयोग बेहद रियलिस्टिक लगता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दृश्य के मिजाज को कई गुना ऊपर ले जाता है।
शांत दृश्यों में यह भक्ति और ठहराव पैदा करता है, तो वहीं युद्ध और टकराव के समय और रोमांचक लगता है। फिल्म के कुछ सीन्स तो बेहद कमाल लगे हैं। जंगल के दृश्य अच्छे हैं तो वहीं जटायु सीक्वेंस और हवा मे युद्ध होना इसे दमदार बनाता है। लंका, अयोध्या की भव्यता विजुअली और बहुत गजब दिखती है।

कहां रह गई कसर?
अब क्योंकि फिल्म 3 घंटे में ही खत्म करनी है, तो ये समझना भी जरूरी है कि मेकर्स को मूवी की रफ्तार को बढ़ाना पड़ा है। फिल्म की रफ्तार और लंबाई को संतुलित रखने के चक्कर में कुछ महत्वपूर्ण प्रसंगों को बहुत संक्षेप में समेट दिया गया है। जनकपुर की विस्तृत पृष्ठभूमि और केवट संवाद जैसे बेहद प्रसंगों को अगर थोड़ा और स्क्रीन टाइम मिलता, तो यह अनुभव और बेहतर हो सकता था। इसके अलावा माता कौशल्या और राम के बीच मां-बेटे के दृश्यों को ज्यादा नहीं दिखाया गया है।

वहीं कई जगह इसका संगीत थोड़ा सा ढीला सा भी पड़ता है। दरअसल जब हंस जिमर और ए.आर. रहमान जैसे दिग्गज एक साथ आए हैं, तो उम्मीदें थोड़ी ज्यादा बढ़ जाती हैं। लेकिन कई ये थोड़ा फीका नजर आता है। इसके अलावा सहायक पात्रों में से कुछ को अपनी पूरी चमक दिखाने का मौका तक नहीं मिला है, उनके इमोशन लोगों तक पूरी तरह से नहीं पहुंच पाए हैं।
फिल्म देखें या ना देखें?
हमने रामानंद सागर की रामायण को कई एपिसोड्स में देखा है, जो एक कल्ट क्लासिक है। नमित मल्होत्रा (Namit Malhotra) और नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) ने निर्माता-निर्देशक के रूप में उस कहानी को फिलहाल 3 घंटे में दिखाने की कोशिश की है। जाहिर है ये मेहनत रंग लाती है और हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि फिल्म को भव्य बनाने में हर कोशिश की गई है।
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'रामायणम्' केवल एक पौराणिक फिल्म नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर अनुभव किया जाने वाला एक विजुअल महाकाव्य है। यह आधुनिक तकनीक और भारतीय आस्था का एक सशक्त संगम है, जिसे थिएटर की बड़ी स्क्रीन पर ही देखा जाना चाहिए।
कुछ कमियों को नजरअंदाज करके अगर आप रामायणम् (Ramayana Movie Release) के इस अनुभव को सिनेमाघरों में लेंगे, तो समझ पाएंगे कि हमारे देश में भी अब हॉलीवुड के बड़े स्तर की फिल्में बनाई जा रही हैं और यह इसी का एक उदाहरण है।
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