प्रियंका सिंह, मुंबई। अपने प्‍यार को लेकर जुनूनी प्रेमी अपनी प्रेमिका को पाने की खातिर किसी भी हद से गुजरने को तैयार रहता है। उसमें देश की सरहदें भी आड़े नहीं आती। कुछ ऐसी ही कहानी है फिल्म शिद्दत की। गौतम (मोहित रैना) और इरा (डायना पेंटी) की प्रेम कहानी से फिल्म शुरू होती है। गौतम को फ्रेंच क्लास में इरा से प्यार हो जाता है। दोनों शादी कर लेते हैं। उनके रिसेप्‍शन में कुछ हास्टल के लड़के घुस आते हैं। वहां गौतम की प्यार को लेकर फिलॉसफी को सुनकर हाकी खिलाड़ी जग्गी उर्फ जोगिंदर ढिल्लो (सनी कौशल) प्रेरित हो जाता है। जग्गी नेशनल हाकी टीम में खेलना चाहता है, ताकि उसे एक सरकारी नौकरी मिल जाए। ऑल इंडिया स्पोर्ट्स मीट में तैराक कार्तिका (राधिका मदान) को देखकर जग्‍गी उसे अपना दिल दे बैठता है।

कार्तिका प्रैक्टिकल है। उसकी तीन महीने बाद लंदन में रहने वाले लड़के से शादी होने वाली है। जग्गी उसे शादी के लिए मना करने के लिए कहता है। कार्तिका कहती है कि अगर उसका प्यार तीन महीने तक बना रहा, तो वह शादी के दिन डीडीएलजे (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे) स्टाइल में अपनी शादी तोड़ देगी। जग्गी इस बात को सच मान लेता है। वह कार्तिका की शादी से पहले लंदन पहुंचना चाहता है। उसका वीजा कैंसल हो जाता है, जिसके बाद वह अवैध तरीके से लंदन में घुसने की कोशिश करता है, लेकिन फ्रांस के कैले (Calais) में पकड़ा जाता है। फ्रांस में भारतीय दूतावास के अधिकारी गौतम को जिम्मेदारी दी जाती है कि वह जग्गी को भारत डिपोर्ट करे।

 

 

 

 

 

 

 

 

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जन्नत और तुम मिले जैसी रोमांटिक फिल्में बना चुके कुणाल देशमुख का वह अनुभव इस फिल्म में नजर नहीं आता है। फिल्म की कहानी आज के दौर में सेट की गई है, जिसमें डेटिंग ऐप और इंटरनेट मीडिया पर फालोवर बढ़ाने का जिक्र है। इस फिल्म में प्यार के प्रति दीवानगी पुराने जमाने की फिल्मों की याद दिलाती है। यद्यपि प्‍यार की कशिश का अहसास देने में नाकामयाब रहती है। प्यार को पाने के लिए फ्रांस के इंग्लिश चैनल समंदर को पार करने वाले और हवाई जहाज के पहियों के बीच की जगह में बैठकर लंदन जाने वाले दृश्य वर्तमान परिदृश्‍य में बेहद निराशाजनक लगते हैं। अवैध आप्रवासियों के लिए सामाजिक कार्यकर्ता इरा का दर्द भी समझ नहीं आता है। न ही उस मुद्दे को समुचित तरीके से रेखांकित कर पाए हैं।

जग्गी को लंदन का वीजा न मिलने के कारण भी स्‍पष्‍ट नहीं हैं। जग्गी पूरी फिल्म में अपनी मां के सिखाए आदर्शों की बात करता है, लेकिन मां का किरदार कल्पनाओं में ही है। फिल्म की अवधि दो घंटा 26 मिनट की है, फिर भी फिल्म के स्क्रीनप्ले लेखक श्रीधर राधवन और धीरज केदारनाथ रतन किरदारों की दुनिया दमदार रच नहीं पाए। जग्गी का यम्मा यम्मा गाने पर डांस करने वाले दृश्य चेहरे पर मुस्कान लाता है। जिंदादिल, जुनूनी और पागल प्रेमी के किरदार में सनी कौशल का काम सराहनीय है। वह आसानी से मजाकिया और गंभीर दोनों ही भावों को चेहरे पर ले आते हैं। आज के दौर की दबंग लड़की की झलक राधिका ने दिखाई है, भावनात्मक सीन में वह प्रभावित भी करती हैं। मोहित रैना अपने गंभीर किरदार को अंत तक पकड़े रखते हैं। डायना के हिस्से कुछ खास नहीं आया है, लेकिन वह खूबसूरत लगी हैं। सचिन-जिगर का संगीत औसत है। सिनेमेटोग्राफर अमलेंदु चौधरी ने कुछ खूबसूरत शाट्स जरूर लिए हैं।

फिल्म – शिद्दत

रेटिंग – दो

मुख्य कलाकार – सनी कौशल, मोहित रैना, राधिका मदान, डायना पेंटी

निर्देशक – कुणाल देशमुख

अवधि – 2 घंटा 26 मिनट

डिजिटल प्लेटफार्म – डिज्नी प्लस हाटस्टार

 

Edited By: Priti Kushwaha