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Prahaar Review: कसाब को फांसी दिलाने की जंग, 'प्रहार' में राजकुमार राव ने फूंकी जान; कहां चूकी फिल्म?

Published: Thu, 15 Oct 2026 08:51 PM (IST)

Prahaar Film Review: अजमल कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील उज्ज्वल निकम की बायोपिक 'प्रहार' में राजकुमार राव मुख्य भूमिका ...और पढ़ें

राजकुमार राव की प्रहार फिल्म का रिव्यू

राजकुमार राव की प्रहार फिल्म का रिव्यू

HighLights

  1. उज्ज्वल निकम की बायोपिक है प्रहार

  2. 26/11 हमले के इर्द-गिर्द घूमती है कहानी

  3. राजकुमार की परफॉर्मेंस है शानदार

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले की कहानी कई बार पर्दे पर दिखाई गई है, कभी इसे पुलिस की जांबाजी के चश्मे से दिखाया गया, तो कभी डॉक्टर्स के संघर्ष के जरिए। अब एक बार फिर 26/11 के दर्द को कोर्टरूम के जरिए पेश किया गया है।

18 साल पहले हुए 26/11 आतंकी हमले में अजमल कसाब (Ajmal Kasab) इकलौता आतंकी था, जिसे जिंदा पकड़ा गया था। उसे फांसी की सजा दिलाने के लिए वकील उज्ज्वल निकम (Ujjwal Nikam) ने एड़ी चोटी का दम लगा दिया था।

अब इस कहानी को बड़े पर्दे पर अविनाश अरुण धवारे लेकर आए हैं। सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' (Prahaar: The Untold Story of Ujjwal Nikam Review) कैसी है, यहां पढ़ें रिव्यू...

Prahaar Review

क्या है 'प्रहार' फिल्म की कहानी?

'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' की कहानी की शुरुआत 26/11 के हमले से होती है और फिर आतंकी अजमल कसाब (ललित प्रभाकर) को गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके बाद शुरू होती है कसाब (Kasab) को फांसी दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।

अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए मशहूर वकील उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) कानूनी लड़ाई शुरू करते हैं लेकिन यह इतना आसान नहीं होता है। कसाब अपने बयानों से गुमराह करता है। कभी खुद की उम्र 17 वर्ष बताता है तो कभी कहता है कि वह मुंबई एक्टर बनने आया था। वह अपने बयानों से गुमराह करने की कोशिश करता है।

Prahaar Film Review

फिल्म में उज्ज्वल निकम के बेटे के साथ अनबन भी दिखाई गई है। पारिवारिक उथल-पुथल के बीच उज्ज्वल निकम किस तरह अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाते हैं, कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।

कैसा है फिल्म का निर्देशन और स्क्रीनप्ले?

फिल्म की कहानी अच्छी थी, लेकिन इसे और अच्छे तरीके से दिखाया जा सकता था। 'पाताल लोक' और 'प्रीतम एंड पेड्रो' जैसी सीरीज का निर्देशन कर चुके अविनाश अरुण धवारे कहानी में इमोशन नहीं ला पाए, खासकर पहले हाफ में।

Rajkumar Rao film

पहला हाफ बहुत स्लो है और वह सीधे कोर्ट की प्रोसीडिंग से शुरू हो जाता है। 26/11 आतंकी हमले की दर्दनाक घटना को दूसरे हाफ में दिखाई जाता है। दूसरे हाफ में फिल्म सही ट्रैक पर चलती है। फिल्म का संगीत खास असरदार नहीं है, लेकिन डायलॉग्स ठीक-ठाक हैं।

राजकुमार-वामिका ने जीता दिल

राजकुमार राव उज्ज्वल निकम की भूमिका को जीया है। वह जब भी पर्दे पर आते हैं तो उनकी आंखों में 26/11 का गुस्सा साफ दिखता है। उन्होंने इस किरदार में जान फूंक दी है। उज्ज्वल निकम की पत्नी की भूमिका में नजर आईं वामिका गब्बी (Wamiqa Gabbi) ने भी शानदार काम किया है।

वहीं, जयदीप अहलावत जब-जब स्क्रीन पर आते हैं वो अपना प्रभाव छोड़कर जाते हैं। सिकंदर खेर समेत बाकी सह-कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

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