विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 01, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Movie Review: तो इसलिए अलग है ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, मिले इतने स्टार्स

By Hirendra JEdited By:
Published: Fri, 01 Feb 2019 01:33 PM (IST)Updated: Sat, 02 Feb 2019 05:46 AM (IST)

अगर आप वाकई हटके फिल्में देखना चाहते हैं तो निश्चित ही यह फिल्म आपको पसंद आएगी।

Movie Review: तो इसलिए अलग है ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, मिले इतने स्टार्स
Movie Review: तो इसलिए अलग है ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, मिले इतने स्टार्स

 -पराग छापेकर

स्टार कास्ट: अनिल कपूर, जूही चावला, राजकुमार राव, सोनम कपूर, सीमा पाहवा, रेजिना कैसैंड्रा, बृजेंद्र काला, कंवलजीत आदि।

निर्देशक: शैली चोपड़ा

निर्माता: विधु विनोद चोपड़ा

सरकार ने भले ही समलैंगिकता को मानवीय दृष्टि से देखने की कोशिश की है और उसके लिए कायदा भी बना दिया गया है मगर फिर भी समलैंगिकता की तरफ देखने का समाज का नजरिया अभी भी रूढ़ीवादी ही नजर आता है! या तो समाज इस पर हंसता है या इसे पूरी तरह नकार देता है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह तो न कोई मानसिक बीमारी है और ना ही किसी का शौक! यह एक सामान्य बात है और प्रकृति ने ही कुछ इंसान ऐसे पैदा किए हैं जो बचपन से ही समलैंगिकता की तरफ आकर्षित होते हैं। विदेशों में भले ही लंबे संघर्ष के बाद इन्हें स्वीकार कर लिया गया है मगर भारत जैसे परंपरावादी समाज में कानून बनने के बावजूद भी एक लंबी लड़ाई इस समुदाय को लड़ना है। और साथ ही साथ समाज को भी यह समझना होगा कि कोई भी समलैंगिक अपने आप के भीतर एक लंबी लड़ाई लड़ता है!

वह अकेलापन और कुंठा से ग्रसित होता है क्योंकि उसे समझने वाला ना तो उसका परिवार होता है और ना ही समाज? ऐसे में एक इंसान किन यातनाओं से गुजरता है इसका एक सामान्य व्यक्ति अंदाजा भी नहीं लगा सकता। हमारी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ फिल्ममेकर्स ने फिल्म बनाने की हिम्मत दिखाई जिससे समाज में फैली धारणा को बदला जा सके। मगर यह कुछ गिनी-चुनी फिल्में ही रही और इसे बनाने वाले ज्यादातर इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर ही रहे!

ऐसे में विधु विनोद चोपड़ा जैसे बड़े निर्माता और अनिल कपूर राजकुमार राव और सोनम जैसे सितारों का इस मुद्दे पर आधारित फिल्म करना वाकई सराहनीय है। यह कहानी है मोगा में रहने वाले बलबीर चौधरी (अनिल कपूर) की जो अपनी बेटी स्वीटी (सोनम कपूर) की शादी के लिए लड़की ढूंढ रहा है और उसके लिए समाज की शादियां और शादी कराने वाली वेबसाइट का भी सहारा लिया जा रहा है।

ऐसे में एक नाटककार साहिल मिर्जा (राजकुमार राव) को उससे प्यार हो जाता है और ढेर सारी घटनाओं के उतार-चढ़ाव के बाद साहिल को पता चलता है कि स्वीटी को कुहु (रेजिना कैसैंड्रा) से प्यार है। यहां वह जानता है कि स्वीटी समलैंगिक है। ऐसे में समाज और परिवार को समझाने में साहिल स्वीटी का मददगार बनता है। क्या समाज और परिवार इस कटु सत्य को स्वीकार कर पाएगा? इसी ताने-बाने पर बुनी गई है फ़िल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’।

अभिनय की बात करें तो एक लंबे समय के बाद अनिल कपूर अपने भरपूर फॉर्म में नजर आते हैं। एक सुखी और समृद्धि परिवार का मुखिया और एक बेबस बाप दोनों ही स्थितियों को अनिल कपूर ने बड़े पर्दे पर जीवंत कर दिया है। साहिल मिर्जा के रूप में राजकुमार राव फिल्म की रीढ़ की हड्डी की तरह नजर आते हैं। सोनम कपूर ने उस बेबसी को काफी बेहतर तरीके से उकेरा है। रेजिना कैसैंड्रा की बात करें तो आने वाले समय में बॉलीवुड उनसे और भी उम्मीदें कर सकता है। इसके अलावा सीमा पाहवा, बृजेंद्र काला, कंवलजीत अपने-अपने किरदारों में जंचे हैं। फिल्म में जूही चावला ने चतरो का किरदार निभाया है और वो अपने अभिनय में काफ़ी प्रभावित करती हैं l 

कुल मिलाकर एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा एक अलग कहानी है जिसे बहुत ही संवेदनशीलता के साथ निर्देशक शैली चोपड़ा ने बड़ी ही खूबसूरती से पेश किया है। शैली की पकड़ हर दृश्य पर लगातार बनी रही। अगर आप वाकई हटके फिल्में देखना चाहते हैं तो निश्चित ही यह फिल्म आपको पसंद आएगी।

जागरण डॉट कॉम रेटिंग: पांच (5) में से साढ़े तीन (3.5) स्टार

अवधि: 2 घंटे