-पराग छापेकर

- फिल्म : सोन चिड़िया (Son chiriya)

- स्टार कास्ट: सुशांत सिंह राजपूत, भूमि पेडनेकर, मनोज बाजपेयी, रणवीर शौरी, आशुतोष राणा

- निर्देशक: अभिषेक चौबे

- निर्माता: रॉनी स्क्रूवाला

फिल्म ''सोन चिड़िया'' चंबल की निर्दयी दुनिया में झांकने का मौका देती है। जिस तरह से फिल्म को शूट किया गया है वह काफी रिएलिस्टिक लगता है। फिल्म में डकैतों के जीवन पर फोकस किया गया है। उनको चंबल में बागी कहा जाता है। जिस तरह फिल्मों में अमूमन दिखाया जाता है कि घोड़े पर डाकू आते हैं और इसे ग्लैमरस ढंग से प्रस्तुत किया जाता है तो इसमें ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि जो असल में होता है वही दिखाया गया है। फिल्म में डकैत पैदल भूखे प्यासे बीहड़ में घूमते रहते हैं। किस तरह वे पुलिस से बचते हुए इधर-उधर बीहड़ में ही छिप जाते हैं। इसको बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है। साथ ही साथ वर्गभेद और जातिभेद का समाज में किस तरह से एक वर्गीकरण किया गया था, किस तरह यह सब काम करता है, इसको भी अच्छी तरह से दर्शाया गया है। निर्देशक अभिषेक चौबे ने डकैतों के पूरे जीवन को खूबसूरती से बडे़ पर्दे पर पेश किया है। वो डकैतों के जीवन को बेहतरीन ढंग से दिखाने में कामयाब रहे हैं। 

अभिनय की बात करे तो सुशांत सिंह राजपूत के जीवन में अभी तक का यह बेस्ट परफॉर्मेंस मान सकते हैं। सुशांत ने डायलॉग डिलीवरी से लेकर अपने पोस्चर को किरदार के मुताबिक ढाला। हर प्रकार से सुशांत सफल नजर आते हैं। मनोज बाजपेयी डाकू मानसिंह की भूमिका के रूप में आते हैं और अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। पुलिस ऑफिसर के किरदार में आशुतोष राणा जिस तरह से व्यक्तिगत रंजिश के चलते गिरोह का पीछा करते हैं उसमें वे किरदार के साथ पूरी तरह से न्याय करते दिखाई देते हैं। भूमि पेडनेकर ने बेहतरीन अभिनय किया है। रणवीर शौरी ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। फिल्म में बाकी कलाकार भी किरदार के मुताबिक अच्छा अभिनय करते नजर आए।

फिल्म रिएलिस्टिक तरीके से बनाई गई है जिसमें एक अलग जीवन दर्शन है। ये बागी चंबल का बलवान दर्शन है। फिल्म अच्छी है। इसे एक बार जरूर देखा जा सकता है।  

अवधि: 1 घंटे 46 मिनट

जागरण डॉट कॉम रेटिंग: पांच (5) में से तीन (3) स्टार

Posted By: Rahul soni