- पराग छापेकर

कलाकार- सैफ अली खान, चित्रांगदा सिंह, राधिका आप्टे, रोहन मेहरा

निर्देशक- गौरव चावला 

निर्माता- निखिल आडवाणी

स्टार- *** (तीन) 

शेयर मार्केट और उसकी दुनिया आम आदमी के लिए हमेशा एक कठिन और रहस्यमयी दुनिया रही है। आम भारतीय को आज भी शेयर बाजार आकर्षित जरूर करता है, मगर उसकी तरफ जाने की हिम्मत कम ही लोगों की हो पाती है। ऐसे में इस दुनिया में झांकने का मौका हमारी कई फिल्मों के माध्यम से मिलता है। हालांकि शेयर बाजार और उससे जुड़े लोगों की कहानी पर फिल्में बहुत कम बनी है ऐसी ही फिल्मों में एक और कड़ी जुड़ी है- 'बाजार'।

सैफ अली खान स्टारर फिल्म बाजार कहानी है शकुन कोठारी की (सैफ अली खान) जिसे पैसा कमाने का नशा है। इसके लिए वह किसी तरह का रास्ता अख्तियार करने में संकोच नहीं करता। कंपनियों के भाव गिरा कर उसको टेकओवर करना बाजार के सौदे कर कमिशन खाना, हवाला से से लेकर लेनदेन रास्ता कोई भी हो पैसे कमाने का मौका वह कभी नहीं छोड़ता। ऐसे में उसकी जिंदगी में एक महत्वाकांक्षी और तेजतर्रार शेयर ब्रोकर आता है रिजवान अहमद (रोहन मेहता)। इन दोनों के मिलने से शेयर बाजार की दुनिया में उतार-चढ़ाव आते हैं। किस तरह शकुन रिजवान का इस्तेमाल करता है और इसका नतीजा क्या होता है इसी पर आधारित है फिल्म बाजार।  

डेब्यू डायरेक्टर गौरव चावला आपको उस रहस्यमई दुनिया में ले जाने में काफी हद तक सफल होते हैं। फिल्म लगातार आपको बांधे रखती है। बाजार की खास बात यह है कि इसमें शेयर बाजार पैसे के लेनदेन और इन सारे किरदारों का आपसी भावनात्मक संबंध का संतुलन एकदम सधा हुआ है। इसलिए फिल्म आपको बोर नहीं करती और न ही समझने में कोई परेशानी होती है। निखिल आडवाणी परवेज शेख और असीम अरोरा का स्क्रीनप्ले फिल्म में जान डाल देता है। फिल्म की भव्यता और चकाचौंध आपको मंत्र मुग्ध करके इस दुनिया में ले जाने पर मजबूर कर देती है।

अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान फिल्म में वाकई जंगल के शेर की तरह नजर आते हैं। उनकी उपस्थिति पर्दे में जान डाल देती है। एक सीजंड एक्टर क्या होता है यह सैफ अली खान की परफॉर्मेंस से समझा जा सकता है! राधिका आप्टे एक समर्थ अभिनेत्री हैं। वह अपना किरदार जी जाती हैं। चित्रांगदा सिंह के पास संवादों की तो कमी थी मगर वह अपना काम सब टेक्स्ट और आंखों की कारीगरी से ही पूरा कर जाती है। स्वर्गीय विनोद मेहरा के बेटे रोहन मेहरा की उपस्थिति पहली फिल्म के हिसाब से आत्मविश्वास भरी जरूर है। मगर अभिनय की बारीकियां वक्त के साथ-साथ उन्हें आ जाएगी यह उम्मीद की जा सकती है। 

फिल्म का संगीत फिल्म की जरूरत को पूरा करता है। संगीतकार सोहेल सेन का गीत अधूरा लव्ज उठ कर आता है। यू नहीं कि बाजार एक संपूर्ण फिल्म है। इसमें कुछ कमियां भी हैं जैसे मध्यांतर के बाद कई सारे दृश्यों में आगे क्या होगा, यह आप कयास लगा सकते हैं। मगर कुल मिलाकर बाजार एक मनोरंजक फिल्म है जिसे आप एक बार देख सकते हैं।

अवधि: 2 घंटे 17 मिनट  

Posted By: Rahul soni