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    Jai Mummy Di Movie Review: हंसाती नहीं, निराश करती है सनी सिंह और सोनाली सेगल की फिल्म

    Jai Mummy Di Movie Review कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिसे क्यों बनाया जा रहा है बनाने के पीछे उसका मकसद क्या है? निर्देशक ये नहीं सोचते।

    By Nazneen AhmedEdited By: Updated: Fri, 17 Jan 2020 12:25 PM (IST)
    Jai Mummy Di Movie Review: हंसाती नहीं, निराश करती है सनी सिंह और सोनाली सेगल की फिल्म

    पराग छापेकर, मुंबई। ‘प्यार का पंचनामा’ और ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ जैसी फिल्में बना चुके लव रंजन प्रोड्यूसर की हैसियत से मैदान में उतरे हैं ‘जय मम्मी दी’ के साथ! और फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली है नवज्योत गुलाटी ने।

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    कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिसे क्यों बनाया जा रहा है, बनाने के पीछे उसका मकसद क्या है? क्या ऐसी फिल्में बनाने से नुकसान होगा या फायदा? क्या इससे ब्रांड इमेज पर असर होगा? क्या इससे जुड़े कलाकारों के लिए यह फिल्म घातक साबित होगी? इस बात पर विचार करने का टाइम निर्माता के पास बिल्कुल नहीं होता है। उन्हें बस फिल्म बनानी होती है और किसी बड़ी कंपनी को उसको रिलीज कर देना होता है| 90 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में घाटे के लिए फिल्में बनाने का प्रचलन जोरों पर था, शायद यह प्रचलन फिर से लौट आया है|

    क्या है फिल्म की कहानी :

    यह कहानी है लाली खन्ना( सुप्रिया पाठक) और पिंकी भल्ला (पूनम ढिल्लों) की, जो पड़ोसी तो हैं मगर एक दूसरे के जानी दुश्मन! दोनों की औलादे सांझ और पुनीत एक दूसरे से प्यार करते हैं मगर मम्मियों के डर से बोल नहीं पाते। आखिर क्या राज़ है इस दुश्मनी के पीछे, क्या दोनों की शादी हो पाएगी या नहीं? क्या दोनों की दुश्मनी खत्म होगी या नहीं? यही सास बहू सीरियल की कहानी है ‘जय मम्मी दी’ की।

    सुप्रिया पाठक, पूनम ढिल्लों, सनी सिंह सहित तमाम सारे सीनियर और जूनियर कलाकारों का समय और प्रतिभा कुछ दृश्यों में जरूर इस्तेमाल की गई है मगर ये सौभाग्य दर्शकों के हिस्से में कुछ मिनटों से ज्यादा का नहीं रहा! कुल मिलाकर इस दिशाहीन फिल्म का देखने जाने का सोचना भी समय की बर्बादी है। कृपया इस गुस्ताखी हो नजरअंदाज करें।

    रेटिंग : 0.5 स्टार