पराग छापेकर, मुंबई। अगर आप कोई हॉरर फिल्म देख रहे हैं और उसमें एक खूबसूरत कहानी भी हो तो आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे हॉरर फिल्मों में अक्सर कहानी नहीं के बराबर होती है। एक ऐसी ही छोटी सी मगर खूबसूरत सी फिल्म है ‘कुकी’। ‘कुकी’ कहानी है देश के जाने माने मनोवैज्ञानिक राजीव कपूर (राजीव गुप्ता)और अपर्णा कपूर (रीना वाधवा) यह दोनों अपनी दो लड़कियों के साथ सुखी जीवन बिता रहे हैं।

मगर बड़ी लड़की कुकी(विभूति शर्मा) को लगता है कि उसके मां-बाप उसकी छोटी बहन से ज्यादा प्यार करते हैं और इसीलिए कहीं ना कहीं गुस्से की वजह से पागल भी होती रहती है उसे लगता है की छोटी बहन के कारण उसे मां बाप का प्यार नहीं मिल पाता इसलिए अपनी मां से नफरत भी करती है, और 1 दिन गुस्से में वह अपना घर छोड़ देती है आज रात में उसके साथ क्या होता है और कैसी आगे फिल्म बनती है इसी ताने-बाने पर बुनी गई है फिल्म ‘कुकी’।

‘कुकी’ पिछले हफ्ते आई कारण जोहर की ग्रैंड फ़िल्म ‘भूत’ से कई मायनों में बेहतर फ़िल्म है। इस फ़िल्म में हॉरर तो है ही साथ-साथ इमोशन भी भरपूर है, कहानी है और कहानी में न्योण भी है। जो आपको लगातार बंधे रखती है। निर्देशक ललित मराठे ने जिस तरह से कहानी को आगे बढ़ाया है, स्क्रीनप्ले लिखा है वो बहुत खर्चीला नहीं है। ढेर सारे इफेक्ट्स की बरसात नहीं है। मगर एक्टर्स के बल पर ललित हॉरर पैदा करने में कामयाब हो जाते हैं। ये संभवतः भारतीय सिनेमा की पहली फ़िल्म होगी जिसमें भूत और उसका हॉरर दिन के समय पैदा किया गया। लगभग 60 % हॉरर सीन्स दिन में शूट किए गए हैं। ये एक साहसी और अनोखा प्रयास है।

जहां तक अभिनय की बात है मां बनी रीना वाधवा बाजी मार ले जाती हैं। उन्होंने दमदार अभिनय किया है। वहीं विभूति शर्मा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। पिता बने राजीव गुप्ता का प्रदर्शन असरहीन रहा। कुल मिलाकर ‘कुकी’ एक ऐसी फिल्म है जो हॉरर के चाहने वालो को जरूर पसंद आएगी। अगर आप पिछले हफ्ते रिलीज़ भव्य फ़िल्म ‘भूत’ से निराश हुए हैं तो आप कुकी देख सकते हैं।

रेटिंग : 3 स्टार

 

Posted By: Nazneen Ahmed

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