पराग छापेकर, मुंबई। एक्शन फिल्में एक्शन फिल्में इसलिए कहलाती हैं क्योंकि उसमें एक्शन होता है और जब फिल्म क्यों बनाई गई है, इसकी घोषणा जब पहले ही कर दी गई हो तो ऐसे में एक्शन फिल्मों में कहानी तलाशना तर्कसंगत नहीं होगा। हां, अगर एक्शन फिल्म में कहानी भी दमदार हो तो सोने पर सुहागा हो जाता है, मगर निर्देशक आदित्य दत्त ने कहानी से ज्यादा एक्शन पर भरोसा करना ज्यादा मुनासिब समझा, क्योंकि उनके पास थे विद्युत जाम्वाल।

कहानी का धागा काफी महीन है। एक आतंकवादी भारत में 9/11 की तरह घटना को अंजाम देना चाहता है और एक कमांडो कैसे इस घटना को होने से रोकता है। बस यही कहानी के भरोसे पूरी फिल्म का निर्माण किया गया है। विद्युत जाम्वाल के एक्शन सीन वाकई देखते बनते हैं। आज के सबसे बड़े एक्शन स्टार हैं। जिस सहजता से वह बड़े से बड़े स्टंट कर गुजरते हैं, ऐसा लगता है इस तरह के स्टंट हर रोज करने के आदी हैं। यानि किरदार में विश्वसनीयता जगा ही देते हैं।

अगर परफॉर्मेंस की बात करें विद्युत जाम्वाल पूरी फिल्म को अपनी एक्शन के सहारे दर्शनीय बना देते हैं। अदा शर्मा का कॉमिक अंदाज मजेदार है। उनके और अंगिरा के एक्शन अप्रत्याशित थे। कुल मिलाकर यह कहें तो ग़लत नहीं होगा, आदित्य स्क्रीन पर थोड़ा और काम कर लेते। स्पेशल इफेक्ट बहुत ही कमजोर हैं। जब कलाकार अच्छे हों, प्रोडक्शन ग्रैंड हो, रिलीज बेहतर हो तो ऐसे में कहानी में अगर उतार-चढ़ाव होते तो मामला बहुत बेहतर होता।

अगर आप एक्शन फिल्मों के हार्डकोर फैंन हैं और विधुत जाम्वाल के एक्शन आपको लुभाते हैं तो आपको ये फ़िल्म देखनी चाहिए। विधुत के एक्शंस वाकई देखने लायक है। फ़िल्म की सारी कमियां वो अपने एक्शन से ढक देते हैं। साथ ही अंगिरा और अदा के एक्शंस भी तड़का लगाने का काम करते हैं।

कलाकार- विद्युत जाम्वाल, अदा शर्मा, अंगिरा धर, गुलशन देवैया आदि।

निर्देशक- आदित्य दत्त

निर्माता- विपुल अमृतलाल शाह, रिलांयस एंटरटेनमेंट।

वर्डिक्ट- *** (तीन स्टार्स)

Posted By: Manoj Vashisth

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