नई दिल्ली, जेएनएन। Bala Movie Review: आयुष्मान खुराना पिछले काफी समय से जिस तरह की फिल्म कर रहे हैं उससे दर्शकों में एक खास तरह के कांटेक्ट को लेकर भरोसा दिलाने में कामयाब रहे हैं। इसीलिए बाला का पहला लुक आया था तब से लेकर बाला को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई थी।

यह कहानी है बालमुकुंद की जो बचपन से लेकर कॉलेज तक अपने दोस्तों में हीरो की तरह रहा है शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन के रोमांटिक डायलॉग बोलना उसकी स्टाइल में शुमार है। और अचानक उसके बाल धीरे-धीरे झड़ने लगते हैं और वह हो जाता है गंजा। आप क्या-क्या तरकीबें लगाई जाती है बालों को वापस लाने के लिए, रिश्तेदार दोस्त और ऑफिस के लोगों का उसके तरफ देखने का बदलता नजरिया। और खुद बाला का अपनी तरफ देखने का बदलता नजरिया, इसी पर आधारित है फिल्म बाला।

फिल्म का शानदार स्क्रीनप्ले एक मनोरंजक कथा दमदार अभिनय और सधा हुआ निर्देशन फिल्म को मजबूत बनाता है। फिल्में कॉमेडी और संवेदनाओं को समान रूप से पिरोया है यही इसकी खूबसूरती है। इसके लिए निर्देशक अमर कौशिक बधाई के पात्र हैं। 

बाला के किरदार में आयुष्मान खुराना पूरी तरह से सफल नजर आते हैं। गंजा होने का दर्द, छटपटाहट और खुद पर हंसने वाले लोगों का डर यह सारी भावनाएं उन्होंने बिना बोले पूर्ण रूप से संप्रेषित की है। कालिंदी के किरदार में भूमि पेडणेकर अपने संवेदनशील अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लेती है।

परी के किरदार में यामी गौतम ने अब तक के सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया है। सौरभ शुक्ला सीमा पाहवा की जोड़ी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती है। बच्चन भैया के किरदार में जावेद जाफरी को देखना सुखद है। वह जिस कद के अभिनेता हैं, उस कद के रोल अभी तक नहीं मिले थे उम्मीद की जा सकती है बच्चन भैया के बाद उन्हें एक अलग किरदार में भी सोचा जा सकता है।  कुल मिलाकर बाला एक मनोरंजक फिल्म है जो बॉडी शमिंग जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी है और उसे उस संजीदगी के साथ बनाया भी गया है। आप इस फिल्म का आनंद सपरिवार ले सकते हैं।

कलाकार- आयुष्मान खुराना, यामी गौतम, भूमि पेडणेकर, जावेद जाफरी

निर्देशक- अमर कौशिक

निर्माता- दिनेश विजन

वर्डिक्ट- *** 1/2 (साढ़े तीन स्टार )

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