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World Theatre Day 2023: पृथ्वीराज कपूर से लेकर शाह रुख खान तक, इन दिग्गज अभिनेताओं का थिएटर से रहा गहरा नाता

World Theatre Day 2023 हमारे ज्यादातर शीर्ष अभिनेता चाहे वह पृथ्वीराज कपूर हों बलराज साहनी हों नसीरुद्दीन शाह से लेकर शाह रुख खान तक सभी ने शुरुआत रंगमंच से की है। लाइव दर्शकों के सामने प्रदर्शन करने के अनुशासन ने उनके अंदर के कलाकार को पूर्णता तक पहुंचाया।

By Ruchi VajpayeeEdited By: Ruchi VajpayeePublished: Mon, 27 Mar 2023 11:26 AM (IST)Updated: Mon, 27 Mar 2023 11:26 AM (IST)
World Theatre Day 2023: पृथ्वीराज कपूर से लेकर शाह रुख खान तक, इन दिग्गज अभिनेताओं का थिएटर से रहा गहरा नाता
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नई दिल्ली, जेएनएन। World Theatre Day 2023: हर साल की 27 मार्च को  दुनियाभर में 'वर्ल्ड थिएटर डे' के रूप में मनाया जाता है। सिनेमा की शुरुआत रंगमंच से मानी जाती है। भारत में साल 1913 में पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र के आने से पहले, कलाकार और दर्शकों को जोड़ने वाला एक ही माध्यम था 'थिएटर'....

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वो शेक्सपियर थे जिन्होंने कहा- ये दुनिया एक रंगमंच है... और हमारे कलाकारों ने इस कथन को जिया। भारतीय सिनेमा की नींव ही रंगमंच के मंझे हुए कलाकार ने रखी थी। जिसके बाद पृथ्वीराज कपूर, गिरीश कर्नाड और उत्पल दत्त सरीखे अभिनेता ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया।

पृथ्वीराज कपूर

इन दिग्गज अभिनेता के नाम को शामिल किए बिना भारतीय सिनेमा और भारतीय रंगमंच दोनों का इतिहास पूरा नहीं होगा। पृथ्वीराज कपूर इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और पृथ्वी थिएटर के संस्थापक भी थे, जो मुंबई की थिएटर गतिविधियों का केंद्र रहा है। थिएटर इनकी रियल लाइफ में इतना ज्यादा हावी रहा कि ये फिल्मों में भी काफी बुलंद आवाज में डायलॉग्स बोलते थे।

 पृथ्वीराज कपूर के नाटकों में से एक, पठान, जिसका पहली बार 1947 में मंचन किया गया था। उस समय भी वो हिंदू मुस्लिम एकता के बारे में बात करता थे, जब विभाजन के दंगे देश को तबाह कर रहे थे। कहा जाता है कि इस नाटक के सिनेमाघरों में 600 शो चल रहे हैं। 1945 में आई दीवार उनके प्रसिद्ध नाटकों में से एक थी।

बलराज साहनी

मूल रूप से रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) के रहने वाले बलराज साहनी की पहली पत्नी दमयंती एक प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेत्री थीं। उन्होंने इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन के साथ एक अभिनेता के रूप में अपना करियर शुरू किया और जुबेदा और द इंस्पेक्टर जनरल जैसे नाटकों से नाम कमाया। थिएटर का अनुभव उन्हें फिल्मों में भी काम आया। इनके पॉपुलर नाटकों में से जुबेदा और जादू की कुर्सी अहम थे।  

ओम पुरी

ओम पुरी ने 60 के दशक में पंजाब में एक थिएटर अभिनेता के रूप में जीवन शुरू किया। वह हरपाल तिवाना की अध्यक्षता वाले पंजाब कला मंच का हिस्सा थे। वह अगस्त स्ट्रिंडबर्ग द्वारा द फादर, सोफॉकल्स द्वारा ओडिपस रेक्स, अल्बर्ट कैमस द्वारा द मिसअंडरस्टैंडिंग जैसे कई नाटकों का हिस्सा थे। वह 1970 में नई दिल्ली में स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में शामिल हुए। 1977 में उन्होंने मुंबई में मजमा नामक के थिएटर ग्रुप का गठन किया। ये ग्रुप 1986 तक सक्रिय था। 1978 में जब पृथ्वी थिएटर का उद्घाटन हुआ, तो गोविंद देशपांडे की उध्वस्त धर्मशाला के उनके प्रोडक्शन ने शाम को वहां प्रदर्शन किया। एक अभिनेता के रूप में उनका सबसे प्रसिद्ध नाटक घासीराम कोतवाल था, जिसमें उन्होंने लीड रोल प्ले किया था।

नसीरुद्दीन शाह

नसीरुद्दीन शाह मोटले थिएटर ग्रुप के संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। पिछले 40 सालों से वो रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उनके नाटक जैसे वेटिंग फॉर गोडोट, द लेसन, जूलियस सीजर, डियर लायर, कथा कोलाज, ए वॉक इन द वुड्स, कंबख्त बिल्कुल औरत काफी लोकप्रिय रहे। इन्होंने रंगमंच में अभिनय के साथ-साथ निर्देशक और निर्माता के रूप में भी काम किया है।

अमोल पालेकर

गोल माल, छोटी सी बात और रजनीगंधा जैसी फिल्मों में एक विनम्र आम आदमी के रूप में हिंदी फिल्म दर्शकों का दिल जीतने वाले अमोल पालेकर ने 60 के दशक के अंत में सत्यदेव दुबे के साथ प्रायोगिक थिएटर करना शुरू किया। बाद में उन्होंने अपना खुद का   थिएटर ग्रुप अनिकेत बनाया। चुप जैसे नाटकों के प्रति उनका अति सूक्ष्म दृष्टिकोण! कोर्ट चालू है, आधे अधूरे ने उन्हें बहुत प्रसिद्धि दिलाई। अफसोस की बात है कि फिल्मों में लोकप्रिय होने के बाद उन्होंने थिएटर की दुनिया को अलविदा कह दिया था। हालांकि कुछ साल पहले फिर से वापसी की है।

अनुपम खेर

NSD के अध्यक्ष रह चुके अनुपम खेर को इस अकादमी ने पहले तो एडमिशन देने से ही इनकार कर दिया था।  लेकिन अपने दूसरे प्रयास में अच्छे मार्क्स के साथ पास हुए और बाद में गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएट हुए। अपनी पहली ही फिल्म  सारांश (1984) में एक बुजुर्ग पिता के रोल में उन्हें तालियां मिली और इन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने अपने अभिनय को थिएटर में और पैना किया।

इरफान खान

इरफान खान फिल्मों के दिग्गज कलाकार थे, इन्होंने भी NSD से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था। इनकी प्रतिभा को देखकर ही इन्हें वहां स्कॉलरशिप भी दी गई। मुंबई जाने के बाद इरफान फिल्मों के साथ-साथ अपने नाटक मंडली से भी जुड़े रहे। वक्त मिलते ही वो मंच पर भी नजर आते।

शबाना आजमी

5 बार की राष्ट्रीय और फिल्मफेयर पुरस्कारों की विजेता, शबाना आजमी सर्वश्रेष्ठ भारतीय थिएटर अभिनेताओं में से एक हैं। फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के अलावा, उन्होंने तुम्हारी अमृता, सफेद कुंडली जैसे नाटकों में भी अभिनय किया।

पंकज कपूर

भारत में सबसे दिग्गज अभिनेताओं में से एक, पंकज कपूर ने कमर्शियल और पैरलर सिनेमा, दोनों में भी काम किया है। ये भी एनएसडी से पासआउट हैं और कई नाटकों में भी अपने अभिनय का जौहर दिखा चुके हैं।

 मनोज बाजपेयी

भीखू म्हात्रे और सरदार खान जैसे यादगार चरित्रों को चित्रित करने से पहले, मनोज बाजपेयी ने NSD में दाखिला लेना की तीन बार कोशिश की थी लेकिन तीनों बार उन्हें निराश होना पड़ा। उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारने में लगे रहे और बैरी जॉन की वर्कशॉप में भाग लेना पड़ा। थिएटर, इनके अंदर इस कदर समाहित है कि फिल्मों में भी इसकी झलक देखने को मिल जाती है।

शाह रुख खान

बॉलीवुड के बादशाह ने भी सिल्वर स्क्रीन पर अपनी शुरुआत करने से पहले थिएटर में अपना करियर बनाया था। वह एनएसडी के छात्र थे और दिल्ली के थिएटर एक्शन ग्रुप से जुड़े रहे।

राजकुमार राव

ट्रैप्ड और न्यूटन में शानदार अभिनय का मुजाया करने वाले राजकुमार राव इस ऐरा के सबसे टैलेंटेड एक्टर्स में से एक हैं। फिल्मों में आने पहले वो क्षितिज थिएटर ग्रुप और श्रीराम सेंटर से जुड़े थे। 


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