मुंबई बॉम्ब ब्लास्ट पर बनी इन फ़िल्मों को देखकर खड़े हो जाते हैं रौंगटे
धमाके दरअसल 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने का बदला माना गया, जिसके बाद मुंबई समेत पूरे देश में दंगे फैल गये थे।
मुंबई। मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है, मगर कभी-कभी इस तेज़ रफ़्तार शहर को आतंक और दहशत की नज़र लग जाती है, जिसे अक्सर पर्दे दिखाया जाता है।
1993 में हुए बम धमाकों को आख़िर कौन भूल सकता है! गुरुवार को एक बार फिर इसकी यादें ताज़ा हो गयीं, जब टाडा की विशेष अदालत ने बम धमाकों की साज़िश में शामिल होने के आरोप में अबु सलेम को उम्र क़ैद की सज़ा सुनायी। मुंबई के ये धमाके दरअसल 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने का बदला माना गया, जिसके बाद मुंबई समेत पूरे देश में दंगे फैल गये थे। इन धमाकों की साज़िश कैसे रची गयी और कैसे इन्हें अंजाम दिया गया, इसका सिलसिलेवार विवरण पत्रकार एस हुसैन ज़ैदी की किताब ब्लैक फ्राइडे- द ट्रू स्टोरी ऑफ़ द बॉम्बे बॉम्ब ब्लास्ट में दिया गया है, जिस पर अनुराग कश्यप ने 2004 में 'ब्लैक फ्राइडे' फ़िल्म बनायी।
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फ़िल्म के संवेदनशील और विवादित विषय के चलते इसे 3 साल तक सेंसर बोर्ड ने रिलीज़ नहीं होने दिया। आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही 'ब्लैक फ्राइडे' 9 फरवरी 2007 को रिलीज़ हो सकी। तब तक टाडा कोर्ट का फ़ैसला आ चुका था। इस फ़िल्म में केके मेनन, पवन मल्होत्रा, इम्तियाज़ अली, आदित्य श्रीवास्तव, प्रतिमा काज़मी और ज़ाकिर हुसैन ने अहम किरदार निभाये थे।
इसके बाद मुंबई 11 जुलाई 2006 को फिर दहली, जब ट्रेनों में सीरियल धमाके हुए। इस घटना पर 2008 में 'मुंबई मेरी जान' आयी। फ़िल्म की कहानी के केंद्र में पांच किरदार थे। इन्हीं के नज़रिए से धमाकों के बाद के हालात दिखाये गये थे। निशीकांत कामत निर्देशित फ़िल्म में परेश रावल, सोहा अली ख़ान, इरफ़ान ख़ान, केके मेनन और आर माधवन ने ये पांच किरदार निभाये थे।
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मुंबई पर तीसरा आतंकी हमला 2008 में 26 नवंबर को हुआ। समंदर के रास्ते पाकिस्तान से आये आतंकवादियों ने मुंबई की सड़कों पर ख़ून की होली खेली थी। तीन दिन तक आतंकवादियों ने मुंबई को बंधक बनाये रखा था। इन अटैक्स पर राम गोपाल वर्मा ने 'द अटैक्स ऑफ़ 26/11' बनायी, जो 2013 में रिलीज़ हुई। इस फ़िल्म में नाना पाटेकर और संजीव जायसवाल ने लीड रोल्स निभाये। नाना तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के रोल में थे, जबकि संजीव ने ज़िंदा पकड़े गये आतंकी अजमल कसाब का किरदार निभाया था।
इन रियल लाइफ़ ड्रामा फ़िल्मों के अलावा 'आमिर', 'अ वेडनेसडे' और 'हॉलीडे' जैसी काल्पनिक कहानियों के ज़रिए मुंबई में आतंकवाद की घटनाओं पर फ़िल्मों का निर्माण किया गया है, जिन्होंने दर्शकों पर अपना प्रभाव छोड़ा।
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