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90 साल पहले बनी हीरोइन, बेटी से हुई जंग, आज एक्ट्रेस का परिवार है सुपरस्टार; सिनेमा की उस 'बागी' हसीना की दास्तां!

Published: Mon, 09 Feb 2026 06:50 PM (IST)

30 और 40 के दशक में सिनेमा उपज रहा था। सितारों की चमक-धमक तब उतनी नहीं थीं, लेकिन भारतीय सिनेमा ...और पढ़ें

वो हीरोइन जिसकी इकलौती फिल्म देखने गए महात्मा गांधी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में आज अभिनेत्रियों के तौर-तरीके और उनका रंग-ढंग भले ही बदल गया हो, लेकिन एक वक्त ऐसा था जब सिनेमा में काम करने वाली एक्ट्रेसेस ने अपने दम पर वो मुकाम हासिल किया, जो एक तरह से नामुमकिन था। ये वो दौर था जब बड़े घरानों की बेटियां कैमरे पर काम करना तो दूर उसका जिक्र भी नहीं कर सकती थीं।

इसी बीच एक ऐसी अभिनेत्री आई, जिसने नाम सिर्फ अपना नाम बनाया बल्कि उन पीढ़ियों को स्थापित कर दिया, जो आज भी सिनेमा की शान बनी हुई हैं। कौन है वो हिंदी सिनेमा की पहली अभिनेत्री, जिसकी बेटियां सुपरस्टार रही, तो वहीं उनकी नातिन ने भी सिनेमा में अपने नाम का परचम लहराया।

कौन थीं शोभना समर्थ?

आज जिस अभिनेत्री के बारे में हम बात कर रहे हैं, और जिनकी कहानी को आपसे रूबरू करा रहे हैं, असल में वो कोई और नहीं बल्कि शोभना समर्थ थीं। वही शोभना समर्थ जिन्होंने हिंदी सिनेमा में सीता बनकर अपना नाम बनाया। शोभना समर्थ का जन्म 17 नवंबर, 1916 को मुंबई में हुआ।

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जब उनका जन्म हुआ, तब उनका नाम सरोज शिलोत्री था। किस्सा टीवी के मुताबिक, जब शोभना समर्थ पैदा हुई थी तो डॉक्टर्स को लगा था कि बच्ची मरी हुई पैदा हुई है। बाद में शोभना समर्थ की नानी ने नोटिस किया कि बच्ची की उंगली तो हिल रही हैं। उन्होंने डॉक्टर को बताया। डॉक्टर ने तुरंत गरम पानी से इनकी सिकाई शुरू की और आखिरकार नन्ही शोभना समर्थ के हाथ-पैर ठीक से चलने लगे। शोभना के माता-पिता के कोई और संतान नहीं थी, ऐसे में उनकी परवरिश एक बेटे के बराबर ही हुई।

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ऐसे फिल्मों में आईं शोभना समर्थ

उस जमाने में लड़कियों को घर में रखा जाता था लेकिन शोभना के माता-पिता खुले विचारों के थे, ऐसे में सोभना के माता-पिता ने उन्हें लाड़-प्यार से तो पाला ही साथ ही उन्हें आजादी भी दी। शोभना यानि सरोज जब बड़ी हुई तो कुछ प्रिंट विज्ञापनों में उनकी तस्वीर छपी। इस तरह धीरे-धीरे वह ग्लैमर वर्ल्ड की तरफ आने लगी।

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शुरूआत में घरवालों ने इस पर आपत्ति जरूर जताई, लेकिन बाद में वो धीरे-धीरे सिनेमा की ओरबढ़ती गईं। एक नाटक के बाद शोभना के मामाजी ने इस पर रोक-टोक की, लेकिन बाद में शोभना समर्थ की मां के कहने पर वो सिनेमा की ओर बढ़ गईं। शोभना समर्थ ने 1935 में मराठी फिल्म 'निगाहें नफरत' से डेब्यू किया।

सीता बनकर सिनेमा में बनाई पहचान

शोभना समर्थ ने मराठी सिनेमा से कदम रख लिया। हालांकि उन्हें असली पहचान मिली 1943 में, जब उन्होंने फिल्म 'राम राज्य' में सीता का किरदार निभाया और हर तरफ वाहवाही लूटी।

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कहा जाता है कि, 'राम राज्य' में उनके द्वारा निभाया गया माता सीता का किरदार इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी देवी की तरह पूजने लगे थे। यहां तक कि कहा तो यह भी जाता है कि, यह एकमात्र ऐसी फिल्म थी जिसे महात्मा गांधी ने देखा था। राम राज्य उनके जीवन की पहली और ऐसी आखिरी फिल्म थी, जिसे उन्होंने देखा था। वहीं राम राज्य के बाद शोभना समर्थ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हिंदी सिनेमा में उन्हें इस फिल्म ने अलग पहचान दिलाई। शोभना समर्थ उस समय की सबसे महंगी और डिमांड वाली अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं।

शोभना की बेटियां बनीं हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार

शोभनाम समर्थ (Shobhna Samarth) ने डायरेक्टर कुमारसेन समर्थ से शादी की थी। शोभना और कुमारसेन के चार बच्चे हुए, जिसमें उनकी दोनों बेटियां नूतन (Nutan) और तनुजा (Tanuja) ने हिंदी सिनेमा में दिग्गज अभिनेत्रियां बनीं। भले ही शोभना समर्थ ने ज्यादा फिल्में नहीं कीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों के लिए खुद ही हिंदी सिनेमा में जगह बनाई।

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उन्होंने अपनी बेटी नूतन को लॉन्च करने के लिए साल 1950 में 'हमारी बेटी' नाम की फिल्म बनाई। इसी फिल्म से नूतन ने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। हालांकि नूतन के साथ उनका रिश्ता ज्यादा अच्छा नहीं रहा। दरअसल शोभना ने अपनी प्रोड्क्शन कंपनी जब बनाई तो उसमें नूतन का भी हिस्सा था।

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नूतन जो फिल्मों से कमाती थीं उसका पैसा प्रोडक्शन कंपनी में जाता था। वहीं पैसों की लिखा-पढ़ी शोभना के पास ही होती थी, ऐसे में मां-बेटी के बीच इसी के चलते तल्खियां पैदा हुईं और दोनों में अनबन हुईं। इनकम टैक्स ना भरने के चलते मां-बेटी का रिश्ता कोर्ट-कचहरी की दहलीज तक गया।

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हालांकि बाद में दोनों का रिश्ता ठीक जरूर हुआ। वहीं नूतन के बाद शोभना ने तनुजा को भी अपनी फिल्म 'छबीली' से बड़े पर्दे पर उतारा। इस फिल्म को भी उन्होंने ही बनाया था और इस फिल्म से तनुजा भी स्टार बन गईं।

शोभना समर्थ की नातिन हैं काजोल

हिंदी सिनेमा में शोभना समर्थ की बेटियों ने बड़े पर्दे पर राज किया। एक तरफ जहां नूतन सिनेमा में लंबे वक्त तक टिकी रहीं, तो वहीं नूतन के बाद उनकी छोटी बेटी तनुजा ने हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई। तनुजा ने बड़े पर्दे पर कई हिट फिल्मों में काम किया, तो वहीं नूतन भी सिनेमा का अहम हिस्सा रहीं।

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नूतन के बेटे मोहनिश बहल भी एक एक्टर हैं, तो वहीं उनकी पोती प्रनुतन भी हिंदी सिनेमा में एक्टिव हैं। उधर तनुजा की बेटी और शोभना समर्थ की पोती काजोल हैं, जो आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। काजोल (Kajol) कई बार अपनी नानी को याद करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं।

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शोभना समर्थ ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक फिल्म जगत से नाता बनाए रखा। वो सिनेमा को करीब से देखती रहीं। वो हिंदी सिनेमा की उस नींव का हिस्सा रही, जब फिल्में बनना शुरू हुईं और जाते-जाते एक ऐसी लेगेसी सेट करके गईं, कि आज उनकी पीढ़ियां सिनेमा में राज कर रही हैं और नाम कमा रही हैं। 9 फरवरी, 2000 को कैंसर के कारण उनका निधन हो गया।

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