नई दिल्ली, जेएनएन। Happy Birthday Meena Kumari: अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी (Meena Kumari) का आज 86वां जन्मदिन है। लोग मीना कुमारी को ट्रेजडी क्वीन से लेकर सिंड्रेला तक के नाम से जानते हैं। साहिब बीवी और गुलाम, पाकीज़ा, मेरे अपने, बैजू बावरा, दिल अपना और प्रीत परायी जैसी फिल्मों के लिए वो आज भी याद की जाती हैं। 1 अगस्‍त, 1932 को जन्मीं मीना कुमारी का असल नाम महज़बीन था। इस दिन आपको बताते हैं अभिनेत्री मीना कुमारी के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें -

जब उनका जन्म हुआ तब पिता अली बख्‍श और मां इकबाल बेगम (मूल नाम प्रभावती) के पास डॉक्‍टर को देने के पैसे नहीं थे। दोनों ने तय किया कि बच्‍ची को किसी अनाथालय के बाहर छोड़ दिया जाए और छोड़ भी दिया गया था। लेकिन, पिता का मन नहीं माना और वो पलट कर भागे और बच्‍ची को गोद में उठा कर वापस घर ले आए। 

(फोटो क्रेडिट - मिड डे)

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सात साल की उम्र से करने लग थीं अभिनय

महज़बीन (मीना कुमारी) ने कम उम्र में ही घर का सारा बोझ अपने कंधों पर उठा लिया था। सात साल की उम्र से ही वो फिल्मों में काम करने लगीं थीं। वे बेबी मीना के नाम से पहली बार फिल्म ‘फरज़द-ए-हिंद’ में दिखीं। इसके बाद लाल हवेली, अन्‍नपूर्णा, सनम, तमाशा आदि कई फिल्में कीं। लेकिन उन्‍हें स्‍टार बनाया 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ ने। इस फिल्म के बाद वह लगातार सफलता की सीढियां चढ़ती गईं। ‘बैजू बावरा’ ने मीना कुमारी को बेस्‍ट एक्‍ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलवाया। वह यह अवॉर्ड पाने वाली पहली अभिनेत्री थीं।

सुख और दु:ख का साथ

मीना कुमारी ने करियर में जो बुलंदियां हासिल की, निजी ज़िंदगी में उतनी ही मुश्किलें झेलीं। जन्‍म से लेकर अंतिम घड़ी तक उन्‍होंने दुख ही दुख झेला। मीना कुमारी और कमाल अमरोही की शादी के किस्से भी बड़े दिलचस्प हैं। लेकिन, उनके रिश्ते कभी मधुर नहीं रहे। कमाल अमरोही जब ‘पाकीज़ा’ बना रहे थे, तब वो बुरी तरह आर्थिक संकट में फंस गए थे। मीना ने अपनी सारी कमाई देकर पति की मदद की। इसके बावजूद इस फिल्म के दौरान दोनों के संबंध लगातार खराब हो गए। नौबत तलाक तक पहुंच गई थी। मीना कुमारी की तबीयत भी खराब रहने लगी थी। पैसे भी नहीं थे। मीना कुमारी बहुत बीमार हो गईं थीं। पाकीज़ा कमाल अमरोही की महत्‍वाकांक्षी फिल्म थी, लेकिन वो इसे आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे। सुनील दत्‍त और नर्गिस के कहने पर वर्षों बाद इसकी शूटिंग शुरू हुई। मीना कुमारी तलाक के बाद भी कमाल अमरोही की इस फिल्म का हिस्सा बनी रहीं। 14 साल बाद 4 फरवरी, 1972 को फिल्म पर्दे पर आई। तब तक मीना की हालत काफी बिगड़ गई थी। बीमारी की हालत में भी वह लगातार फिल्में कर रही थीं, लेकिन रोग असाध्‍य हो गया था। अंतत: 31 मार्च 1972 को लिवर सिरोसिस के चलते मीना कुमारी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 

(फोटो क्रेडिट - मिड डे)

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दिलीप कुमार को बताती थीं अपरिचित

बहुत कम लोगों को पता होगा कि मीना कुमारी के दिलीप कुमार के साथ संबंध कुछ ऐसे थे कि मीना कुमारी ने हमेशा यही कहा कि वह दिलीप कुमार से परिचित ही नहीं हैं। आप लोगों को बता दें कि ट्रेजेडी क्वीन ने दिलीप कुमार के साथ 'कोहिनूर', 'यहूदी' और 'आजाद' सहित कई फिल्मों में यादगार अभिनय किया था।

(फोटो क्रेडिट - मिड डे)

बेहतरीन अदाकारी के लिए मीना कुमारी को 1963 के दसवें फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्‍ट एक्‍ट्रेस कैटेगरी में तीन फिल्में (मैं चुप रहूंगी, आरती और साहिब बीवी और गुलाम) नॉमिनट हुई थीं और तीनों में मीना कुमारी ही थीं। अवॉर्ड साहिब बीवी और गुलाम में ‘छोटी बहू’ के रोल के लिए मिला था।

आपको बता दें कि पिछले साल गूगल (Google) ने मीना कुमारी के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर को अपने डैशबोर्ड पर लगाया था। 

(सभी फोटो क्रेडिट - मिड डे)

 

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Posted By: Rahul soni