नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय सिनेमा में जादू को लेकर अब धीरे-धीरे लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। जादू को लेकर मूक सिनेमा से अब तक करीब 50 फिल्में बन चुकी हैं। जिनमें अमिताभ बच्चन को लेकर बनी प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जादूगर’ भी है। लेकिन अब पहली बार किसी जादूगर की ज़िंदगी और जादुई खेल की हकीकत को लेकर एक फिल्म बनने जा रही है। वो फेमस जादूगर हैं सम्राट शंकर और इस फिल्म का नाम है ‘जादू मेरी नज़र’।

विभिन्न भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए बन रही यह फिल्म एक डोक्यू-ड्रामा होगी। जो देश विदेश में पिछले 45 सालों में करीब 25 हज़ार शो कर चुके जादूगर सम्राट शंकर की ज़िंदगी और अब तक की यात्रा और उनके जादुई शो भी दिखाएगी। सम्राट शंकर जहां देश के नंबर वन जादूगर के रूप में जाने जाते हैं, वहां वह अब तक 18 हज़ार चैरिटी शो देश में आई कई आपदाओं की सहायता कर चुके हैं।

फिल्म ‘जादू मेरी नज़र’ का निर्माण हरीराज फिल्म्स के बैनर से होगा। जबकि फिल्म का निर्देशन वरिष्ठ पत्रकार और सुप्रसिद्द फिल्म समीक्षक प्रदीप सरदाना करेंगे। प्रदीप सरदाना कई बरस पहले जादूगर शंकर पर दूरदर्शन के साथ मिलकर 10 एपिसोड का एक सीरियल भी बना चुके हैं। पिछले साल जनवरी में भी डीडी नेशनल और आकाशवाणी दिल्ली ने सम्राट शंकर को लेकर विशेष कार्यक्रम भी प्रसारित किए थे। इधर कोरोना काल में भी

‘आज तक’ सहित विभिन्न न्यूज़ चैनल्स पर भी शंकर अपने जादुई संदेश देने के लिए सुर्खियों में रहे।

फिल्म की शूटिंग दिल्ली, मुंबई के साथ सम्राट शंकर की जन्म भूमि हरियाणा के एलनाबाद और राजस्थान के श्रीकरणपुर में भी होगी। सम्राट शंकर देश के ऐसे जादूगर हैं जिनके शो विभिन्न राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के साथ कई केन्द्रीय मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित कई फिल्म सितारे भी देख चुके हैं। शंकर कहते हैं ‘मुझ पर और जादुई कला को लेकर फिल्म बनना खुशी की बात है। मैं हमेशा कहता रहा हूं कि जादू कोई तंत्र मंत्र का खेल नहीं है। यह एक कला है, जिसे हाथ की सफाई और कुछ यंत्रों की सहायता से किया जाता है। जबकि बरसों से लोगों में यह भ्रम है कि यह कोई तांत्रिक विद्या है। लोगों के इस अंधविश्वाश को दूर करने और अपनी इस विरासत को सभी को सौंपने के लिए, मैंने हाल ही में एक ऐसा ‘मैजिक बॉक्स’ भी बनाया है, जिससे कोई भी जादूगर बन सकता है। अपनी इस फिल्म के माध्यम से भी मैं यही संदेश देने की कोशिश करूंगा कि जादू सिर्फ एक कला है, इसे काला जादू या जादू-टोना कहना एक दुष्प्रचार है’।

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