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    Bichhoo मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं: निर्देशक गुड्डू धनोआ

    By Priti KushwahaEdited By:
    Updated: Sat, 29 Aug 2020 08:38 AM (IST)

    बॉबी से स्वीकृति लेना ज्यादा मुश्किल काम नहीं था क्योंकि उनके पिता धर्मेंद्र मेरी सगी बुआ के बेटे हैं। इससे पहले मैं धर्मेंद्र और सनी देयोल के साथ भी ...और पढ़ें

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    Bichhoo मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं: निर्देशक गुड्डू धनोआ

    दीपेश पांडेय, जेएनएन। फिल्म 'बिच्छू' बनाने का ख्याल जब गुड्डू धनोआ के जेहन में आया तब उनके पास बॉबी देयोल और रानी मुखर्जी को देने के लिए अनुबंध राशि भी नहींथी, पर यह विश्वास पक्का था कि फिल्म सफल होगी। इस फिल्म को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं निर्देशक गुड्डू धनोआ। वह साझा कर रहे हैं फिल्म से जुड़ी यादें...

    वर्ष 2000 में रिलीज फिल्म 'बिच्छू' मेरे लिए फिल्म से कहीं ज्यादा एक उपलब्धि की तरह है। जब मैंने इस फिल्म को बनाने के बारे में सोचा था, उस समय मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। मेरे दोस्त नाना जोशी ने मुझे रानी मुखर्जी और बॉबी देयोल को साइन करने के लिए पैसे दिए थे। नाना जोशी के प्रिंटिंग प्रेस पर ही मेरी फिल्मों के पोस्टर और विज्ञापन संबंधी अन्य सामाग्रियां प्रिंट होती थीं। इस फिल्म की कहानी बॉबी और रानी की जोड़ी को ध्यान में रखते हुए लिखी गई थी। यह कहानी दोनों को पसंद आई और उन्होंने इसमें काम करना स्वीकार कर लिया।

    मेरे लिए बॉबी से स्वीकृति लेना ज्यादा मुश्किल काम नहीं था, क्योंकि उनके पिता धर्मेंद्र मेरी सगी बुआ के बेटे हैं। इससे पहले मैं धर्मेंद्र और सनी देयोल के साथ भी फिल्में बना चुका था। इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनने के बाद

    रानी की दो फिल्में 'कुछ कुछ होता है' और 'गुलाम' सुपरहिट हो चुकी थीं और कुछ दिनों के लिए वह विदेश चली गई थीं। मुझे डर था कि कहीं रानी अब इंकार न कर दें, लेकिन विदेश से आते ही उन्होंने मुझसे पूछा कि गुड्डू भैया फिल्म कब शुरू कर रहे हैं। 

    इस फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग भारत के अलावा मॉरीशस में हुई थी। वहां बड़ी संख्या में भारतीय हैं, इसलिए भारत और वहां के दृश्यों में ज्यादा अंतर नहीं दिखा। वहां के बीच और समुद्र का पानी काफी साफ है। इस वजह से फिल्म को अच्छे विजुअल्स मिले। इस फिल्म के म्यूजिक के लिए संगीतकार आनंद राज आनंद से मुलाकात के लिए मैं तय समय पर उनके घर पहुंचा, पर वह मौजूद नहीं थे। 

    वहां मेरी मुलाकात उनके छोटे भाई हैरी आनंद से हुई। बातचीत में पता चला कि उन्हें भी संगीत में दिलचस्पी है। उन्होंने मुझे 'जीवन में जाने जाना' गाना सुनाया। मैंने उसी समय फिल्म में इस गाने को लेने का फैसला किया और कहा कि फिल्म का मुहूर्त शॉट इसी गाने से शुरू करेंगे। आनंद राज  के आने पर मैंने फिल्म की कहानी सुनाई। उन्होंने एक गाना सुनाते हुए बताया कि अनेक फिल्मकारों को इसे सुनाया, पर किसी ने उसे अपनी फिल्म में नहीं लिया। 

    मैंने वह गाना सुनते ही कह दिया था कि यह सुपरहिट होगा। हमने हंसराज हंस और श्वेता शेट्टी के साथ वह गाना रिकॉर्ड किया। वह गाना 'दिल टोटे टोटे हो गया' सुपरहिट रहा। फिल्म में असली बिच्छू दिखाए गए हैं। जानवरों के व्यवहार का कोई भरोसा नहीं होता, इसलिए हमने सेट पर एक जैसे ही दो बिच्छुओं का इंतजाम कर रखा था। बिच्छुओं की देखभाल करने वाले ने बताया था कि उनका जहर निकाला जा चुका है। 

    फिर भी सेट पर उन्हें देखकर सभी डर जाते थे। दो-तीन दिनों में आदत पडऩे के बाद बॉबी आसानी से उन बिच्छुओं को अपनी हथेलियों पर रख लेते थे, लेकिन रानी अंत तक उनसे डरती रहीं। हम अक्सर उन्हें चिढ़ाने के लिए कहते कि अगले सीन में बिच्छू आपके हाथ में रखे जाएंगे। 

    क्लाइमेक्स सीन में जीवा (बॉबी देयोल) मरते-मरते बिल्डिंग में बम धमाका करके फिल्म के खलनायक एसीपी देवराज खत्री (आशीष विद्यार्थी) को मार देते हैं। यह सीन हमने हैदराबाद स्थित रामोजी फिल्म सिटी में शूट किया। पहले हम इस फिल्म को 30 जून, 2000 को रिलीज करने वाले थे। फिल्म रिलीज करने की सारी तैयारियां हो चुकी थीं। अभिषेक बच्चन की पहली फिल्म 'रिफ्यूजी' भी उसी दिन रिलीज होने वाली थी।  

    ऐसे में 'रिफ्यूजी' को सोलो रिलीज देने के लिए मेरे पास कई फोन आए। इसी बीच फिल्म निर्माता हरीश सुगंध जी का मैसेज मुझे मिला कि अमिताभ बच्चन ने 'बिच्छू' की रिलीज एक सप्ताह आगे बढ़ाने के लिए निवेदन किया है। मैं अमिताभ जी का निवेदन टाल नहीं सका और फिल्म की रिलीज एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ाकर सात जुलाई कर दी।  

     Photo Credit-  Mid Day