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    विद्या बालन की शॉर्ट फ़िल्म नटखट में बेहतरीन एक्टिंग और बहुत बड़ा मैसेज, यू-ट्यूब पर हुआ वर्ल्ड प्रीमियर

    By Manoj VashisthEdited By:
    Updated: Wed, 03 Jun 2020 08:34 AM (IST)

    Natkhats World Premiere विद्या का अभिनय बहुत बोल्ड माना जाता है। पहली बार वो ऐसे किरदार में हैं जहां उन्हें बोल्ड नहीं होना है बल्कि दबी हुई गृहिणी के रोल को जीना है।

    विद्या बालन की शॉर्ट फ़िल्म नटखट में बेहतरीन एक्टिंग और बहुत बड़ा मैसेज, यू-ट्यूब पर हुआ वर्ल्ड प्रीमियर

    नई दिल्ली, जेएनएन। विद्या बालन की शॉर्ट फ़िल्म नटखट का मंगलवार को यू-ट्यूब पर We Are One- Global Film Festival में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ। लगभग आधे घंटे की फ़िल्म बेहतरीन अदाकारी के साथ एक बेहद ज़रूरी संदेश देती है। ख़ुद को श्रेष्ठ समझने की पुरुषवादी सोच पर प्रहार करती नटखट पूरे समाज को आइना दिखाती है कि सिर्फ़ रामायण और महाभारत देखने से बच्चों में अच्छे संस्कार नहीं आते, बल्कि उनके सामने मिसाल पेश करनी पड़ती है। 

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    देश के किसी कस्बाई परिवार की पृष्ठभूमि में नटखट की कहानी कही गयी है। एक परिवार है, जिसकी विद्या बालन बहू हैं। उनका 5-6 साल का बेटा है सोनू, जो स्कूल और अपने आस-पास के माहौल से वो सब सीख रहा है, जो उसे उसके दादा जी, पिता और चाचा का प्रतिविम्ब बना देंगे। मासूम बेटे की बालसुलभ बातों में पनपती पुरुषवादी सोच का जब विद्या को पता चलता है तो वो अंदर तक हिल जाती हैं।

    विद्या बेटे को समझाने के लिए एक कहानी सुनाती हैं, जिसमें कहीं ना कहीं वो ख़ुद, उनका बेटा और वो सारे लोग किरदार के रूप में मौजूद हैं, जो लड़कियों पर बल प्रदर्शन, छेड़छाड़ और अपमान करने को अपनी श्रेष्ठता और हक़ समझते हैं। 

    कहानी का क्लाइमैक्स नन्हे सोनू का हृदय परिवर्तन करता है। उसकी समझ में आ जाता है, क्यों उसकी नादानियों की छाप उसकी मां के शरीर पर चोटों के निशान के रूप में नज़र आती थी। फ़िल्म के कुछ दृश्य दर्शक को हैरान करते हैं। सोचने पर विवश करते हैं, कहीं अपना बच्चा तो ऐसे ही अनजाने में अपनी सोच को दूषित तो नहीं कर रहा। बचपन में लड़कियों के लिए यही सोच बड़ा होने पर डोमेस्टिक वायोलेंस या ज़्यादा गंभीर अपराधों के रूप में सामने आती है। 

     

     

     

     

     

     

     

     

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    http://bit.ly/NatkhatPremiere

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    विद्या का अभिनय बहुत बोल्ड माना जाता है। पहली बार वो ऐसे किरदार में हैं, जहां उन्हें बोल्ड नहीं होना है, बल्कि पुरुषों के वर्चस्व को अपनी नियति मान चुकी बहू और बीवी के किरदार में दबकर रहना है। विद्या इस शॉर्ट फ़िल्म में भी बड़ा अभिनय कर गयीं। सहायक किरदारों में अतुल तिवारी (दादा जी), राज अरुण (पति) और स्पर्श श्रीवास्तव (चाचा) की मेहमान भूमिकाएं कथानक को सपोर्ट करती हैं।

    छोटी-छोटी भूमिकाओं में स्थानीय कलाकारों से उन्होंने बेहतरीन काम लिया है। ख़ासकर, सोनू के किरदार में 5-6 साल की बच्ची सानिका पटेल का अभिनय देखने वाले को मोहित करता है। पहली फ़िल्म में कैमरे के सामने उसकी सहजता वाकई तारीफ़ के काबिल है। नटखट को शान व्यास ने निर्देशित किया है। अनुकम्पा हर्ष और शान व्यास ने लिखा है।