धनतेरस पर जन्मीं, मदर इंडिया में बनीं लड़का; कथक डांस को लेकर सुने ताने, वो 'सितारा' जिसने ठुकराया था पद्म भूषण
बॉलीवुड में डांस के दम पर अपनी पहचान बनाना इतना आसान नहीं है, लेकिन 1920 में एक ऐसी कथक डांसर ...और पढ़ें

बॉलीवुड में कथक डांस का लाने वाली वो सितारा/ फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
रवींद्रनाथ टैगोर ने कथक डांसर को नृत्य साम्राज्ञी की उपाधि दी
पद्म भूषण लेने से इनकार कर भारत रत्न की मांग की
इस डांसर को लड़की होकर डांस करने पर समाज के पड़े ताने
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा से लेकर लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल और न्यूयॉर्क के कोनेगा जैसे बड़े मंचो पर अपने भारतीय शास्त्रीय नृत्य से सबको मंत्रमुग्ध करने वाली 40 और 50 के दशक में एक ऐसी डांसर ने बॉलीवुड में कदम रखा, जिनकी घुंघरूओ की झंकार ने देश को अंतराष्ट्रीय लेवल पर सम्मान दिलाया।
जिनकी डांस कला को देखकर रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'नृत्य साम्राज्ञी' की उपाधि दी। कौन थीं वह नृत्य साम्राज्ञी जिन्होंने पद्मभूषण लेने से किया इनकार, डांस की खातिर छोड़ा बॉलीवुड, पढ़ें उनसे जुड़ा ये किस्सा।
मेन स्ट्रीम बॉलीवुड में कथक डांस को किया इंट्रोड्यूस
जिस कथक डांसर की कहानी हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं, वह महान नृत्यांगना सितारा देवी है। धनतेरस के दिन 8 नवंबर 1920 में कोलकाता में जन्मीं सितारा देवी का परिवार ओरिजनली वाराणसी से ताल्लुक रखता था। सितारा देवी के पिता संस्कृत में पारंगत थे। वह अपने परिवार का पालन पोषण कथक सिखाकर ही करते थे। सितारा की मां मत्स्या कुमारी नेपाल की रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखती थीं।

सितारा देवी को डांस सिखाने के लिए सुनाई गई थी खरी-खोटी
सितारा देवी जब छोटी थीं तब से ही उनके पिता उन्हें कथक सिखाया करते थे, लेकिन उस दौर में लड़कियों का डांस करना खराब माना जाता था। फेसबुक पेज फेमिनिज्म इन इंडिया ने बताया कि सितारा देवी के पिता को बेटी को डांस सिखाने के लिए काफी पब्लिक शेम किया गया। दरअसल, उस दौर में लड़कियों का डांस करना अच्छा नहीं माना जाता था। ऐसे में बचपन में सितारा देवी के डांस करने पर उनके पिता और उन्हें काफी पब्लिकली शेम किया गया था और समाज के ताने झेलने पड़े।
जिसके बाद उनके पिता वाराणसी की उस जगह को छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गए और उन्होंने वहां पर बच्चों का एक डांस स्कूल भी खोला। जब सितारा देवी हाई स्कूल में थी उसी दौरान उन्होंने सावित्री और सत्यवान जैसे ड्रामों में डांस परफॉर्म किया।

11 साल की सितारा देवी ने पैलेस में किया परफॉर्म
जब सितारा देवी महज 11 साल की थी तब वह परिवार के साथ बॉम्बे शिफ्ट हुईं, जहां उन्होंने अतिया बेगम के पैलेस में ऑडियंस के लिए परफॉर्म किया। जब वो अपना कथक डांस कर रही थीं, उस दौरान वहां पर रबिन्द्रनाथ टैगोर और सरोजिनी नायडू भी मौजूद थे। जिसके बाद रबिन्द्रनाथ टैगोर ने उनके डांस से इम्प्रेस होकर उन्हें नृत्य सम्राज्ञनी की उपाधि दी और साथ ही उन्हें शॉल गिफ्ट देकर 50 रुपए देने की इच्छा जताई, लेकिन सितारा देवी ने उनका आशीर्वाद लेकर ये सभी चीजें लेने से साफ इनकार कर दिया।
इन बॉलीवुड फिल्मों में किया काम
इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्ममेकर निरंजन शर्मा से हुई, जिन्होंने सितारा देवी को हिंदी मूवी में डांस सीक्वेंस करने का ऑफर दिया। जिसके बाद उन्होंने नगिना वन, रोटी, वतन, अंजलि और मदर इंडिया जैसी फिल्मों में अपने डांस का जलवा बिखेरा। हालांकि, नरगिस की फिल्म मदर इंडिया में एक लड़के के रूप में होली के त्योहार पर एक विशेष नृत्य प्रस्तुत किया था। इस बात का अंदाजा किसी को नहीं था कि शायद वो आखिरी बार अपनी पसंदीदा कथक डांसर को किसी फिल्म में देख रहे हैं।

मदर इंडिया के बाद सितारा देवी ने फिल्मों के ऑफर लेने से साफ-साफ इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें ये एहसास हुआ कि इससे उनका नृत्य काफी इफेक्ट हो रहा है। फिल्मों से दूर होने के बाद भी उन्होंने मधुबाला से लेकर रेखा, माला सिन्हा और काजोल जैसे एक्टर्स को डांस सिखाया।
पद्मभूषण लेने से क्यों किया था इनकार?
छह दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में बिताने वालीं सितारा देवी को साल 2011 में उनके शानदार करियर के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सराहा गया। इसके अलावा उन्हें 1969 में संगीत नाटक एकेडमी और 1973 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। हालांकि, साल 2002 में उन्हें जब पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा था, तो उन्होंने ये अवॉर्ड लेने से साफ इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि क्लासिकल डांस में उनका कंट्रीब्यूशन बहुत ज्यादा था, जिसके लिए उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।
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