अटारी-वाघा बॉर्डर पर बजी पाकिस्तानी कव्वाली, Atif Aslam की आवाज में वायरल; इंटरनेट पर 11 साल पुराने गाने की धूम
अटारी-वाघा बॉर्डर पर बजी आतिफ असलम (Atif Aslam) की 11 साल पुरानी कव्वाली इस वक्त इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है।

आतिम असलम का 11 साल पुराना गाना वायरल। फोटो क्रेडिट- एक्स
HighLights
11 साल पुरानी पाकिस्तानी कव्वाली इंटरनेट पर वायरल
आतिफ असलम ने पाकिस्तानी कव्वाली को गाया था
अटारी वाघा बॉर्डर पर आतिफ असलम का गाना बजा
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आयुष्मान खुराना और सारा अली खान अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'उड़ता तीर' (Udta Teer) के प्रमोशन के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर गए थे। मगर किसे पता था कि इस बॉलीवुड फिल्म से ज्यादा चर्चा पाकिस्तानी गाना (Pakistani Song) बटोर लेगा।
अटारी-वाघा बॉर्डर पर बजने वाली ये पाकिस्तानी कव्वाली (Pakistani Qawwali) अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। इस कव्वाली की धुन ने सारा और आयुष्मान की आवाज को दबा दिया।
उड़ता तीर के प्रमोशन के दौरान बजी पाकिस्तानी कव्वाली
हुआ यूं कि बीते दिन सारा अली खान और आयुष्मान खुराना अटारी-वाघा बॉर्डर पर अपनी स्पाई-कॉमेडी ड्रामा 'उड़ता तीर' के प्रमोशन कर रहे थे। इस प्रमोशन के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें आयुष्मान और सारा फिल्म को लेकर बात कर रहे थे, लेकिन इस बीच एक कव्वाली बजी।
आतिफ असलम ने गाया था गाना
अटारी-वाघा बॉर्डर पर 'उड़ता तीर' के प्रमोशन के बीच पाकिस्तान की तरफ से 11 साल पुरानी सुपरहिट कव्वाली 'ताजदार-ए-हरम' (Tajdar-e-Haram Song) बजा। इस गाने को आतिफ असलम (Atif Aslam) ने 2015 में कोक स्टूडियो पाकिस्तान (Coke Studio Pakistan) के लिए गाया था। यह गाना 11 सालों से कल्ट क्लासिक है।
Wagah Border par Bollywood apni anti-Pakistan film promote karne pahuncha, aur Pakistan ne Atif Aslam ki qawwali baja di! 🎶😂 Sarhad par tension apni jagah, par music ka apna hi scene hai! ❤️🎵 #AtifAslam #WagahBorder #Bollywood #bbtvi #QaziTouqeer #dwts #StarAcademy https://t.co/IZIyPKMN8I
— Ram kashyap (My Tweet my personal opinion) (@ramk_1983) October 21, 2026
क्या है 'ताजदार-ए-हरम' गाने का मतलब?
उर्दू शायरी से प्रेरित 'ताजदार-ए-हरम' का मतलब 'पवित्र स्थल का राजा' है। 'ताजदार-ए-हरम' को 1960 में साबरी ब्रदर्स ने गाया था। आतिफ असलम ने 2015 में कोक स्टूडियो में गाकर साबरी ब्रदर्स को श्रद्धांजलि दी थी। यह कव्वाली पैगंबर से की गई एक विनम्र प्रार्थना (फरियाद) है जिसमें उनसे दया की एक नजर, आध्यात्मिक सिफारिश और सांसारिक कठिनाइयों से राहत की गुहार लगाई गई है।
आतिफ असलम की ये कव्वाली उनकी आवाज में अमर हो गया। इसे न केवल पाकिस्तान, बल्कि भारत में भी खूब पसंद किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस गाने को लोग सुनकर कह रहे हैं, "सरहद पार टेंशन अपनी जगह, पर म्यूजिक का अपना ही सीन है।"
