Udta Teer Review: सही निशाने पर लगता है आयुष्मान-सारा का 'उड़ता तीर', 'धुरंधर' का कॉमिक पंच है फिल्म
Udta Teer Movie Review: धुरंधर जैसी धांसू स्पाई थ्रिलर के बाद सिनेमाघरों में अब एक हंसी-ठहाके वाली स्पाई फिल्म आई ...और पढ़ें

कैसी है आयुष्मान-सारा की उड़ता तीर? पढ़ें रिव्यू
HighLights
सिनेमाघरों में रिलीज हुई उड़ता तीर
इस स्पाई फिल्म में है भर-भरकर कॉमेडी
आयुष्मान-सारा की फिल्म ने क्या जीता दर्शकों का दिल?
अंकित सिंह तोमर, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में इस साल कई ऐसी फिल्में आईं जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी। कहीं भक्ति भाव दिखा तो कहीं एक्शन का शोर-शराबा और इस सबके बीच इस साल कॉमेडी का ऐसा तगड़ा पंच लगा है, जिसे देखने के बाद आप शायद सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि हां ये है कुछ अलग।
हाल ही में सिनेमाघरों में फिल्म आई है, जिसका नाम है 'उड़ता तीर' (udta teer)। अब ये तीर सही निशाने पर लगा है या नहीं, जानने के लिए पढ़िए पूरा रिव्यू
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म 'उड़ता तीर' (Udta Teer Movie Review) में आयुष्मान खुराना (ayushmann khurrana) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) मुख्य किरदारों में हैं। फिल्म की कहानी क्रॉस बॉर्डर स्टोरी है, जहां पाकिस्तान का एक जासूस भारत में आता है और फिर जो हंगामा होता है, बस वही फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म की कहानी की शुरूआत होती है विक्रांत उर्फ बिलाल अहमद से जिसका किरदार निभाया है आयुष्मान खुराना ने। पाकिस्तान के खूफिया एजेंट बिलाल को भारत में जासूसी के लिए भेजा जाता है।

बिलाल के साथ उसका साथी अश्फाक (सुहैल नैय्यर) और बाकी लोग भी भारत में होते हैं। इसके बाद बिलाल अपने दोस्त अश्फाक के साथ भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड यानि CTS में दाखिल होता है और यहां पर वो और उसका दोस्त अश्फाक यानि ध्रुव ऑफिसर बनकर बैठे होते हैं। बिलाल इसके बाद डिफेंस मिनिस्ट्री में काम करने वाली यामिनी (सारा अली खान) को अपने जाल में फंसा लेता है। यामिनी के साथ वो प्यार का नाटक करता है और दोनों तलाक की ओर आगे बढ़ते हैं।

लेकिन अपनी मां (सुप्रिया पिलगांवकर) के लिए दोनों प्यार का ढोंग रचते हैं। इसी बीच पाकिस्तान से जासूसी करने आए बिलाल की अचानक से याददाश्त चली जाती है और पूरा खेल यहीं से बिगड़ जाता है। बिलाल इसके बाद अपने ही देश पाकिस्तान का दुश्मन बन जाता है। वह भारत में मौजूद अपने ही साथियों को पकड़ने लगता है। बिलाल अब खुद को सच में भारतीय ऑफिसर विक्रांत समझने लगता है। उसके दोस्त और पाकिस्तानी हुकूमत भी ये देखकर हैरान रह जाती है। विक्रांत यानि बिलाल अब पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़ने लगता है।
उधर अश्फाक यानि ध्रुव और बाकी लोगों को पता है कि उसकी याददाश्त चली गई है। ऐसे में वो पूरी कोशिश करते हैं कि उसे सब याद आ जाए, मगर ऐसा नहीं हो पाता है। इसके बाद फिर कहानी में एक और ट्विस्ट आता है और फिर हंसी के ठहाकों के साथ कहानी एक और दिलचस्प मोड़ लेती है। अब बिलाल को क्या सबकुछ याद आया? बिलाल अब कैसे पाकिस्तानी हुकूमत को सच बताएगा या फिर इस सब में कुछ और झोल है? यही सब आपको फिल्म में देखने के बाद पता चलेगा।

कैसी है एक्टिंग?
आयुष्मान खुराना हर बार कुछ नया करते हैं। इस बार उन्होंने जासूस बनकर दर्शकों का दिल जरूर जीता है। वहीं सारा अली खान यामिनी के किरदार को अच्छे से जीती हैं। हालांकि फिल्म में सबसे ज्यादा सरप्राइज किया है दिवंगत अभिनेता मुकुल देव ने। फिल्म में मुकुल देव पाकिस्तानी आतंकवादी मकसूद अजहर के किरदार में हैं, जिन्होंने इस किरदार को इतना यादगार बनाया कि जिसने भी देखा वह हंस-हंसकर लोट-पोट हो गया।
मकसूद अजहर के कैरेक्टर को उन्होंने अच्छे से जिया है। वहीं राहुल बोस ने भी फिल्म में अपने किरदार से जान डाली है। उन्होंने एम.डी. बर्मन का किरदार अच्छे से किया है। पाकिस्तानी जर्नल मिर के किरदार में गुलशन ग्रोवर दिखे हैं, जिन्होंने खूब हंसी के बम फोड़े हैं। वहीं राम कपूर ने फिल्म में नियाजी का रोल किया, जो हंसाते भी हैं, तो वहीं डराते भी हैं।

ध्रुव यानि अश्फाक के किरदार में सुहैल नैय्यर बड़े सही लगे हैं। उन्होंने आयुष्मान के दोस्त का किरदार निभाया और वह जब-जब स्क्रीन पर हंसाकर गए। इसके अलावा भाभीजी घर पर हैं जैसे कल्ट शो में नजर आए सानंद वर्मा ने भी खूब हंसी के ठहाके लगाए हैं। ब्रजेंद्र काला, रघुबीर यादव और स्मिता तांबे जैसे किरदारों ने फिल्म को और मजेदार बनाया है।
कैसी है फिल्म?
अब भारत-पाकिस्तान और जासूसी पर कई फिल्में अबतक बनी हैं। इस साल धुरंधर का चार्म भी बॉक्स ऑफिस पर खूब दिखा है। हालांकि उड़ता तीर को धुरंधर का कॉमिक वर्जन कहना गलत नहीं होगा। एक तरफ जहां धुरंधर में गंभीर मुद्दा दिखा तो उड़ता तीर में इस बार गंभीर मुद्दे से इतर हंसी के ठहाके दिखे हैं, जहां क्लाईमैक्स एक सरप्राइज जरूर है। आमतौर पर स्पाई फिल्मों में कॉमेडी कम ही देखने को मिलती है, लेकिन उड़ता तीर उनसे अलग है।

फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा शुरूआत में कहानी को गढ़ने में वक्त लेता है, लेकिन इंटरवल से पहले तक कहानी अच्छी हो जाती है। वहीं इंटरवल के बाद कुछ वक्त के लिए फिल्म फिर से थोड़ी ढीली पड़ती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी और किरदार आपस में मेल खाते हैं आपको फिल्म और मजेदार लगने लगती है।
हालांकि फिल्म के कुछ सीन्स थोड़े ऊबाउ जरूर लगते हैं, जिन्हें हटाया जा सकता था। फिल्म के गाने कुछ खास नहीं हैं, लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है। डायलॉग्स भी ठीक-ठाक लिखे गए हैं और इन सबसे ऊपर इसमें बिना सिर-पैर वाली कॉमेडी भी मजेदार है, जो आपको जरूर हंसाएगी।
कैसा है राइटिंग-डायरेक्शन?
फिल्म को आकाश कौशिक ने डायरेक्ट किया है, तो वहीं उन्होंने ही फिल्म की कहानी भी लिखी है। आकाश कौशिक ने फिल्म की कहानी और डायरेक्शन दोनों के बीच अच्छा बैलेंस किया है। उन्हें पता है कि फिल्म को लिखते वक्त और पर्दे पर उतारते वक्त किन बातों का खास ध्यान रखना है। उन्होंने कॉमेडी के साथ एक्शन, ड्रामा, देशभक्ति और सस्पेंस को सही तरीके से पर्दे पर पेश किया है।

आतंकवाद, जासूसी, पाकिस्तान, इन सबको एक कॉमेडी का रूप देना, कहीं ना कहीं आसान नहीं है, लेकिन आकाश कौशिक ने ये बखूबी किया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ कॉमेडी से भरा हुआ है तो वहीं सेकेंड हाउ के मिड तक कहानी अपने कॉमेडी रूप में रहती है लेकिन जैसे कहानी आगे जाती है तब गंभीरता बढ़ती है। फिल्म का आइडिया दिलचस्प है, लेकिन कहीं-कहीं कहानी कंफ्यूज जरूर करती है।
फिल्म देखें या नहीं?
करण जौहर के धर्मा प्रोड्क्शन्स और सिख्या एंटरटेनमेंट ने साथ इस फिल्म को बनाया है। धुरंधर जैसी फिल्मों में जहां आतंकवाद को गंभीरता से दिखाया गया, वहां उड़ता तीर जैसी फिल्में इसे एक हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती हैं। आयुष्मान की एक्टिंग और राहुल बोस - मुकुल देव जैसे एक्टर्स की दमदार कॉमेडी ने इसे बेहतर जरूर बनाया है, तो इस फिल्म को आप सिनेमाघरों में जाकर जरूर देख सकते हैं।
