राहुल सोनी, मुंबई। जिस गायक या गायिका के कंपोज किए गीत को गुलज़ार ने लिखा हो तो जाहिर सी बात है उसके लिए वो गाना जीवन में बहुत महत्व रखेगा। एेसा ही कुछ हुआ है युवा गायिका रीवा राठौड़ (मशहूर गायक रूपकुमार राठौड़ और सुनाली राठौड़ की बेटी) के साथ जिनके एक नहीं बल्कि पूरे एलबम के पूरे छ: गीत मशहूर गीतकार गुलजार द्वारा लिखे गए हैं। गुलज़ार एेसे गिने चुने लेखकों में से एक रहे हैं जिन्होंने अपनी कलम के जादू से कई पीढ़ियों तक दर्शकों को दिलों पर राज किया है। गुरुवार मतलब 14 जून को रीवा के इस एलबम का पहला गीत ''मौला'' रिलीज़ किया गया है जिसको उन्होंने खुद कंपोज किया है, गाया है और साथ-साथ इसमें अभिनय भी किया है। जागरण डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने संगीत को लेकर अपने सफर और संगीत इंडस्ट्री को लेकर बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत -

गुलज़ार साहब के अल्फ़ाज़ों से आई जान

रीवा कहती हैं कि, मैं खुदके गाने लिखकर कंपोज करती हूं। एक दिन सोचा कि एक नया गाना बनाया जाना चाहिए। जो गाना लिखा उसे कम्प्यूटर में गुलज़ार के नाम से सेव किया था। मेरे मन में था कि इसे गुलज़ार साहब ही लिखें। एक दिन मैं उनके पास गई जिन्हें मैं बड़े पापा कहकर बुलाती हूं। मैंने उन्हें कंपोजिशन सुनाई तो वे बहुत खुश हुए। उन्होंने तारीफ भी की। गुलज़ार साहब ने कहा कि, मुझे पता नहीं था कि तुम एेसा इतना अच्छा कंपोज करती हो। यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैंने उनसे इस कंपोजिशन को अल्फ़ाज़ देने की गुजारिश की। तो वे बोले कि एक गाना क्यों पूरा एलबम बनाते हैं। इस बात पर मुझे यकीन नहीं हुआ लेकिन मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी।

जब आपका मन करे तब रियाज़ करें

रीवा मानती हैं कि, अमूमन लोगों का कहना होता है कि सुबह रियाज़ करना बेहतर होता है। हां यह सही बात है। लेकिन इस बारे में रीवा कहती हैं, मैं इस बात पर ज्यादा विश्वास रखती हूं, जब आपका मूड हो तब आप रियाज़ करेंगे तो ज्यादा फायदा होगा और आप जल्दी सीख सकेंगे। फिर चाहे वो कोई भी समय हो। रीवा बताती हैं कि, मैं अमूमन सूरज ढ़लते वक्त रियाज़ करना पसंद करती हूं। मौला गीत की कंपोजिशन के लिए सही धुन मुझे नहीं मिल रही थी। लेकिन रात को एक बजे बैठे-बैठे एक धुन दिमाग में आई और फिर वही फाइनल की। उसी समय धुन को रिकॉर्ड भी कर लिया था। रीवा कहती हैं कि, आपको किसी भी समय गिव अप नहीं करना चाहिए। क्योंकि संगीत में सही धुन को पकड़ने में समय लगता है और हर अच्छा काम समय मांगता है।


हिंदुस्तानी और इंग्लिश मिक्स

रीवा अपने हाल ही में रिलीज़ हुए गीत को लेकर कहती हैं कि, इसमें मैंने हिंदुस्तानी और इंग्लिश दोनों स्टाइल देने की कोशिश की है। इसमें इंग्लिश गाने का सिर्फ स्टाइल लिया गया है लेकिन अल्फ़ाज़ हिंदी ही रखे हैं। आजकल के गीतों में अंग्रेजी शब्दों के ज्यादा उपयोग होने को लेकर रीवा कहती हैं कि, यह कुछ गानों में अच्छा लगता है। सब गानों में यह अच्छा नहीं हो पाता है। मैं मानती हूं कि, हर गायक को अपना अस्तित्व नहीं छोड़ना चाहिए। हां एक्सपेरीमेंट करना चाहिए लेकिन अपनी स्टाइल को कभी नहीं भूलना चाहिए।

जिसके लिए डांट खाई उसके लिए मिली तालियां

रीवा बचपन को याद करते हुए कहती हैं कि, मैं जब चार साल की थी तब मीरा भजन गाया था। इस भजन की कुछ पंक्तियां मैं अच्छे से गा नहीं पा रही थी जिसके लिए पिताजी मुझे डांट रहे थे। एक समय मैं रो भी दी थी। लेकिन उन्होंने जब डांटा तो मैं अच्छे से परफॉर्म कर पाई और उन्हीं पंक्तियों को गाने के लिए मुझे खूब तालियां भी मिलीं। रीवा कहती हैं कि, पिताजी का सिखाने का तरीका थोड़ा स्ट्रिक्ट है लेकिन एक बार उनसे सीखने के बाद वो बात हमेशा याद रहती है और जीवन में हर कदम पर काम आती है। रीवा बताती हैं कि, जब पहली बार उन्होंने पिता को मौला गीता की कंपोजिशन को सुनाया तो उन्हें बहुत पसंद आया था।

आजकल लर्निंग प्रोसेस कम हो गई है

रीवा कहती हैं कि, आजकल युवा शास्त्रीय संगीत की तालिम कम ले रहे हैं। लेकिन यह बात समझना जरूरी है कि शास्त्रीय संगीत नीव है और अगर आपने इसकी तालीम ली है तो आप हर प्रकार का संगीत बना सकते हैं और अनुभव कर सकते हैं। आज की दुनिया में अब सब आसान भी हो गया है। यू ट्यूब पर इंटरनेशनल म्यूजिक को सुना जा सकता है। लेकिन जितना ज्यादा सीखेंगे उतना अनुभव ज्यादा होगा और उतना ही अच्छा परफॉर्म कर सकेंगे।

सिंगिंग और कंपोजिशन

रीवा ने इस गीत को कंपोज करने के साथ-साथ गाया भी है। साथ में वे इस वीडियो में नज़र भी आ रही हैं। एेसे में सिंगिंग और कंपोजिशन करने को लेकर रीवा ने बताया कि, यह बहुत कठिन होता है। अपने ही गाने को आवाज देना बहुत मुश्किल होता है। मैंने यही सोचकर इस गीत को आवाज दी कि यह मेरा गाना नहीं है। अगर मैं किसी दूसरे के गीत को आवाज दे रही होती तो कैसा करती। गायक का काम होता है कंपोजिशन में जान डाले। तो यही कोशिश यहां पर भी रही है। गायकी तो तालीम से आ जाती है लेकिन कंपोजिशन तो अपने अंदर की फीलिंग्स से आती है।

माइकल जैक्सन से है इंस्पायर्ड

रीवा बताती हैं कि, वे फिल्म इंडस्ट्री में प्रसिद्ध किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले की बहुत बड़ी फैन रही हैं और इन लीजेंड्स को सुनती आई हैं। वे मशहूर गायक हरिहरन के साथ लाइव शो भी कर चुकी हैं। आगे रीवा अपने गीत मौला को लेकर बताती हैं कि, यह गीत दरअसल माइकल जैक्सन से इंस्पायर्ड है। रीवा ने बताया, माइकल जैक्सन के लव सॉन्ग्स को ज्यादा लोग सुनते नहीं है लेकिन वे भी बहुत अच्छे हैं। अमूमन उनके डांसिंग सॉन्ग्स को ज्यादा देखा और सुना जाता है। तो मौला सॉन्ग माइकल जैक्सन के लव सॉन्ग्स से ही इंस्पायर्ड है।

सुर में गाने की कोशिश करें

संगीत की तालीम ले रहे युवाओं को रीवा का संदेश है कि वे सुर में गाने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें। शास्त्रीय संगीत सबसे पहले सीखें। जरूरी नहीं है कि आप शास्त्रीय संगीत पर ही फोकस करें। गजल भी गा सकते हैं। लेकिन बेसिक रियाज जरूरी है। सुर और पिच पर फोकस करें। कई बार फास्ट गानों में पिच अलग हो जाता है। तो जोश में सिंगर्स पिच छोड़ देते हैं जो कि नहीं होना चाहिए। आजकल अॉक्टो ट्यून आ गया है इसलिए कैसा भी गाया जाए सुर में लाया जा सकता है लेकिन यह गलत है। इससे आप कितने सुर में गा रहे हैं यह पता नहीं चल पाता है। दरअसल, यह सब तो लाइव में पता चलता है कि गायक का पिच क्या है और वो कितना अच्छा गा रहा है। इसलिए एेसा न हो इसके लिए सुर में गाना सीखना चाहिए।

मौका मिलेगा तो रोमांटिक सॉन्ग्स गाएंगी

रीवा कहती हैं कि, फिल्मों के गीतों को आवाज देने की इच्छा है और मौका मिलेगा तो वे जरूर गाएंगी। उन्होंने कहा, मैं रोमांटिक सॉन्ग्स को आवाज देना चाहती हूं। एेसा गाना हो जो दिलों को छू जाए। रीवा इन दिनों उस्ताद जाकिर हुसैन के साथ सिंगल कर रही हैं। इस साल यह लॉन्च होगा।

रीमेक्स में ओरिजिनेलिटी होना जरूरी

पूराने गीतों के रीमेक्स को लेकर रीवा कहती हैं, कुछ-कुछ गीतों के रीमेक्स बहुत अच्छे बनते हैं। सबसे अहम बात यह है कि ओरिजिनेलिटी होना बहुत जरूरी है। अगर यह नहीं होगा तो सॉन्ग अच्छा नहीं बन पाएगा। 

विरासत में मिला है संगीत

रीवा राठौड़ मशहूर गायक रूपकुमार राठौड़ और सुनाली राठौड़ की बेटी हैं। रीवा के दादाजी स्व. पंडित चतुर्भज राठौड़ थे जो कि मशहूर शास्त्रीय ध्रुपद गायन के लिए प्रसिद्ध थे। रीवा कहती हैं कि संगीत मुझे विरासत में मिला है और मेरी कोशिश होगी कि इसको और आगे तक ले जा सकूं जैसा मेरे माता-पिता और दादाजी ने किया है। 

By Rahul soni