मुंबई। हाल के वर्षों में ऐसी कई छोटी बजट की फ़िल्में आयी हैं, जिनकी कामयाबी ने सभी का ध्यान खींचा है। इसी कड़ी में पिछले महीने रिलीज़ हुई फ़िल्म रिस्कनामा भी है। लेखक-निर्देशक Aarun Nagar अरुण नागर अपनी फ़िल्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

बता दें कि रिलीज़ के बाद रिस्कनामा लगातार छठे सप्ताह भी सिनेमाघरों में टिकी हुई है। फ़िल्म से नवोदित कलाकार सचिन खारी डेब्यू कर रहे हैं। उनके अलावा शाहबाज़ ख़ान, प्रमोद मुथू जैसे मंझे हुए कलाकारों ने भी फ़िल्म में ज़बरदस्त भूमिका निभायी है। महिला किरदारों में गरिमा अग्रवाल और अनुपमा की उपस्तिथि ख़ास है। बिना किसी बड़े स्टारकास्ट के कोई फ़िल्म बना लेना और उसे रिलीज़ करा लेना इसमें किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा? इस सवाल के जवाब में फ़िल्म के लेखक-निर्देशक अरुण नागर कहते हैं कि- ''नये लोगों के लिए आज भी सिनेमा की राहें आसान नहीं हैं। स्क्रिप्ट की तैयारी से लेकर प्रोडक्शन हर मोर्चे पर आप खुद अपने दम पर चीज़ें कर सकते हैं लेकिन, जब आप रिलीज़ के लिए जाते हैं तो कोई भी वितरक फ़िल्म नहीं स्टारकास्ट देखता है, बजट और लोकेशन देखता है। लेकिन, हमने हार नहीं मानी। कहते हैं न कि जहां चाह तो वहां राह। आखिर पीवीआर ने हमारी फ़िल्म रिलीज़ की और इसी शुक्रवार फ़िल्म अपने छठे सप्ताह में प्रवेश कर गयी है और इस रिस्पॉन्स से हमारी पूरी टीम इतनी उत्साहित है कि अब हमने तय किया है कि बड़े स्टारकास्ट को लेकर कोई फ़िल्म जल्द ही शुरू करेंगे। ''

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इन दिनों भारतीय फ़िल्मों से गांव और गांव के लोग पूरी तरह से गायब हैं। लेकिन, रिस्कनामा की पूरी कहानी एक गांव के केंद्र में ही रखकर तैयार की गयी है। रियल लोकेशन और असली ग्राम पंचायत को अपनी फ़िल्म का हिस्सा बना लेने वाले अरुण नागर इससे पहले गुर्जर आंदोलन को केंद्र में रखकर फ़िल्म बना चुके हैं। उस फ़िल्म में लीड रोल में भी अरुण ही नज़र आये थे।

बता दें कि अरुण नागर एक लेखक-डायरेक्टर और निर्माता के अलावा एक ज़बरदस्त एक्टर भी हैं। वो दूरदर्शन के अलावा स्टार टीवी समेत कई चैनलों पर अलग-अलग धारावाहिकों में भी नज़र आ चुके हैं।

Edited By: Hirendra J

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