मुंबई। इतिहास में विख्यात बैटल ऑफ़ सारागढ़ी पर बनी अक्षय कुमार की फ़िल्म केसरी (Kesari) बॉक्स ऑफ़िस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। यह फ़िल्म होली के दिन 21 मार्च को रिलीज़ हुई थी और इत्तेफ़ाक़ से 2 दिन बाद 23 मार्च को देश के अमर क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह का Shaheed Diwas मनाया जा रहा है। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि केसरी का नायक ईशर सिंह जहां ब्रिटिश हुकूमत के लिए अदम्य साहस और बलिदान का मुज़ाहिरा करता है, वहीं सरदार भगत सिंह (Bhagat Singh) का पूरा जीवन ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ लड़ाई में बीता।  

बहरहाल, आज़ादी की लड़ाई में अपनी जान की आहुति देने वालों की फ़ेहरिस्त काफ़ी लंबी है, मगर इनमें सरदार भगत सिंह की जगह सबसे ख़ास है। आज़ादी, देश और समाज को लेकर भगत सिंह की विचारधारा ने उन्हें शहीदे-आज़म बना दिया। क्रांतिकारियों में फ़िल्मकारों को जितना प्रभावित भगत सिंह ने किया है, उतना शायद ही किसी दूसरे किरदार ने किया हो। इसीलिए सिनेमाई पर्दे पर अलग-अलग दौर में भगत सिंह की महान गाथा दिखायी जाती रही है। 

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव में हुआ था। उन्हें सोशलिस्ट क्रांतिकारी माना जाता था। देश की स्वाधीनता के लिए अंग्रेजों से लड़ते हुए भगत सिंह महज़ 23 साल की उम्र में 23 मार्च 1931 को शहीद हो गये। इतनी कम उम्र में उनकी शहादत और विचारधारा नौजवानों की प्रेरणा का सबब बनी। भगत सिंह की राजनीतिक सोच आज भी प्रासंगिक हैं। यही वजह है कि हिंदी सिनेमा का पर्दा इस महान क्रांतिकारी की आभा से कभी उभर नहीं पाया और सिनेमा के अलग-अलग दौर में भगत सिंह की कहानी सिल्वर स्क्रीन पर आती रही।

 

हिंदी सिनेमा का इतिहास उठाकर देखें तो सरदार भगत सिंह पर पहली फ़िल्म आज़ादी के 7 साल बाद 1954 में ही आ गयी थी। इस ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म का नाम था 'शहीदे-आज़म भगत सिंह'। इस फ़िल्म को जगदीश गौतम ने डायरेक्ट किया था, जबकि प्रेम अदीब जयराज और स्मृति बिस्वास ने लीड रोल्स निभाये थे। जयराज चंद्रशेखर आज़ाद के रोल में थे तो प्रेम ने भगत सिंह का किरदार प्ले किया था।

1963 में शम्मी कपूर पर्दे पर शहीद भगत सिंह बनकर आये। शहीद भगत सिंह शीर्षक से बनी फ़िल्म को केएन बंसल ने डायरेक्ट किया था, जबकि शकीला, प्रेमनाथ, उल्हास और अचला सचदेव ने मुख्य किरदार निभाये थे।

इसके दो साल बाद 1965 में मनोज कुमार की शहीद बनायी, जिसमें उन्होंने ख़ुद सरदार भगत सिंह का रोल निभाया। इस फ़िल्म को एस राम शर्मा ने डायरेक्ट किया था। प्रेम चोपड़ा और अनंत पुरुषोत्तम ने सहयोगी किरदार अदा किये। शहीद बेहद कामयाब रही और कई अवॉर्ड्स से नवाज़ी गयी।

1974 में भगत सिंह पर सुरिंदर कोहली ने 'वतन के वास्ते- अमर शहीद भगत सिंह' बनायी। इस फ़िल्म में सुनील दत्त के छोटे भाई सोम दत्त ने भगत सिंह का किरदार प्ले किया था, जबकि दारा सिंह भी एक बेहद अहम रोल में थे। हालांकि ये भगत सिंह पर बनी यादगार फ़िल्मों में शामिल नहीं है और बहुत कम लोग इसके बार में जानते हैं।

 

कई दशक बाद 2002 में ये महान किरदार पर्दे पर फिर लौटा, वो भी एक नहीं तीन-तीन फ़िल्मों के साथ। 2002 में भगत सिंह पर तीन फ़िल्में आयीं। गुड्डू धनोआ डायरेक्टेड '23 मार्च 1931- शहीद' में बॉबी देओल भगत सिंह बने। इसी फ़िल्म में सनी देओल ने चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका निभायी। राजकुमार संतोषी निर्देशित 'द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह' में अजय देवगन ने सरदार भगत सिंह का किरदार निभाया। इस फ़िल्म के लिए अजय को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। भगत सिंह पर तीसरी फ़िल्म आयी 'शहीदे-आज़म', जिसमें सोनू सूद ने अमर क्रांतिकारी का किरदार निभाया। इस फ़िल्म को सुकुमार नायर ने डायरेक्ट किया था।

राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 2006 की फ़िल्म 'रंग दे बसंती' वैसे तो तीन दोस्तों की कहानी है जो राजनीतिक भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एलाने-जंग करते हैं, मगर फ़िल्म के स्क्रीनप्ले में चारों मुख्य किरदारों की तुलना देश के चार महान क्रांतिकारियों से की गयी। इनमें आमिर ख़ान- चंद्रशेखर आज़ाद, सिद्धार्थ- भगत सिंह, शरमन जोशी- राजगुरु और कुणाल कपूर- अशफ़ाक़उल्ला खां के रूप में दिखे।

Posted By: Manoj Vashisth

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