मुंबई। 14 मार्च को आमिर ख़ान का बर्थडे होता है। इस साल आमिर अपना 53 वां जन्मदिन मना रहे हैं। आमिर इन दिनों अपनी आने वाले फ़िल्म ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तां’ के लिए चर्चा में हैं। आमिर ने अपने 35 साल के करियर में बहुत कुछ ऐसा हासिल किया है जो उन्हें भीड़ से अलग एक सितारा बनाता है!

आमिर के जन्मदिन के मौके पर उनके एक ख़ास दोस्त और कई फ़िल्मों में को-स्टार रहे दलीप ताहिल ने आमिर के बारे में जागरण डॉट कॉम से बहुत कुछ शेयर किया। दलीप कहते हैं कि “आमिर को मैंने उनकी पहली पिक्चर से देखा है! ‘क़यामत से क़यामत तक’ के जिस रोल से मेरा करियर चल पड़ा वो आमिर के साथ ही रहा।”

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आमिर के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए दलीप ताहिल ने बताया कि- “जब मैंने सबसे पहले आमिर को देखा था नासिर साहब के ऑफिस में तो मुझे आज भी याद है कि तीन लोग बैठे थे कोने में। मंसूर, बीच में एक लाल-लाल गाल वाला गोरा सा बच्चा जो किसी स्कूल के छात्र की तरह लग रहा था और उसके बगल में बैठी थी नुशरत जो मंसूर की बहन और आमिर की कजिन है। नासीर साहब ने जब फ़िल्म की नैरेशन दी तब उसके बाद मैंने नासिर साहब से पुछा कि डायरेक्टर कौन है? अपने बेटे मंसूर ख़ान की तरफ हाथ दिखा कर उन्होंने बताया मंसूर ख़ान! फिर मैंने कहा कि हीरो? तभी आमिर जो बीच में बैठे थे उन्होंने स्कूल के छात्र की तरह अपना हाथ उठाते हुए कहा- यस सर! इतना क्यूट था वो! लेकिन, जब उन्हें पता चला कि वो स्कूल में नहीं हैं तो उन्होंने अपना हाथ नीचे किया!”

दलीप ताहिल बताते हैं कि बाद में शूटिंग के दौरान पहले दिन से ही उन्हें मालुम चल गया था कि यह लड़का सिनेमा के बारे में सोचता है। स्क्रिप्ट की बारीकियों को समझता है। दिलीप के मुताबिक ये गलत है कि लोग बोलते हैं कि आमिर अपने डायरेक्टर्स को बहुत टोकते हैं! दरअसल यह उनका स्वभाव है। कहानी के साथ घुल-मिल जाते हैं आमिर।”

दलीप आगे बताते हैं कि आमिर हमेशा बेचैन से रहते थे। वो कहते हैं- “‘क़यामत से क़यामत तक’ और ‘गुलाम’ के बीच हमने चार, पांच फ़िल्में साथ में की और जिनमें कैरेक्टर लगभग एक जैसा होता था और तब आमिर का फ्रस्ट्रेशन दिखता था। स्टार तो वो बन गए थे, फ़िल्में साइन कर ली हैं तो करना ही था। लेकिन, उनको हमेशा एक बेचैनी रहती रहती थी। अंत में जब हम ‘इश्क’ कर रहे थे, फ़िल्म के डायरेक्टर इंद्र कुमार ने एक दिन आमिर को कहा कि ‘मेरे बाप तू प्लीज़ जैसा मैं बोल रहा हूं वैसा कर ले, इसके बाद तू चाहे तो अपनी पिक्चर बना लेना यार! जो भी करना है तुझको वो जाकर कर! लेकिन, इस पिक्चर में मैं जैसे कह रहा हूं तू वैसे कर ले, मैं तेरे हाथ जोड़ता हूं’। लेकिन, ये बात आमिर के मन में बैठ गयी कि उन्हें अपनी फ़िल्म बनानी ही है। किसी और की फ़िल्म में एक हद तक आप सजेस्ट कर सकते हैं। लेकिन, अपनी फ़िल्म में आपको एक फ्रीडम होता है।”

दलीप बताते हैं कि आमिर की एक यात्रा रही है जो आज अपने चरम पर पहुंची है। ‘लगान’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘दंगल’, ‘पीके’ आमिर जो भी करता है वो इतना सोच समझ कर करता है कि वो बेस्ट ही होता है!  दलीप कहते हैं कि “एक जामने में ओपेक्स क्यूब आता था जो आमिर बैठ कर किया करते, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वो लगे रहते और सोल्व भी कर देते! आमिर छोड़ेंगे नहीं, अगर आमिर ने कोई चीज़ पकड़ ली तो उसको कर के ही रहेंगे!”

आमिर के कमिटमेंट की बात करते हुए दलीप बताते हैं कि- “आमिर जो भी फ़िल्म बनायेंगे वो अलग होगा! ‘लगान’ जब बन रही थी तब रिपोर्ट्स आ रहे थे कि पता नहीं गुजरात में ये कर क्या रहे हैं लोग? अजीब से धोती-वोती पहन के ये क्रिकेट खेल रहे हैं! और दस-दस, पंद्रह-पंद्रह दिन की क्रिकेट की शूटिंग होती है और गेंद के पीछे कैमरा चला जा रहा है। लोग मजाक बनाते थे। समझ नहीं पा रहे थे कि ये चक्कर क्या है? आमिर सठिया गया है? लेकिन, जब ‘लगान’ आई तो आप सब जानते हैं वो फ़िल्म एक इतिहास बना गयी।

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दलीप कहते हैं कि- “मेरा सौभाग्य है कि मुझे आमिर जैसे एक्टर के साथ काम करने का मौका मिला। ‘हम हैं राही प्यार के’ के समय तो आमिर मेरे घर आ गया कि तुम्हें यह रोल करना ही है। मैंने कहा कि मैं नहीं कर सकता यह रोल? लेकिन, उन्होंने मुझे मना लिया, आमिर मनाना जानते हैं।”

By Hirendra J