अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। बॉलीवुड फ़िल्म निर्माता करण जौहर ने हाल ही में मराठी सुपरहिट फ़िल्म 'सैराट' की हिंदी रीमेक बनाई थी जिसमें उन्होंने श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर और शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर को कास्ट किया था। इस फ़िल्म को लोगों ने काफी पसंद किया था मगर, जिसने मराठी फ़िल्म 'सैराट' देखी थी वो इस हिंदी रीमेक से ज्यादा खुश नहीं थे। 'सैराट' मराठी सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी फ़िल्मों में से एक हैं और इस फ़िल्म ने मराठी सिनेमा को  काफी फायदा पहुंचाया है। 

हाल ही में मुंबई में हुए दैनिक जागरण फ़िल्म फेस्टिवल में मराठी भाषी फ़िल्म 'चुम्बक' के डायरेक्टर संदीप मोदी ने भी यही कहा है कि 'सैराट' की वजह से लोगों का मराठी फ़िल्म देखने का नज़रिया बदला है। नेशनल फ़िल्म अवार्डी संदीप कहते हैं कि मेरे ख़याल से मराठी सिनेमा पूरी तरह से इंडिपेंडेंट हैं, हर फ़िल्म में मेकर्स का अपना जुगाड़ है। चीज़ें सुलझी हुई और नियमबद्ध नहीं हैं मगर, 'सैराट' की वजह से काफी फायदा हुआ है और लोग अब फ़िल्म मेकिंग को भी सीरियस लेने लगे हैं। इस फ़िल्म के बाद ही लोगों का ध्यान मराठी सिनेमा की तरफ गया है।

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संदीप ने इस फेस्टिवल में फ़िल्म मेकिंग की आज़ादी के बारे में भी बात की और कहा कि मराठी सिनमा में फ़िल्म निर्माता ही सबकुछ है। साल भर में कम से कम 150 फ़िल्में बनती हैं जिसमें से 75 प्रतिशत फ़िल्में पूरी तरह से इंडिपेंडेंट होती हैं। लेकिन हर फ़िल्म मेकर का लालच है कि उसकी ऑडियंस कमर्शियल की तरह हो। अब भी कहीं ना कहीं लोग डिस-ऑर्गेनाइज़्ड हैं।

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संदीप ने मराठी फ़िल्मों के हिट होने का क्रेडिट पूरी तरह से ऑडियंस को दिया है। वो कहते हैं, " हमारे यहां एक नया डेवलपमेंट हुआ है और इसका पूर क्रेडिट मैं हमारी ऑडियंस को देना चाहूंगा। सिनेमा सालों से ऐसा ही बना रहा था, लेकिन अब लोगों ने इसे अपनाया है। यह एक तरह की हवा चली है मराठी सिनेमा में। हम लोग अब ये फील कर रहे हैं कि बड़े स्टार की फ़िल्म 100 करोड़ का बिज़नस करेगी और 'स्त्री' फ़िल्म जैसा कंटेंट भी लोग पसंद करेंगे। हमारी ऑडियंस अब अच्छा डिमांड कर रही हैं।"

Posted By: Shikha Sharma