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    Interview: ओटीटी पर बोलीं अभिनेत्री नित्या मेनन- 'डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भाषाई दीवारों को तोड़ दिया है'

    साल की शुरुआत में घर में अकेली थी। मैं नए साल पर कुछ नया करने के बारे में नहीं सोचती। मैं योजनाबद्ध तरीके से कोई काम नहीं करती हूं। मैं फ्लो के मुताबिक ही चलती जाती हूं। मैं आर्टिस्ट हूं अपने काम को एंजॉय करती हूं।

    By Vaishali ChandraEdited By: Updated: Fri, 21 Jan 2022 12:26 PM (IST)
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    Nitya Menon social media post image, Instagram

    स्मिता श्रीवास्तव मुंबई। वेब शो ‘ब्रीद- इनटू द शैडोज’ में अभिनय के लिए सराहना पाने के बाद अब उसके तीसरे सीजन में भी नजर आएंगी अभिनेत्री नित्या मेनन। सोनी लिव पर रिलीज तमिल फिल्म ‘स्काईलैब’से वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख चुकी हैं। अभिनेत्री से खास मुलाकात के कुछ अंश,

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    नए साल पर क्या लक्ष्य तय किए हैं?

    मुझे नहीं याद कि मैंने नए साल पर कभी कोई रिजोल्यूशन लिया हो। मैंने नए साल के पहले दिन घर शिफ्ट किया था तो (हंसते हुए) साल की शुरुआत में घर में अकेली थी। मैं नए साल पर कुछ नया करने के बारे में नहीं सोचती। मैं योजनाबद्ध तरीके से कोई काम नहीं करती हूं। मैं फ्लो के मुताबिक ही चलती जाती हूं। मैं आर्टिस्ट हूं, अपने काम को एंजॉय करती हूं।

    ‘स्काईलैब’ से निर्माता बनने का विचार कैसे आया?

    उसकी कहानी मुझे भा गई थी। ऐसा लगा कि अगर मैं इसके प्रोडक्शन का हिस्सा बनी तो इसे बनाना आसान हो जाएगा। मेरी दिलचस्पी यही थी कि यह कहानी दर्शकों तक पहुंचे, वरना प्रोडक्शन में आने की कोई योजना नहीं थी। मैं इसमें एक्टिंग भी कर रही थी तो फोकस उस पर ही था। सेट पर रहने के दौरान प्रोडक्शन के कार्यों से ज्यादा नहीं जुड़ी। शूटिंग पूरी होने के बाद ज्यादा जिम्मेदारियां आती हैं तो उन्हें डील करना पड़ता है। अगर आपमें सिनेमा को लेकर जुनून है, कुछ खास तरह का सिनेमा बनाना चाहते हैं तो प्रोडक्शन इसका सबसे सशक्त माध्यम है। मेरे लिए यह अच्छा अनुभव रहा।

    इस फिल्म में आप पत्रकार की भूमिका में हैं। आपने पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकार बनने का सपना पूरा हुआ इस किरदार से?

    मैंने पत्रकार बनने के बारे में सोचा था, इसलिए पत्रकारिता की पढ़ाई की। हालांकि बाद में उसमें करियर बनाने का विचार पीछे छूट गया। जब ‘स्काईलैब’ में यह किरदार निभाने की बात आई तो मुझे वह भा गया। गौरी का जो किरदार है, वह प्रोफेशन से ज्यादा उसकी मासूमियत पर केंद्रित है।

    आपने तब्बू के साथ बतौर बाल कलाकार काम किया था...

    (बीच में सवाल को काटते हुए) मैंने सिर्फ एक फिल्म में बतौर बाल कलाकार काम किया था। इस वजह से बाल कलाकार का टैग मुझे अच्छा नहीं लगता है। उस समय मैं सात साल की थी। मुझे पता नहीं था कि तब्बू कितनी बड़ी अभिनेत्री हैं। बाद में उन्हें ‘इरूवर’ समेत कई फिल्मों में देखा। वह बेहतरीन कलाकार हैं। अब जब उनसे मिलूंगी तो जरूर बताऊंगी कि मैं उनकी बड़ी फैन हूं।

    डिजिटल प्लेटफार्म ने क्षेत्रीय कलाकारों की मुश्किलों को आसान कर दिया है... सौ प्रतिशत। ‘ब्रीद’ के निर्देशक मयंक शर्मा ने मेरी साउथ की कुछ फिल्में देखी थीं। उन्होंने भाषाई दिक्कतों को नकारते हुए कहा कि मुझे आप इस शो में चाहिए। डिजिटल प्लेटफार्म ने भाषाई दीवारों को तोड़ दिया है। फिल्मों की रिलीज की दिक्कतें भी आसान हुई हैं।

    ‘मिशन मंगल’ की रिलीज के बाद कोविड आ गया। क्या आपको फिल्म की सफलता का फायदा मिला?

    कोरोना की वजह जो हुआ सबके सामने है। दो साल बाद लोग फिर से काम पर लौट रहे हैं। जो होना था हो गया, मुझे उससे कोई शिकायत नहीं है।

    ‘ब्रीद 3’ में आपके किरदार में कितना बदलाव देखने को मिलेगा? साउथ और हिंदी इंडस्ट्री में संतुलन बनाकर चल रही हैं?

    दूसरे सीजन को काफी पसंद किया गया था। तीसरे सीजन में मेरे किरदार आभा को और खूबसूरती से लिखा गया है। इस बार मेरा किरदार काफी सशक्त होगा। बहरहाल, मैं ऐसा नहीं सोच रही हूं कि मुझे साउथ और हिंदी फिल्मों में संतुलन बनाकर चलना है। मैं कई भाषाओं में बात कर सकती हूं तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि यही करना है। बतौर कलाकार मैं कहीं भी काम करने के लिए तैयार हूं, बशर्ते प्रोजेक्ट अच्छा हो।

    आप तमिल, तेलुगु, मलयायम, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा का हिस्सा हैं। हर इंडस्ट्री को कैसे डिफाइन करेंगी?

    हर इंडस्ट्री में कुछ न कुछ फर्क है। कल्चर का फर्क है या कोई इंडस्ट्री ज्यादा कमर्शियल है। हालांकि मैं आसानी से किसी भी संस्कृति में ढल जाती हूं। मुझे वहां पर घर जैसा ही लगता है। मुझे बस यही दिखता है कि मेरे निर्देशक और सहकलाकार काफी क्रिएटिव हैं।