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डायरेक्टर जो था स्वतंत्रता सेनानी, Shammi Kapoor को बनाया हिट; रानी-काजोल के दादा ने सिनेमा को दीं कल्ट फिल्में

Published: Wed, 20 May 2026 04:08 PM (IST)

सुबोध मुखर्जी हिंदी सिनेमा के एक प्रतिष्ठित निर्माता-निर्देशक थे, जिन्होंने देव आनंद और शम्मी कपूर जैसे सितारों को सफलता दिलाई। ...और पढ़ें

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सुबोध मुखर्जी (Subodh Mukharjee) हिंदी सिनेमा के एक बेहद प्रतिष्ठित और सफल निर्माता-निर्देशक थे। 1950 और 1960 के दशक में उन्होंने बॉलीवुड को कई बेहतरीन और यादगार फिल्में दीं। उन्हें देव आनंद (Dev Anand) और शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) जैसे महान अभिनेताओं के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का श्रेय दिया जाता है।

वह बॉलीवुड के मशहूर 'मुखर्जी परिवार' से ताल्लुक रखते थे। दिग्गज निर्माता शशधर मुखर्जी उनके बड़े भाई थे और अभिनेता जॉय मुखर्जी उनके भतीजे थे। आज के दौर की प्रसिद्ध अभिनेत्रियां काजोल और रानी मुखर्जी भी इसी खानदान से हैं। सुबोध मुखर्जी रानी और काजोल के दादा लगते थे।

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झांसी में हुआ था जन्म

सुबोध मुखर्जी का जन्म 14 अप्रैल 1921 में उत्तर प्रदेश के झांसी में हुआ था। वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जिन्हें तीन महीने जेल में बिताने पड़े। उनके बड़े भाई शशधर मुखर्जी ने उन्हें राष्ट्रवादी आंदोलन से दूर कर फिल्म निर्माण में लगा दिया। उन्होंने एक सहायक निर्देशक और लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया।

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सुबोध मुखर्जी की पॉपुलर फिल्में

उन्हें स्वतंत्र निर्देशक के रूप में पहली फिल्म मुनीमजी का निर्देशन करने का मौका मिला जोकि साल 1955 में रिलीज हुई। यह फिल्म बेहद सफल रही। किशोरकुमार द्वारा गाया गया गीत जीवन के सफर में राही सुपरहिट हुआ। उनकी अगली निर्देशित फिल्म पेइंग गेस्ट (1957) थी, जो एक बार फिर हिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का बैनर एसएमपी (SMP) सुबोध मुखर्जी प्रोडक्शंस शुरू किया। इस प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म 'लव मैरिज' थी, जिसमें देव आनंद और माला सिन्हा ने अभिनय किया था।

यह उनके निर्देशन में बनी लगातार तीसरी फिल्म थी और तीनों ही हिट रहीं। उनके निर्देशन और प्रोडक्शन हाउस के तहत अगली फिल्म 'जंगली' थी, जिसमें शम्मी कपूर ने अभिनय किया था। यह फिल्म सुपर हिट रही। इसके बाद से वो बॉलीवुड के पॉपुलर फिल्म निर्माताओं में से एक बन गए।

Shammi

ब्लड कैंसर से हुआ निधन

उन्होंने अपने करियर में 8 फिल्मों का निर्माण और 9 फिल्मों का निर्देशन किया। 70 और 80 के दशक में उनकी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पाईं। उनकी आखिरी दो फिल्में तीसरी आंख (1982) और उलटा सीधा (1985) थीं। सुबोध मुखर्जी का 21 मई 2005 को ब्लड कैंसर की वजह से निधन हो गया।

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