मनोज खाडिलकर- पराग छापेकर, मुंबई। सिंघम और गोलमाल जैसी सीरीज़ करने वाली अजय देवगन ने हाल के वर्षों में दिल तो बच्चा है जी और अतिथि तुम कब जाओगे जैसे लाईट-हार्टेड और व्यंग्य से भरी फिल्में भी की है। वो इसे टेस्ट बदलने के साथ काम का हिस्सा भी मानते हैं। इस शुक्रवार को उनकी फिल्म दे दे प्यार दे आ रही है, जिसमें रकुल प्रीत और तब्बू का भी अहम् रोल है l अजय और रकुल ने इस फिल्म को लेकर जागरण डॉट कॉम से ख़ास बात की है।

सवाल – दे दे प्यार दे ! प्यार मांगने की जरुरत इसलिए तो नहीं पड़ी क्योंकि ये बे-मेल उम्र की मोहब्बत का मामला है ?

अजय – नहीं ऐसा नहीं है। फिल्मों की सारी कहानियां हमारे- आपके जीवन का हिस्सा होती हैं। समाज से ही उभर कर आती हैं। फिल्मों में इससे पहले भी एज के डिफ़रेंस पर रोमांटिक फिल्में बनी हैं। हम सब कई ऐसे लोगों को भी जानते हैं जो अपने जीवन में पार्टनर के उम्र में गैप होने के बाद भी खुशहाल हैं। तो इसमें को अचम्भा नहीं है। और फिल्म ने तो तब्बू के किरदार को भी हमारे (अजय-रकुल) प्यार से प्रॉब्लम नहीं है।

रकुल – दरअसल ये थोड़ी से अलग रोमांटिक स्टोरी है l हां कुछ ऐसी बातें हैं जिसे आप फिल्म में देखने के बाद थोड़ा सरप्राइज़ हो सकते हैं l

सवाल – रकुल, साउथ में सुपरहिट होने के बाद फिर से बॉलीवुड में आना इस फिल्म की कहानी की वजह से या बड़े स्टार्स के साथ काम करना था ?

रकुल – मैं बॉलीवुड से ही साऊथ में गई थी। यहां फिल्म यारियां करने के बाद। और वहां करीब 15-16 फिल्में की। अब वापस आई हूं। फिल्मों को लेकर ऐसी कोई प्राथमिकता नहीं है और न ही बंधन। जब इस फिल्म का ऑफर मुझे आया तो मुझे काफ़ी इंट्रेस्टिंग लगा। 50 की उम्र का आदमी और 26 की उम्र की लड़की के बीच भी प्यार हो सकता है लेकिन फिल्म में बाद में जो ट्विस्ट हैं वो मजेदार हैं। रीयल लाइफ़ में तो अभी मैं किसी के प्यार में नहीं हूं लेकिन अगर कभी हुई भी तो रिलेशनशिप में टाइम पास नहीं कर सकती।

सवाल – आजकल रियलिस्टिक स्टोरीज का दौर है। छोटे बजट में ऐसी कहानियां हिट जा रही है तो क्या माना जाय कि वो स्टार पॉवर और लार्जर देन लाइफ़ सिनेमा का टेस्ट ख़त्म हो रहा है?

अजय – नहीं ऐसा नहीं है। ये समय की मांग है। हमें भी वैसा ही करना पड़ता है जैसा दर्शक चाहता है। असल ज़िंदगी के हीरो और ऐसी कहानियां अब लोगों को आकर्षित करती हैं। अब जैसे मैं बधाई हो के निर्देशक अमित शर्मा की फिल्म कर रहा हूं जो सैय्यद अब्दुल रहीम का बायोपिक है। वो देश के जाने माने फुटबाल खिलाड़ी और राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कोच रहे है और उनके संघर्ष की ऐसी कहानी है जो लोगों को चौंका देगी।

सवाल – सोशल मीडिया आज जीवन का एक हिस्सा बन गया है लेकिन नामी लोगों को इसके वार से अक्सर जूझना पड़ता है। कई बार तो लोग कहते हैं कि अब अति हो गई है और ये मीडियम एक दिन ब्लास्ट करेगा। क्या आपको इससे कोई परेशानी होती है?

अजय – पहली बात तो ये कि सोशल मीडिया रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। जैसे आपकी लाइफ़ में टीवी, फ्रीज़ और वाशिंग मशीन की जरुरत है, ठीक वैसे ही सोशल मीडिया की भी। सबका अपना अपना नज़रिया होता है और इसे हैंडल करने का तरीका भी। जितनी जरुरत उतना ही इस्तेमाल करना चाहिए। रही बात बॉलीवुड पर पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस की, तो वो तो हमेशा से ही रहा है। इसमें कोई चौंकने वाली बात तो है नहीं। जो जिस विचारधारा का है, उसी की ही बात करेगा न।

रकुल – मुझे सोशल मीडिया से कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन मैं अपनी लाइफ़ से जुड़े हर पल को पब्लिक नहीं कर सकती। कुछ लोग होते हैं जो, कब क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं, क्या खा रहे हैं सब बता देतें हैं लेकिन मुझसे ये नहीं हो सकता।

सवाल – अजय, तानाजी- द अनसंग वारियर को लेकर अभी क्या स्थिति है?

अजय – फिल्म तेज़ी से बन रही है l अगले साल दस जनवरी को रिलीज़ करने की डेट है और हम समय पर फिल्म रिलीज़ करेंगे। योद्धा की फिल्म है तो शूटिंग में बहुत सारे टेक्निक्स वगैहरे का भी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

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Posted By: Manoj Khadilkar