नई दिल्ली, जेएनएन। Bhopal Gas Tragedy In Films: 2-3 दिसंबर की दरम्यानी वो रात, जिसे शायद ही भोपाल कभी भूल पाए। इस रात आज से 38 साल पहले यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) से कीटनाशक गैस के रिसाव ने कई हजारों लोगों की जान लील ली थी। इस जहरीली गैस रिसाव ने उस रात ही नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों को अपने आगोश में ले लिया था। उस रात के खौफनाक मंजर और त्रासदी पर बनी फिल्मों में इस दर्द को बखूबी रूप से दिखाया गया है। आइए जानते हैं ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में...। 

भोपाली

साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म वैन मैक्सिमिलियन कार्लसन द्वारा निर्देशित ये डॉक्यूमेंट्री बेस्ड फिल्म भोपाल गैस कांड के बाद जीवित बचे लोगों पर बेस्ड है जो उस खौफनाक रात की पीड़िणा के बारे में बात करती है। ये डॉक्यूमेंट्री गैस के रिसाव में दोषियों के खिलाफ पीड़ितों की जंग और न्याय की मांग को दिखाती है। 

भोपाल एक्सप्रेस

भोपाल गैस कांड की कहानी पर आधारित महेश मथाई की फिल्म में एक नवविवाहित जोड़े की कहानी को दिखाया गया है, जहां से उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है। साल 1999 में रिलीज हुई इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कंपनी के अधिकारियों में मजदूरों की परवाह किए बिना सुरक्षा अलार्म को बंद कर दिया था। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों में मुख्य भूमिका निभाई है।

भोपाल: ए प्रेयर ऑफ रेन

साल 2014 में रिलीज हुई फिल्म भोपाल ए प्रेयर ऑफ रेन की कहानी कंपनी में जहरीली गैस का रिसाव से होने वाली परेशान पर बेस्ड है, फिल्म में खौफनाक मंजर की कहानी कपंनी में काम कर रहे एक मजदूर की आंखों में जलन से होती है। गैस के रिसाव से होने वाली परेशानी से बचने के लिए पीड़ित मजदूर और आस-पास के लोग बारिश की प्रार्थना करते हुए दिख रहे हैं। रवि कुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में हॉलीवुड अभिनेता मार्टिन शीन, काल पेन, मिशा बार्टन और राजपाल यादव ने मुख्य भूमिका निभाई है।

वन नाइट इन भोपाल

बीबीसी द्वारा बनाई इस डॉक्यूमेंट्री में भोपाल गैस त्रासदी से पीड़ितों के उस रात के भयावय मंजर को उन्हीं की जुबानी पर्दे पर उतारा गया है।

संभावना

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के दो मेडिकल विद्यार्थियों द्वारा शूट की ये शॉर्ट फिल्म एक क्लिनिक पर बेस्ड हैं, जहां पीड़ितों को मुफ्त में इलाज मुहैया कराया जा रहा था। जोसेफ मालोन द्वारा निर्देशित ये फिल्म साल 2012 में ऑनलाइन अपलोड की थी।

हजारों लोगों ने गवाई अपनी जान

जानकारी के अनुसार भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से उस रात 40 टन मिथाइल आइसोसायनाइड (MIC) जहरीली गैस प्लांट से लीक हुई थी, जिससे भोपाल और उसके आस-पास के क्षेत्र में 3 दिनों तक तबाही का मंजर देखने को मिला था। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने 3787 लोगों की गैस से मरने वालों के रूप में पुष्टि की थी, जबकि अन्य रिपोर्ट में 8000 लोगों की मौत की जानकारी दी थी।

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Edited By: Nitin Yadav

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