'मुझे संभलने में दो महीने लगे...', पति के निधन से टूट गई थीं अरुणा ईरानी, इन फिल्मों से करने जा रही हैं कमबैक
पति कुकू कोहली के निधन के दो महीने बाद अरुणा ईरानी (Aruna Irani) ने काम पर लौटने और इस दर्द से जूझने को लेकर बात की है।

दो महीने बाद सेट पर लौट रही हैं अरुणा ईरानी। फोटो क्रेडिट- एक्स
HighLights
पति कुकू कोहली के निधन के बाद सेट पर लौट रहीं अरुणा
पति के जाने से अरुणा ईरानी को संभलने में लगे थे दो महीने
अरुणा ईरानी ने अपनी फिल्मों का पुराना किस्सा भी किया शेयर
प्रियंका सिंह, मुंबई। मंजिल ना भी मिले, तो चलते रहना चाहिए। यह मानना है अभिनेत्री अरुणा ईरानी (Aruna Irani) का। पति व फिल्मकार कुकू कोहली (Kuku Kohli) के निधन के लगभग दो महीनों के बाद वह शूटिंग पर लौट आई हैं।
वह दो गुजराती फिल्में 'चाल जीवी लाइए! पार्ट 2' और 'झुमकी' शूट कर रही हैं। सेट पर लौटने को लेकर 81 वर्षीय अरुणा कहती हैं, "मुझे संभलने में दो महीनों का वक्त लगा। डेढ़ महीने तक तो लोग घर पर मिलने ही आते रहे। प्रशंसकों ने भी बहुत प्यार दिया, जिसका मुझे अंदाजा नहीं था। मुझे पता है कि इस उम्र में रोते रहने से काम नहीं चलेगा।"
दो फिल्मों की करेंगी शूटिंग
शुरुआती दौर के बारे में याद करते हुए अरुणा ईरानी ने कहा, "मैंने काफी दुख और तनाव जीवन के शुरुआती दौर में भी देखा है। इससे निपटना सीख गई हूं। मेरे लिए बहुत बड़ा नुकसान है, उससे उबरने के लिए हिम्मत चाहिए। सबका प्यार देखकर लगा कि मैं ऐसे बैठ नहीं सकती हूं। गुजराती फिल्म की शूटिंग के लिए पहले अहमदाबाद फिर राजकोट जाऊंगी। उसके बाद नेशनल टीवी के लिए जमाना बदल गया धारावाहिक भी कर रही हूं। काम मुझे ऊर्जा देता है।"

9 की उम्र में शुरू किया था करियर
अरुणा ईरानी ने आगे कहा, "मैंने नौ साल की उम्र से अभिनय का ही काम किया है। पहली फिल्म दिलीप साहब (दिलीप कुमार) के साथ बतौर बाल कलाकार की थी। काम करती गई। मैं हीरोइन के तौर पर नहीं चली, तो मैंने तुरंत एक मराठी फिल्म की और लावणी डांस किया।
यह नहीं देखा की मैं अमिताभ बच्चन (फिल्म बॉम्बे टू गोवा) के साथ हीरोइन बनकर आई हूं, तो क्यों एक डांस कर रही हूं। वो दादा कोंणके की फिल्म थी। उस गाने के कारण स्टूडियो में गई, लोगों ने देखा अरुणा काम कर रही है। अगर घर बैठी रहती कि हीरोइन हूं, डांस क्यों करूं, तो आज कोई अतापता नहीं होता। मंजिल ना भी मिले तो चलते रहना चाहिए।
कादर खान नहीं चाहते थे 'मां' का रोल करें अरुणा
करियर के ऐसे कौन से फैसले रहे हैं, जो उपलब्धियों में तब्दील हुए हैं? इस पर अरुणा आगे कहती हैं कि मैं ऐसे छोटे-छोटे रोल किया करती थी, जिसमें मेरा पात्र कादर (खान) भाई, असरानी जी, शक्ति (कपूर) जी के बीच घूमता रहता था कि तीनों उसको पाना चाहते हैं। यह इतना अहम रोल नहीं होता था।

इसी कारण जब पहले कादर भाई बेटा फिल्म लिख रहे थे, तो उन्होंने मेरे भाई (इंद्र कुमार) से कहा था की अरुणा को बेटा फिल्म में मां का रोल नहीं दे सकते हैं। उन्होंने भाई से कहा कि भावनाओं में मत बहो, तुम्हारी पहली फिल्म है। बहन को इतना बड़ा रोल दे दिया, तो तुम अपना करियर बिगाड़ लोगे, फिल्म नहीं चलेगी। वह उनका नजरिया था, कुछ सोचकर ही कहा होगा, लेकिन मैंने वह रोल किया और फिल्म हिट साबित हुई।
टाइपकास्ट से कैसे डील करती हैं अरुणा?
आगे खुद को टाइपकास्टिंग से बचाकर रखने को लेकर अरुणा कहती हैं कि मैं भाग्यशाली हूं कि एक जैसे रोल नहीं मिले। मैं गोविंदा की मां का रोल कर चुकी थी, वहीं हसीना मान जाएगी फिल्म में मैं उनके पात्र से फ्लर्ट करती हूं, शादी करना चाहती हूं। मैंने डेविड धवन जी से कहा था कि भैया हर फिल्म में मैं उनकी मां का रोल करती हूं, आप ये रोल देकर गालियां पड़वाएंगे। किसी और को ले लीजिए।
उन्होंने कहा कि मेरा चैलेंज है कि लोग आपको अपनाएंगे। मैंने कहा अगर आपको विश्वास है, तो ठीक है। लोगों ने मेरे काम को पसंद किया। मेरे प्रशंसकों ने मेरे अभिनय को कभी पसंद किया, कभी नापसंद, लेकिन कभी यह नहीं कहा की फलां रोल आपको नहीं करना चाहिए।
