दीपेश पांडेय, मुंबई। आगामी दिनों में 'राधे श्याम’, ‘आदिपुरुष’, ‘थलाइवी’, ‘मेजर’, ‘सालार’, ‘लाइगर’ और ‘आरआरआर’ सहित कई पैन इंडिया फिल्में रिलीज की कतार में हैं। पैन (प्रेजेंस एक्रास नेशन) इंडिया फिल्मों से आशय है कि वह सिनेमा जिसे दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए एक साथ कई भाषाओं में शूट करके देशभर में एक साथ रिलीज किया जाए।

फिल्म 'बाहुबली’ के बाद से ही पैन इंडिया फिल्मों के निर्माण में तेजी आई है। इन फिल्मों की अपील को व्यापक बनाने के लिए बालीवुड स्टार्स के साथ साउथ और क्षेत्रीय स्टार्स को शामिल किया जा रहा है। इन फिल्मों को बनाने के पीछे निर्माताओं की क्या सोच है, कलाकारों व लेखकों के सामने क्या चुनौतियां पेश आती हैं, इन पहलुओं की बारीकी से हमारे संवाददाता दीपेश पांडेय ने पड़ताल की है।

हिंदी और दक्षिण भारतीय इंडस्ट्री का एक साथ काम करना कोई नई बात नहीं है। साउथ के स्टार रजनीकांत, कमल हासन, नागार्जुन, प्रभुदेवा समेत अनेक कलाकार बालीवुड स्टार्स के साथ स्क्रीन पर नजर आए हैं। काजोल, ऐश्वर्या राय बच्चन, सोनाक्षी सिन्हा सहित अनेक अभिनेत्रियों ने भी साउथ की फिल्मों में काम किया है।

विस्तृत अपील जरूरी

अब ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनाने के मकसद से बालीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार एक साथ कई बड़ी फिल्मों का हिस्सा बन रहे हैं। एसएस राजामौली निर्देशित फिल्म 'आरआरआर’ में अजय देवगन और आलिया भट्ट नजर आएंगे। फिल्म में साउथ के स्टार राम चरण और जूनियर एनटीआर प्रमुख भूमिका में होंगे। इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा में रिलीज करने की तैयारी है।

वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के पहली बार विश्व विजेता बनने पर बनी फिल्म '83’ को पांच भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। पैन इंडिया रिलीज होने वाली यह रणवीर सिंह की पहली फिल्म होगी। ओम राउत निर्देशित 'आदिपुरुष’ में प्रभास के साथ सैफ अली खान और कृति सैनन नजर आएंगे। पैन इंडिया फिल्मों के बढ़ते चलन के संबंध में जी स्टूडियो के सीईओ शारिक पटेल का कहना है, 'हिंदी पट्टी के दर्शक साउथ की डब फिल्में टीवी पर पसंद कर रहे हैं। 'बाहुबली’ ने साबित कर दिया कि पैन इंडिया फिल्में अच्छा कारोबार कर सकती हैं।

'केजीएफ’ मसाला एक्शन कन्नड़ फिल्म थी, लेकिन पूरी दुनिया को पसंद आई। पैन इंडिया फिल्मों का यह ट्रेंड लोकप्रिय हो रहा है। फिल्मों को पैन इंडिया रिलीज करने से पहले हम बस यही देखते हैं कि कहानी वैश्विक हो और उसमें सभी को प्रभावित करने वाली भावनाएं हों।

इस संबंध में फिल्म 'पहलवान’ (2019) के निर्देशक एस कृष्णा कहते है, 'कंटेंट ही सभी भाषाओं के मार्केट को उत्साहित करता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स तभी फिल्में अपने हाथों में लेते हैं, जब उन्हें लगता है कि यह कंटेंट बिकेगा। भावनाएं दर्शकों को जोड़ती हैं। लिहाजा मेरा ध्यान फिल्म की भाषा के बजाय इस पर होता है कि उसे कैसे लिखा और सजाया गया है।

अलग भाषा और भावनाएं चुनौती

प्रभास, विजय सेतुपति, अल्लू अर्जुन, विजय देवरकोंडा की हिंदी डब फिल्मों को हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब वहां के स्टार्स हिंदी में भी पहचाने जा रहे हैं। वे भी अब ऐसी फिल्में करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो उनके अपने दर्शकों के साथ-साथ हिंदी पट्टी के दर्शकों को आकर्षित करें। इसीलिए निर्माताओं की सोच है कि बजट को थोड़ा बढ़ाकर इन कलाकारों की फिल्में हिंदी दर्शकों के सामने भी पेश किया जाए। किसी फिल्म को एक साथ अलग-अलग भाषाओं में शूट करना बड़ी चुनौती होती है।

इस बारे में फिल्म 'राधे श्याम’ के अभिनेता कुणाल राय कपूर कहते हैं, 'मैं तेलुगु नहीं जानता हूं तो मेरे लिए सबसे पहली और बड़ी चुनौती भाषा रही। संस्कृतियां अलग होने के कारण कभी-कभी एक ही सीन को अलग संवेदनशीलता के साथ करना पड़ता है। कभी-कभी हिंदी में जो डायलाग धीरे से बोलकर हो जाता है, तेलुगु में वही जोर से बोलना पड़ता है।’

संस्कृति की अदला-बदली

पैन इंडिया फिल्मों में फिल्मकार हिंदी और क्षेत्रीय दोनों सिनेमा के स्टार्स को एक साथ ला रहे हैं। दर्शकों की दिलचस्पी को देखते हुए डायलॉग और संगीत भी अलग-अलग तैयार किए जाते हैं। सुनील शेट्टी ने साउथ के स्टार किच्चा सुदीप के साथ एक्शन फिल्म 'पहलवान' की थी। सुनील शेट्टी का कहना है, 'यह प्रतिभाओं की अदला-बदली है। जो बहुत पहले से होनी चाहिए थी।’ हिंदी कलाकारों के साथ-साथ कई सिनेमैटोग्राफर, साउंड इंजीनियर, लाइट डिपार्टमेंट वाले टेक्नीशियन भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करते हैं। इसी तरह वहां काम करने वाली प्रतिभाएं हिंदी फिल्मों में काम करती हैं।

इस बाबत अभिनेता कुणाल राय कपूर कहते हैं कि, 'सिनेमा के नजरिए से यह एक अच्छी चीज है। इससे हमें वैश्विक स्तर पर एक बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के तौर आगे बढऩे में मदद मिल रही है।’

फायदेमंद सौदा

सिनेमा विशेषज्ञ आर्थिक नजरिए से भी पैन इंडिया फिल्मों को फायदे का सौदा मानते हैं। फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर समीर दीक्षित कहते हैं, 'हिंदी फिल्में रिलीज करने में कुछ पाबंदियां रहती हैं। देश के कुल 14 डिस्ट्रीब्यूशन सर्किट मुंबई, दिल्ली/यूपी, ईस्ट पंजाब, सेंट्रल इंडिया, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, निजाम, वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु, मैसूर, केरल, उड़ीसा और असम हैं। हिंदी फिल्में नौ डिस्ट्रीब्यूशन सर्किट मुख्यत: मुंबई, दिल्ली/यूपी, ईस्ट पंजाब, सेंट्रल इंडिया, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मैसूर और बंगाल से आगे नहीं जा पाती हैं, लेकिन जब उन्हीं फिल्मों को अलग-अलग भाषाओं में पैन इंडिया फिल्म के तौर पर रिलीज किया जाता है तो वे सभी 14 सर्किट में रिलीज होती हैं और फिल्म को ज्यादा स्क्रीन मिलती हैं।

रिकवरी के लिहाज से ऐसी फिल्में सेफ जोन में आ जाती हैं। जब हिंदी के स्टार्स के साथ क्षेत्रीय स्टार्स काम करते हैं तो निर्माताओं के लिए भी जोखिम कम हो जाता है।’ फिल्म 'मेजर’ के अभिनेता और स्क्रीनप्ले राइटर अदिवी शेष इस बारे में कहते हैं कि, 'मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की कहानी किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि हमारे देश के एक जवान की कहानी है। इसलिए हम चाहते थे इस कहानी को पूरा देश देखे। इसे पैन इंडिया फिल्म बनाने के लिए निर्माता महेश बाबू ने सोनी पिक्चर्स से संपर्क किया। तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में मेरे प्रशंसक हैं। वहां लोग मेरी फिल्में देखते हैं। सई मांजरेकर और शोभिता धूलिपाला के जुडऩे से फिल्म को एक पैन इंडिया अपील मिली।’

आगे और भी फिल्में बनेंगी

फिल्म निर्माता और ट्रेड एनालिस्ट गिरीश जौहर बताते हैं, 'पैन इंडिया फिल्में अगर दो भाषाओं में बन रही हैं तो इसकी मार्केटिंग भी दो फिल्मों की तरह होती है। डिजिटल राइट्स से लेकर गाने और सेटेलाइट राइट्स सभी अलग-अलग भाषाओं के अनुसार बिकते हैं, लेकिन इन्हें बनाने के खर्चे में सिर्फ एक तिहाई या डेढ़ गुना ही बढ़ोत्तरी होती है। फिल्म 'साहो’ साउथ मार्केट में हिट और हिंदी मार्केट में औसत रही थी। निर्माताओं के लिए हिंदी में औसत बिजनेस भी अच्छा था। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अधिक संख्या में ऐसी फिल्मों का निर्माण होगा।’

पहले भी बनी हैं ऐसी फिल्में

भारतीय सिनेमा में एक ही फिल्म को कई भाषाओं में बनाकर उन्हें देशभर में रिलीज करना कोई नया चलन नहीं है। साल 1951 में एस एस वासन निर्देशित फिल्म 'संसार’ को 'संसारम’ नाम से हिंदी के साथ तमिल में शूट किया गया था। साल 1953 में फिल्म 'चांदीरानी’ को एक साथ तमिल, तेलुगु और हिंदी तीनों भाषाओं में शूट किया गया था। वहीं साल 1978 में श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित फिल्म 'कोंद्रुआ’ को हिंदी और तेलुगु में एक साथ शूट करके रिलीज किया गया था। इसके बाद कमल हासन, रजनीकांत और फिल्मकार रामगोपाल वर्मा की कई फिल्में अलग-अलग भाषाओं में एक साथ शूट होकर पैन इंडिया रिलीज हुई।

प्रभास शीर्ष पर

यूं तो बालीवुड व साउथ के सुपरस्टार्स को अपने खास अंदाज के लिए देशभर में पसंद किया जाता है, पर कोई कलाकार देश में कई जगहों पर काम कर रहा हो। कई भाषाओं में उसकी फिल्में देखी और पसंद की जा रही हों तो उसे पैन इंडिया स्टार कहते हैं। पैन इंडिया लोकप्रियता के मामले में 'बाहुबली’ फेम प्रभास इन दिनों शीर्ष पर हैं। उनके खाते में 'राधे श्याम’, 'आदिपुरुष’, नाग अश्विन की एक अनाम फिल्म और सालार जैसी पैन इंडिया फिल्में हैं।

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