पराग छापेकर, मुंबई। एक्टर होने के नाते मैं थोड़ा सेलफिश हो जाता हूं कि मुझे अच्छे किरदार मिले। यूनिफॉर्म मेरी कमजोरी रही है। कमजोरी के साथ-साथ इसमें पैशन भी है। हमारी सुरक्षा में लगे जवानों को कितनी तकलीफ होती है और वे कितनी परेशानियों से गुजरते हैं यह कोई नहीं समझ सकता। कश्मीर से हूं तो यहां से अलग कनेक्शन रहा है। और जब पता चला कि इस पर फिल्म बन रही है तो इच्छा थी कि हिस्सा बनूं और आज खुशी है कि इस फिल्म में मैं शामिल हूं। यह कहना है कि टीवी से बॉलीवुड में एंट्री करने जा रहे एक्टर मोहित रैना का। 

जागरण डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में मोहित रैना ने अपने टेलीविजन करियर और फिल्मी दुनिया में शुरुआत को लेकर बात की। टीवी से बॉलीवुड की तरफ रुख करने वाले एक्टर मोहित 'देवों के देव: महादेव' में शिवजी का किरदार निभाते नजर आए। मोहित को शो 'सरफ़रोश: सरागढ़ी 1897' में भी देखा गया। मोहित ने इस शो की शूटिंग ख़त्म करने के बाद डायरेक्टर आदित्य धार की फिल्म उरी साइन कर ली थी। 

मोहित कहते हैं कि, उरी द सर्जिकल स्ट्राइक फिल्म का कैनवास बहुत बड़ा और अच्छा है। हिस्ट्री का हिस्सा और एेसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा होना बहुत बड़ी बात है। साथ में इतनी बड़ी स्टारकास्ट है जिसमें परेश रावल, विक्की कौशल, यामी गौतम और कीर्ति कुल्हारी जैसे कलाकार हैं। दिग्गज कलाकारों के साथ काम करना अलग बात होती है। 

टफ ट्रेनिंग का हिस्सा बने

मोहित ने बताया फिल्म की शूटिंग के लिए टफ ट्रेनिंग की गई थी। चूंकि हमें स्पेशल फोर्स की तरह बिहेव करना था। डायरेक्टर आदित्य धर भी इस बात को लेकर बहुत सजग थे कि इस बात का पूरी तरह से ध्यान रखा जाए कि हम स्पेशल फोर्स की तरह एक्ट कर सकें। 

न्यूजपेपर से मिली थी फिल्म की जानकारी 

मोहित बताते हैं कि, फिल्म का जब हिस्सा नहीं बना था तब मैं गुजरात में टीवी शो सारागाढ़ी के लिए था। एक न्यूजपेपर में इस फिल्म के बारे में पढ़ा था। जब पांच महीने बाद मुंबई आया तो मुझे फिल्म की टीम से फोन आया। तो मैं शॉक हुआ कि फिल्म की शुरुआत नहीं हुई है क्योंकि पांच महीने गुजर चुके थे। मैं खुश हो गया।लेकिन फिल्म से जुड़ने के बाद पता चला कि, इसका प्रोडक्शन ग्रेंड है और इसको लेकर जबरदस्त तैयारी चल रही है। 

मोहित आगे बताते हैं कि, वे हर तरह का सिनेमा करना चाहते हैं। सिनेमा एक वह है जिसमें आप सिर्फ दिल से हंसना चाहते हैं और दूसरा वह जो कि रेलेवेंट है। जिसे देखकर समझकर संदेश को घर ले जा सकें। महसूस कर सकें। वो सब सोचकर फिल्म बनाना जहां पर ब्रेन का यूज होता है। या फिर वैसी फिल्म जिसमें सिर्फ एंजॉयमेंट हो और दिमाग घर पर छोड़कर जाना हो। 

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Posted By: Rahul soni