Bollywood News: डबिंग की दुनिया में रखा अली फजल में अपना कदम, बोले- मैं ढीठ नहीं हूं
अभिनेता अली फजल ने कहा कि मेरी आदत है कि नए साल के दो दिन पहले संकल्प लेता हूं। फिर उस पर काम करना शुरू कर देता हूं ताकि यह कहने के लिए हो जाए कि मैंने तो संकल्प पिछले साल ही ले लिया था और नया साल आने से पहले उस पर काम भी शुरू कर दिया। वैसे मैं संकल्प लेने में बहुत यकीन नहीं रखता हूं।

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। अभिनेता अली फजल ने अब डबिंग में भी हाथ आजमाया है। दरअसल, उन्होंने छह जनवरी से क्रंचीरोल पर प्रसारित होने वाले एनीमे (एनीमेशन) सीरीज सोलो लेवेलिंग के लिए के पात्र सांग चियुल की हिंदी डबिंग की है। पिछले साल की सीख, नए साल के संकल्प और डबिंग में नई पारी को लेकर उनसे हुई बातचीत के अंश।
1. क्या आप अपने संकल्प को शिद्दत से निभा पाते हैं?
-मेरी आदत है कि नए साल के दो दिन पहले संकल्प लेता हूं। फिर उस पर काम करना शुरू कर देता हूं, ताकि यह कहने के लिए हो जाए कि मैंने तो संकल्प पिछले साल ही ले लिया था और नया साल आने से पहले उस पर काम भी शुरू कर दिया। वैसे मैं संकल्प लेने में बहुत यकीन नहीं रखता हूं, लेकिन हर फिल्म को करने से पहले जब मेरी तैयारियां शुरू होती हैं, तो मेरे कुछ नियम हैं, जिसका पालन मैं करता हूं। अपने रुटीन को शिद्दत से निभाता हूं।
2. गुजरे साल को खुद के लिए कैसे परिभाषित करेंगे?
-बीता साल मेरे लिए अच्छा रहा। मेरी दो फिल्में खुफिया और कंधार रिलीज हुई। दो फिल्में हॉलीवुड में शूट हो रही थीं पर उसकी शूटिंग वहां लेखकों के हड़ताल की वजह से रुक गई। एक यहां शूट हो रही थी, उसकी शूटिंग की तारीखों आगे बढ़ गई है। पहली बार बीते साल में थोड़ा आरामदायक महसूस किया। पहले मैं चिंतिंत हो जाता था कि काम आगे बढ़ गया है या नहीं हो रहा है। लेकिन अब वक्त मिल जाता है, तो अच्छा लगता है।
3. अब चिंता इसलिए नहीं होती है, क्योंकि करियर में स्थिरता आ गई है?
-हां, स्थिरता है। शादी के बाद मुझे रिचा (चड्ढा) के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिल रहा था। हम दोनों व्यस्त चल रहे थे। कई बार अहसास होता है, परिवार है साथ समय बिताना चाहिए। मेरी नानी लखनऊ में रहती हैं। उनसे मिलता रहता हूं। जब काम के लिए देश से बाहर रहता हूं, तो दिमाग में घड़ी चलती रहती है कि कब काम खत्म होगा, ताकि मैं देश लौट सकूं।
4.एनीमे सीरीज में डबिंग को लेकर पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
-(हंसते हुए) मैंने ऐसे कभी सोचा नहीं था कि आवाज के लिए कभी मुझे बुलाया जाएगा। कलाकार को उसकी आवाज के लिए काम मिलना बड़ी बात होती है। महामारी के दौरान एक एनिमेटर ने मेरी आवाज पर एक पांच मिनट का एनिमेशन बनाया था। स्टूडियो के एक बंद कमरे में आप किसी भी दुनिया की कल्पना कर सकते हैं। वहां केवल आप और आपकी आवाज होती है। पूरा खेल आपकी आवाज का होता है।
मैं वाइस आर्टिस्ट की बहुत इज्जत करता हूं। नए स्टाइल का एनिमेशन जब आप देखते हैं और उसके लिए डबिंग करते हैं, तो अच्छा लगता है। एनीमे में कई चित्र हाथों से बनाए जाते हैं। तकनीक के जमाने में हो सकता है, कुछ चीजें बदली हों। लेकिन मैंने पुराने अंदाज में डबिंग की है। हमारे देश में कोरियन और जापानी कंटेंट के डब वर्जन को देखने वाले दर्शक हैं।
5.आप हॉलीवुड में काफी काम कर रहे हैं। कई बार यहां के प्रोजेक्ट्स का हिस्सा न बन पाने की कमी खलती है?
-हां, खलती है। मैं सब कुछ संभालने का प्रयास कर रहा हूं। कई निर्देशकों को फोन करके बता भी रहा हूं कि मैं ढीठ नहीं हूं। मेरी छवि ऐसी हो गई है कि यह तो यहां काम ही नहीं करता है, यहां रहता नहीं है, इसलिए प्रोजेक्ट्स को ना बोलता है। हालांकि यह सच नहीं है।
6.अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट और यहां पर काम करने के अनुभव एक-दूसरे से कितने अलग हैं?
-आर्थिक स्थिति अलग है, कंटेंट में अंतर है। हालीवुड में दुनिया की बात होती है, इसलिए कहानियां काफी विस्तृत सोच के साथ बनती हैं। हमारे यहां दुर्भाग्यवश शुक्रवार को किस्मत का फैसला होता है। अगर आपकी परफार्मेंस सही नहीं हुई, तो दिक्कत हो सकती है। यह जिम्मेदारी काफी हद तक कास्टिंग डायरेक्टर पर होती है कि वह किसी कलाकार को उसका पिछला काम देखकर नहीं उसकी प्रतिभा देखकर चुने।
7.मिर्जापुर का तीसरा सीजन आएगा। क्या आपके किरदार का कोई अंत होगा?
-हां, अंत होगा। इस साल शो आएगा। मेरे किरदार का एक सफर है। सच कहूं तो वेब सीरीज करना थकावट भरा होता है, इसलिए मैंने कोई और शो नहीं किया। मिर्जापुर के बाद मुझे उसी से मिलते-जुलते कम से कम दस आफर आए होंगे। लोग कहते थे कि बड़ा अनोखा किरदार है, गैंगस्टर है। मैंने कहा वो तो कर लिया अब कुछ अलग दो। मेरे लिए कहानी और अपने किरदार का ग्राफ बहुत मायने रखता है।
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