मुंबई। आमिर ख़ान इस वक़्त बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद और कामयाब सुपरस्टार हैं। आमिर ने साल-दर-साल शानदार फ़िल्में करके बॉक्स ऑफ़िस  पर और जनता के मन में अपनी विश्वसनीयता कायम की है। वैसे तो आमिर ने कई यादगार फ़िल्में की हैं, मगर इन फ़िल्मों में ख़ास जगह रखती है 'ग़ुलाम'। 19 जून को आमिर के करियर की इस माइल स्टोन फ़िल्म ने 20 साल का सफ़र पूरा कर लिया है। क्या आप जानते हैं कि 'ग़ुलाम' का संजय दत्त से भी गहरा कनेक्शन है, जिसका खुलासा स्टोरी में आगे किया गया है।

'ग़ुलाम' को विक्रम भट्ट ने निर्देशित किया था और यह फ़िल्म 19 जून 1998 को रिलीज़ हुई थी। आमिर ने फ़िल्म में एक स्ट्रीट स्मार्ट बॉक्सर का किरदार निभाया था, जिसे मुबंइया भाषा में टपोरी कहा जाता है। रानी मुखर्जी पहली बार इस फ़िल्म में आमिर की लीडिंग लेडी बनीं। रजित कपूर आमिर के बड़े भाई के किरदार में थे। शरत सक्सेना ने इस फ़िल्म में विलेन का किरदार निभाया था, जो पूर्व बॉक्सिंग चैंपियन होता है और ट्रैवल एजेंसी का धंधा करता है, मगर उसका असली काम जबरन वसूली का होता है। 'ग़ुलाम' से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें-

आती क्या खंडाला

'ग़ुलाम' 1998 की सुपर हिट फ़िल्मों में शामिल है। फ़िल्म के कुछ दृश्य और गाने आज भी यादों में ताज़ा हैं। ख़ासकर 'आती क्या खंडाला...' गीत उस दौर में आइकॉनिक सांग बन गया था। इस गाने को अल्का याग्निक के साथ आमिर ख़ान ने ही आवाज़ दी थी। प्लैबेक सिंगिंग में आमिर की यह पहली कोशिश थी, जिसे सुनने वालों ने भी ख़ूब पसंद किया। 

10-10 की दौड़

'गु़लाम' के यादगार दृश्यों में 10-10 की दौड़ वाला दृश्य शामिल है। आपको याद होगा, रोमांच से भरपूर इस दृश्य में आमिर ख़ान और दीपक तिजोरी के बीच रेलवे ट्रैक पर ख़तरनाक दौड़ होती है, जिसमें हारने का मतलब होता है मौत। इस दृश्य में आमिर ट्रेन की विपरित दिशा में ट्रैक पर दौड़ते हैं। आमिर और ट्रेन के बीच महज़ 1.3 सेकंड का फ़ासला होता है। आमिर ने इस स्टंड को ख़ुद किया था। इस दृश्य को विक्रम भट्ट ने बेहद शानदार तरीक़े से फ़िल्माया था, ताकि दर्शकों पर गहरा असर हो। यह दृश्य फ़िल्म की कहानी में एक अहम मोड़ भी लाता है। इस दृश्य को सीन ऑफ़ द ईयर का फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था।

रानी की आवाज़

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दिलचस्प तथ्य यह भी है कि रानी मुखर्जी ने भले ही इस फ़िल्म में नायिका का किरदार निभाया था, मगर आवाज़ उनकी नहीं थी। रानी को डबिंग आर्टिस्ट मोना शेट्टी ने आवाज़ दी थी। इस बारे में रानी को सफ़ाई दी गयी थी कि उनकी असली आवाज़ किरदार को सूट नहीं करती थी। हालांकि बाद में रानी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि आमिर के कहने पर उनकी आवाज़ फ़िल्म में नहीं ली गयी थी। 

कब्ज़ा का रीमेक

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अगर आपको यह लगता है कि आमिर ख़ान रीमेक या सीक्वल्स में काम नहीं करते, तो 'ग़ुलाम' आपकी यह ग़लतफ़हमी दूर कर देगी। 1998 में आयी 'ग़ुलाम' संजय दत्त की हिट फ़िल्म क़ब्ज़ा का रीमेक थी, जो 1988 में रिलीज़ हुई थी और जिसे महेश भट्ट ने डायरेक्ट किया था। सलमान के पिता सलीम ख़ान ने इसकी स्क्रिप्ट लिखी थी। इस फ़िल्म में संजय के साथ राज बब्बर, अमृता सिंह और परेश रावल मुख्य किरदारों में शामिल थे।

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इत्तेफ़ाक़ देखिए, अब संजय दत्त की बायोपिक फ़िल्म 'संजू' रिलीज़ हो रही है, जिसमें परेश उनके पिता सुनील दत्त के किरदार में हैं। वैसे 'कब्ज़ा' भी ओरिजनल फ़िल्म नहीं है। यह 1954 की अमेरिकन क्लासिक 'ऑन द वॉटरफ्रंट' से प्रेरित थी, जिसमें लीजेंडरी एक्टर मार्लन ब्रैंडो ने मुख्य भूमिका निभायी थी।

बहरहाल, संजय दत्त और आमिर ख़ान को आपने मोस्ट रीसेंटली 'पीके' में साथ देखा होगा, जिसे राजकुमार हिरानी ने ही डायरेक्ट किया था। संजय ने इस फ़िल्म में स्पेशल एपीयरेंस किया था। 

Posted By: Manoj Vashisth

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