हाथरस व अलीगढ़ जिले की सीमा से सटे मांट विधानसभा क्षेत्र में इस बार सियासत कई रंग दिखा रही है। अब तक सियासी चक्रव्यूह के आठ द्वार भेद विधानसभा पहुंचे श्याम सुंदर शर्मा हाथी पर सवार हो नौवें द्वार पर हैं। सियासी चौसर पर हर दल और प्रत्याशी सधे हुए हाथों से पासे फेंक रहे हैं। नजर जातीय गोलबंदी पर भी है। जाट बाहुल्य इस क्षेत्र में सेंधमारी की भरसक कोशिश की जा रही है। मांट सीट का हाल बताती विनीत मिश्र की रिपोर्ट-

थुरा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर कस्बा मांट। दोपहर के 12 बजे है। गुनगुनी धूप के बीच मौसम सर्द है, लेकिन सियासी चर्चा ने माहौल गर्मा रखा है। सियाराम की चाय की दुकान पर 60 बरस के दीनानाथ ने सियासत की बातें छेड़ दीं, बोले, श्याम सुंदर शर्मा आठ बार से विधायक रहे हैं, हमने कई बार कामकाज देखा है। एक मौका और देंगे, शायद इलाके की सूरत बदल जाय। विनोद बीच में ही बात काटते हुए बोले,न.न. इस बार इतना आसान नहीं है।

पिछली बार भी लड़ाई कांटे की थी। इस बार भी जूझना होगा। इतना सुनने के बाद भीखम खुद को रोक नहीं सके। बोले, तब एसके शर्मा भी भाजपा से थे, वोट का बंटवारा था। इस बार ऐसा नहीं है। फिर क्या था, चाय का कुल्हड़ होठों तक ले गए दीनानाथ के हाथ रुक गए, बोले भाजपा को इतना कमजोर मत समझो। वोटों की गोलबंदी तो वहां भी मजबूत है।

सपा समर्थक विष्णु बोले, रालोद के गढ़ में हमें कैसे भूल सकते हो। इस बार तो साइकिल के साथ गठजोड़ और मजबूत हुआ है। हैंडपंप से ही पानी की धार फूटेगी। कुछ दूरी पर विनोद की पान के खोखे पर भी भीड़ लगी थी। खेतों पर जा रहे पिकू भी रुककर चर्चा में जुटे। बोले, इस बार चार-चार जाट प्रत्याशी हैं। जो जाट वोट एकमुश्त लेगा, उसकी नैया ही पार होगी। उनकी हां में हां मिलाते हुए सूरजभान बोले, इस बार किसी के लिए चुनाव इतना आसान नहीं है, वोटर तो सबसे वोट देने का वादा कर रहे हैं, लेकिन देंगे तो एक को ही। इस बार गांवों में हर दल की चर्चा है। कोई किसी से कम न है। बीच में रामकुमार बघेल बोल पड़े, कुछ दिन और ठहरो, तस्वीर सामने होगी, फिर हम बता देंगे कि नौवीं बार श्याम लखनऊ पहुंचेंगे या फिर किसी और की गाड़ी जाएगी।

ये है मांट का परिदृश्य: मौजूदा विधायक श्याम सुंदर शर्मा कांग्रेस, लोकतांत्रिक कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस से होते हुए बसपा के टिकट पर 2017 में आठवीं बार विधायक बने। इस बार फिर बसपा से ही मैदान में हैं। श्याम सुंदर शर्मा ने 2012 में एकमात्र चुनाव रालोद के जयंत चौधरी से हारा था। जयंत के सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव में फिर जीते। 2017 में बसपा के श्याम सुंदर रालोद के योगेश नौहवार से महज 432 वोटों से ही चुनाव जीते थे। कमल के लिए हमेशा बंजर रही मांट की सीट पर 2017 में पहली बार भाजपा करीब 60 हजार वोट लाई।

वोटों का समीकरण : मांट सीट पर करीब 80 हजार जाट मतदाता हैं, तो साठ हजार ब्राह्मण, बीस हजार ठाकुर और 25 हजार बघेल, 35 हजार जाटव, 20 हजार गुर्जर,15 हजार मुस्लिम, 20 हजार निषाद और 40 हजार अन्य मतदाता हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal