लखनऊ (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश में सत्रहवीं विधानसभा के गठन के लिए प्रचंड बहुमत मिलने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री का नाम तय करना है। यह नाम पार्टी के शीर्ष क्रम के नेता करेंगे, इसी बीच प्रदेश में अब मंत्री बनने की होड़ काफी तेज हो गई है। 
विधानसभा में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी एक तरफ मुख्यमंत्री के लिए माथापच्ची करती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी में मंत्री पद हासिल करने की भी होड़ शुरू हो गई है। इसमें गृह विभाग से लेकर तमाम प्रमुख विभागों पर कई नेताओं की नजर जमी हुई है। इसके अलावा बुंदेलखंड, पूर्वांचल में कमल खिलाने वाले कई नेता दावेदारों की दौड़ में शामिल हो गए हैं। इनके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष और सबसे ज्यादा महिला विधायक होने के नाते कैबिनेट में इनकी भी दावेदारी तेज होती दिख रही है। भाजपा सरकार की कैबिनेट इस बार जातिगत और क्षेत्रीय दावेदारी, अनुभवी व युवा के साथ महिला चेहरों का सही सामंजस्य बिठाता नजर आ सकता है। भाजपा में विधायकों की भारी भीड़ में मंत्री चुनना भी पार्टी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। कुछ नेता ऐसे हैं, जो वर्षों से प्रदेश में पार्टी का चेहरा बने हुए हैं, वहीं कुछ नए दावेदार भी बनकर उभरे हैं, जो पहली बार विधानसभा पहुंचे।
यहां पुराने प्रदर्शन और पार्टी में रसूख को अगर आधार मानें तो सुरेश खन्ना, राधा मोहन दास अग्रवाल, हृदयनारायण दीक्षित, सतीाश महाना, श्रीकांत शर्मा, पंकज सिंह, सिद्धार्थनाथ सिंह, धर्म पाल सिंह, कृष्णा पासवान, राजेश अग्रवाल, वीरेंद्र सिंह सिरोही, रमापति शास्त्री, अक्षयवर लाल, अवतार सिंह भड़ाना, आशुतोष टंडन, वेद प्रकाश गुप्ता, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी मंत्री पद के दावेदार बनते हैं। माना जा रहा है चूंकि कानून व्यवस्था सुधारने को लेकर भाजपा ने अपने घोषणापत्र में तमाम योजनाएं दी है, इसलिए प्रदेश में गृहमंत्री का पद भी सामने आ सकता है।
महिला विधायकों में लाल बत्ती की आस
भाजपा से इस बार 34 महिला विधायक हैं। इनमें कुछ नाम ऐसे हैं, जो भाजपा की जीत का प्रमुख चेहरा बने हैं। अमेठी में गरिमा सिंह और लखनऊ में मुलायम के भतीजे को हराने वाली स्वाति सिंह का नाम प्रमुख हैं। इसके साथ सपा से भाजपा आए महेंद्र अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह भी मंत्री पद के प्रमुख दावेदारों की सूची में हैं।
गठबंधन के साथियों को भी मिलेगी कैबिनेट में जगह
चुनाव के दौरान बलिया की रैली में पीएम मोदी ने ऐलान किया था कि भाजपा के सहयोगी दलों को भी सरकार बनने पर कैबिनेट में जगह दी जाएगी. चुनाव में अपना दला सोनेलाल पार्टी ने नौ विधायक जीते, जबकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 4 विधायक जीते हैं। अपना दल से सांसद अनुप्रिया पटेल पहले ही केंद्र में मंत्री हैं। अब मंत्री बनने की होड़ में सहयोगी दलों के भी दावेदार सामने आ गए हैं।
'बाहरी' नेता भी हैं दावेदार
मंत्री पद के दावेदारों की बात करें तो कई नेता ऐसे भी हैं, जो चुनाव से पहले ही दल बदलकर पार्टी में शामिल हुए और चुनाव भी जीते। इनमें बसपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, कांग्रेस से आईं डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और सपा से आए महेंद्र अरिदमन सिंह प्रमुख हैं। वहीं पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह और रालोद के विधानमंडल दल के नेता रहे दलवीर सिंह की भी दावेदारी प्रमुख है।
विधानसभा अध्यक्ष चुनना भी चुनौती
भाजपा में विधानसभा अध्यक्ष का चयन भी चुनौती से कम नहीं है। इनमें सुरेश कुमार खन्ना, राधा मोहन दास अग्रवाल, सतीश महाना, हृदयनारायण दीक्षित अहम दावेदार माने जा रहे हैं।
मोदी के बनारस से भी होगा कोई मंत्री
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद तीन दिन अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में रहे थे। वाराणसी से भाजपा ने सभी सीटों पर जीत का परचम लहराया, जिसके बाद माना जा रहा है कि यहां से भी एक नेता मंत्री पद में जगह बना सकता है। वाराणसी के अलावा पूर्वांचल में भाजपा ने इस बार कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है, इसे लेकर यहां के प्रमुख नेताओं में मंत्री पद की आस जग गई है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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