चेन्नई, प्रेट्र। मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग की उस अधिसूचना में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया जिसमें तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में 80 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों, दिव्यांगों और कोविड-19 प्रभावितों को पोस्टल बैलट के जरिये मतदान का विकल्प प्रदान किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश संदीब बनर्जी और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने द्रमुक की ओर से दाखिल जनहित याचिका के प्रति अपनी अनिच्छा जाहिर की। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 60(सी) संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है क्योंकि यह मतदान की गोपनीयता को भंग करती है। मतदान में गोपनीयता स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की मूल बुनियाद है और यह संसदीय लोकतंत्र को स्थापित करती है। यह धारा कार्यपालिका को किसी को पोस्टल बैलट का अधिकार प्रदान करने के लिए नामित करने का हक देती है। लिहाजा, ऐसी बेलगाम शक्ति विरोधाभासी और मनमानी है जिसे खारिज किया जाना चाहिए।

तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटे हैं, जिसमें ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के पास 136 विधायक हैं। इसके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के पास 89 हैं। वहीं कांग्रेस के पास सात, इंडियन मुस्लिम लीग के पास पांच सीट हैं। तमिलनाडु में छह अप्रैल को मतदान होगा। जबकि दो मई को वोट की गिनती की जाएगी।

Edited By: Nitin Arora