मुंबई, जेएनएन। महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के रिजल्‍ट में लातूर ग्रामीण पर अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। यहां पर पहले नंबर कांग्रेस के धीरज विलासराव देशमुख रहे। जिन्‍हें विधानसभा चुनाव में 131321 वोट मिले। यहां पर दूसरे नंबर नोटा रहा। यहां नोटा को 26899 वोट मिले।

नोटा को ज्‍यादा मिलना लोगों की नाराजगी देखने के रूप में देखा जाता है। यहां पर शिवसेना के सचिन उर्फ रवि रामराजे देशमुख को 13113 वोट , वंचित बहुजन आगाड़ी के दोनो मंचाकारो बलिराम को 12670 वोट, महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना के अर्जुन डोंगीराम बाघमारे को 2847 वोट, निर्दलीय बाबरूवान बलिराम पंवार को 1479 वोट मिले हैं। इन सभी की जमानत जब्‍त हो गई है।  

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नोटा का शुरू हुआ प्रयोग 

ईवीएम पर नोटा नाम का बटन लगाने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर 2013 के एक निर्देश पर किया गया है। बहस के दौरान यह दलील दी गई थी कि नोटा का बटन होने से ऐसे मतदाता के मत की गोपनीयता बनी रहेगी जो किसी भी उम्मीदवार के हक में वोट नहीं देना चाहता, और ना ही वोट देने से अनुपस्थित रहना चाहता। चुनाव आयोग ने ईवीएम पर नोटा नाम का एक बटन लगा दिया लेकिन और कोई भी बदलाव नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार एक जोशीले लोकतंत्र में मतदाता को नोटा चुनने का मौका दिया जाना चाहिए जो कि राजनीतिक दलों को मजबूर करेगा कि वे चुनावों के दौरान अच्छे उम्मीदवारों को टिकट दें।

अच्‍छी छवि वाले उम्‍मीदवारों को मिले टिकट  

इस फैसले के बाद चुनावों को लेकर काम करने वाली संस्‍था एडीआर के सदस्‍य जगदीप एस छोकर ने कहा कि  सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भावनानुसार लागू करने के लिए प्रावधान होना चाहिए था कि अगर नोटा को सबसे अधिक वोट मिले (सब उम्मीदवारों से अधिक) हो, वह चुनाव रद्द हो जाना चाहिए।  इसके बाद एक नया चुनाव होना चाहिए जिसमें उन उम्मीदवारों को खड़े होने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। केवल यही तरीका है जिससे राजनीतिक दल बेहतर और अच्छी छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए मजबूर हो जाएंगे। 

Posted By: Arun Kumar Singh

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