Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    MP Election 2018: दमोह में मलैया की राह में रामकृष्ण कुसमरिया की बगावत बनी कांटा

    By Hemant UpadhyayEdited By:
    Updated: Thu, 22 Nov 2018 01:14 AM (IST)

    MP Election 2018: दमोह विधानसभा सीट पर भाजपा के पारंपरिक लोधी-कुरमी वोटों का गणित गड़बड़ाने से यह स्थिति बनी है।

    MP Election 2018: दमोह में मलैया की राह में रामकृष्ण कुसमरिया की बगावत बनी कांटा

    राजीव सोनी, दमोह। बुंदेलखंड अंचल में भाजपाई दिग्गज और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया 'बाबा" की बगावत सत्ताधारी दल पर भारी पड़ती दिख रही है।

    दमोह सीट पर वित्तमंत्री जयंत मलैया की चुनावी राह में बाबा ने बारूदी सुरंग बिछा दी है। अंतिम चुनाव मानकर रण में खड़े मलैया कड़े संघर्ष में फंस गए हैं। यहां भाजपा के पारंपरिक लोधी-कुरमी वोटों का गणित गड़बड़ाने से यह स्थिति बनी है। भाजपा, कांग्रेस और बसपा के राष्ट्रीय नेता भी पार्टी की साख बचाने में जुटे हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दमोह शहर में रेलवे लाइन किनारे मलैया की कोठी और पुलिस लाइन स्थित कुसमरिया के घर में इन दिनों रतजगा चल रहा है। भोर होते ही कार्यकर्ताओं की चहल-पहल के साथ देर रात तक चुनावी रणनीति बन रही है। 70 की उम्र लांघ चुके मलैया और कुसमरिया दोनों ही 14-14 घंटे जनसंपर्क में जुटे हैं।

    कांग्रेस ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और युवा तुर्क राहुल सिंह लोधी पर दांव खेला है। इस सीट पर लोधी समाज के करीब 42 हजार वोट हैं। स्थानीय कांग्रेसी ना-नुकुर के बाद राहुल के पक्ष में आ गए हैं।

    उधर एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन के चलते सवर्ण वर्ग खासतौर पर ब्राह्मण सत्ताधारी दल से खफा चल रहे हैं। यही कारण है कि 2008 और 2013 का चुनाव बारीक अंतर से जीते मलैया की नींद उड़ी हुई है। पुख्ता चुनावी मैनेजमेंट विनम्र स्वभाव और सहजता मलैया का सकारात्मक पक्ष है, लेकिन उनके करीबियों के नाम पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की विपरीत राय बाधक भी बन रही है।

    पेशे से ड्राइवर और भाजपा कार्यकर्ता रहे 30 वर्षीय इमरत प्रजापति की टिप्पणी काबिलेगौर है, बुंदेली में वह कहते हैं 'चुनाव हो जेंसो नेता हरें फिर सन्नाा जेहें"(चुनाव के बाद फिर नेताओं को ढूंढना मुश्किल हो जाएगा)। प्रधानमंत्री आवास के पैसे न मिलने की शिकायतें गरीब बस्तियों में मुख्य मुद्दा है।

    शहर में चुनावी चिल्लपों और प्रचार का हो-हल्ला बहुत कम है, झंडे-बैनर और पोस्टर भी ज्यादा नजर नहीं आ रहे। दमोह में 14 प्रत्याशी हैं। सपा, बसपा के अलावा 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन बाबा कुसमरिया की मौजूदगी से कांग्रेस भारी गदगद है। उसे लग रहा है कि भाजपा के पारंपरिक कुरमी वोटों के बिखराव का लाभ उसे ही मिलेगा।

    कुसमरिया पर चर्चा नहीं करूंगा: मलैया

    संघर्ष तो है, लेकिन विकास कार्य शहर के सुंदर चौराहे, मानस भवन, उद्यान और सामुदायिक भवन जनता के सामने हैं। अबकी मौका मिला तो विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज खोलना प्राथमिकता में है। कुसमरिया की बगावत पर कोई बात नहीं करूंगा। सुधा मलैया कहती हैं कि जिन्हें आवास नहीं मिले वे जरूर नाराज हैं, लेकिन हम उन्हें मना लेंगे। सुधा यह स्वीकारती हैं कि मलैया जी का अंतिम चुनाव है, वह तो इस बार ही मना कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री जी के आग्रह पर राजी हुए। बताया जाता है कि बेटे सिद्धार्थ का नाम टिकट के लिए इसलिए आगे बढ़ाया गया था।

    िंहंदुस्तान का सबसे गंदा शहर बना दिया : कुसमरिया

    मैंने बहुत अपमान सहा इसके बाद ही बगावत करनी पड़ी। बड़े-बुजुर्ग नेताओं की अनदेखी हो रही है। कुसुम महदेले, सरताज सिंह के प्रति भी सहानुभूति जताकर कहते हैं, ये सब जिताऊ कैंडिडेट थे, लेकिन भाजपा ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। दमोह को हिंदुस्तान का सबसे गंदा शहर बना दिया, यही इनकी (मलैया की तरफ इशारा) उपलब्धि है।

    हिंदू एजेंडे पर चुनाव : राहुल सिंह

    भाजपा भले मंदिर के नाम पर राजनीति करे, लेकिन हमने अतिक्रमण के नाम पर तोड़े गए मंदिरों के पुनर्निर्माण और विश्व प्रसिद्ध जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर का प्राधिकरण बनाने की शपथ ली है। वह दावा करते हैं कि बाबा ने मेरी जीत पक्की कर दी है। मैं जीता तो स्थानीय बस स्टैंड को हटने नहीं दूंगा।