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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कैबिनेट में CM कमलनाथ ने दिखाए कड़े तेवर, बिजली सप्लाई को लेकर निर्देश जारी

By Rahul.vavikarEdited By:
Published: Wed, 26 Dec 2018 04:22 PM (IST)

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों से स्पष्ट तौर पर कहा कि विभाग की पूरी जिम्मेदारी मंत्रियों की रहेगी।

कैबिनेट में CM कमलनाथ ने दिखाए कड़े तेवर, बिजली सप्लाई को लेकर निर्देश जारी
कैबिनेट में CM कमलनाथ ने दिखाए कड़े तेवर, बिजली सप्लाई को लेकर निर्देश जारी

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी पहली कैबिनेट में मंत्रियों और अधिकारियों को अपने कड़े तेवर दिखला  दिए। उन्होंने बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए जिला स्तर पर ऊर्जा समितियों को भंग करने के निर्देश दिए। सीएम ने तय समय मे खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने के भी आदेश दिए। इसके अलावा उन्होंने मंत्रियों से साफ तौर पर कहा कि विभाग की पूरी जिम्मेदारी मंत्रियों की रहेगी।

कैबिनेट की पहली बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वय की जिम्मेदारी अधिकारियों की रहेगी। अधिकारी याद रखे कि जो काम नहीं करेगा उन अधिकारियों को बदल दिया जाएगा। कमलनाथ बिजली व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा गंभीर दिखे। बिजली सप्लाई व्यवस्थित और निर्बाध बनाने के लिए उन्होंने बिजली कंपनी के अधिकारियों को हर कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को हर कैबिनेट में बिजली व्यवस्था के अपडेट को लेकर एक प्रेजेंटेशन देने को कहा है। ये पूरी कवायद बिजली बिल हाफ करने के लिए की जा रही है।

करीब  2 घंटे तक चली इस बैठक में कमलनाथ ने अधिकारियों से कहा कि जो काम उनके स्तर का है वो वहीं निपटा लिया जाए। यदि ये काम उनके पास पहुंचा तो ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पहली ही बैठक में उन्होंने कड़े तेवर दिखलाते हुए कहा कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही और गड़बड़ी नहीं होना चाहिए। कमलनाथ सरकार की दूसरी कैबिनेट गुरुवार को फिर बुलाई गई है, जिसमें किसान कर्ज माफी पर चर्चा की जाएगी।

अधिकारियों के लिए तो कमलनाथ सख्त दिखे ही, लेकिन अपनी टीम के सदस्यों को भी कमलनाथ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि प्रदेश का शासन मुख्यमंत्री सचिवालय से नहीं बल्कि विभाग से ही चलेगा। अपने विभाग के लिए मंत्री खुद जिम्मेदार होंगे। विभागीय मंत्रियों की जिम्मेदारी है कि वचन पत्र में किए वादे का जल्द से जल्द क्रियान्वन हो और समापन निश्चित समय में हो ये निर्धारित किया जाए।