नई दिल्ली, एएनआइ। मालेगांव बम धमाके की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के संसद पहुंचने के सपने पर विराम लग सकता है। जमानत पर जेल से बाहर आकर उनके लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर धमाकों के एक पीड़ित ने आपत्ति जताई है। पीड़ित ने मामले में एनआइए कोर्ट में याचिका डाली है। उधर साध्वी प्रज्ञा ने एक कार्यकर्ता सम्मेलन में जेल में बिताए अपने दिनों को याद कर भावुक हो गईं।

कार्यकर्ता सम्मेलन में साध्वी प्रज्ञा ने अपने जेल के दिनों को याद करते अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बताया कि जेल में किस तरह से उन्हें टॉर्चर किया जाता था। इस दौरान कई बार उनकी आंखें भर आईं। वह बार-बार अपने आंसू पोंछते हुए कार्यकर्ताओं को संबोधित करती रहीं।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा, ‘जब मुझे लेकर गए गैर कानूनी तरीके से 13 दिन तक रखा। पहले ही दिन बिना कुछ पूछे हुए, उन्होंने मुझे बुलाया, ढेर पुलिस थी और मुझे बुलाकर उन्होंने जो पीटना शुरू किया। उन्होंने मुझे चौ़ड़ी बेल्ट (फट्टे) से मारा, जिसमें लकड़ी का एक हत्था लगा होता है। उस बेल्ट से मारते थे। एक भी बेल्ट हाथ में पड़ता है तो पूरा सूज जाता है। आप अगर दूसरा बेल्ट झेल पाएंगे तो आपके हाथ फट जाएंगे। ये जो बेल्ट मारते थे पूरा नर्वस सिस्टम ढीला पड़ जाता था। सुन्न पड़ जाते थे। और ये दिन और रात पीटते थे। मैं आपके सामने अपनी पीड़ा नहीं बता रही हूं, लेकिन इतना कह रही हूं कि और कोई बहन आज के बाद कभी भी इस पीड़ा का सामना न कर सके। (साध्वी प्रज्ञा रोते हुए और आंसू पोछते हुए) इतनी गंदी गालियां देते थे, पीटते-पीटते। धमकाते थे उल्टा लटका देंगे। तुझे निर्वस्त्र कर देंगे। असहनीय है मेरे लिए कहना।'

मालूम हो कि भाजपा ने दो दिन पहले ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से अपना लोकसभा उम्मीदवार घोषित किया है। वह भोपाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को टक्कर देंगी। पीड़ित ने साध्वी प्रज्ञा के भाजपा उम्मीदवार घोषित होने के बाद ये आपत्ति जताई है।

साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ एनआईए कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराने वाले एक पीड़ित के पिता ने कहा है कि उन्हें अभी एनआइए कोर्ट से बरी नहीं किया गया है। पीड़ित ने उम्मीदवारी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि साध्वी प्रज्ञा ने अपनी जमानत में खराब स्वास्थ्य को भी एक अहम आधार बनाया था। ऐसे में उनका लोकसभा चुनाव लड़ना आपत्तिजनक है।

मालेगांव धमाकाः कब क्या हुआ इस केस में

  • मालेगांव ब्लास्ट 2008 मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में जांच एजेंसी एनआईए पहले ही उन पर से आरोप वापस ले चुकी है। यहां पढ़ें मालेगांव ब्लास्ट मामले से जुड़ी हर बात।
  • 29 सितंबर 2008 को हुए मालेगांव धमाके में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 79 को चोटें आईं। नासिक जिले के मालेगांव शहर में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास यह धमाका हुआ। यहां एक मोटरसाइकिल में छिपाकर विस्फोटक पदार्थ रखा हुआ था।
  • इस धमाके की जांच महाराष्ट्र एटीएस को सौंपी गई। एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे (26/11 मुंबई आतंकी हमले में शहीद हो गए) ने इसकी जांच शुरू की तो मोटरसाइकिल मालिक की जांच उन्हें सूरत तक ले गई। यहीं से एटीएस के हाथ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर तक पहुंचे।
  • इसी क्रम में कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित और रिटायर मेजर रमेश उपाध्याय भी गिरफ्त में आए। इस धमाके में अभिनव भारत संगठन की तरफ भी उंगलियां उठीं। इनमें से कुछ लोगों के नाम मालेगांव 2006 जैसे अन्य घटनाओं में भी आया।
  • 20 जनवरी 2009 और 21 अप्रैल 2011 को महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई की विशेष मकोका अदालत में 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 8 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि 4 को जमानत मिल गई। इनके अलावा दो आरोपी गिरफ्त से बाहर थे।
  • गृह मंत्रालय के निर्देशों पर 13 अप्रैल 2011 को यह मामला महाराष्ट्र एटीएस से एनआईए को सौंप दिया गया।
  • 13 मई 2016 को एनआईए ने सबूतों के अभाव मे अपनी चार्जशीट में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और पांच अन्य के खिलाफ सभी आरोप वापस ले लिए। 
  • 28 जून 2016 को विशेष एनआईए कोर्ट ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। जबकि इससे एक महीने पहले ही जांच एजेंसी ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।
  • 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को सशर्त जमानत दे दी। लेकिन उन्हें अपना पासपोर्ट एनआइए के पास जमा कराना होगा और 5 लाख रुपये की जमानत राशि भी देनी होगी। इसके अलावा साध्वी को ट्रायल कोर्ट में तारीखों पर उपस्‍थित होने का भी निर्देश कोर्ट ने दिया है।

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Posted By: Amit Singh

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